रामलीला मंचन: हनुमान ने उजाड़ी सोने की लंका, युद्ध में गए बालि का हुआ वध

रामलीला मंचन: हनुमान ने उजाड़ी सोने की लंका, युद्ध में गए बालि का हुआ वध
रामलीला मंचन: हनुमान ने उजाड़ी सोने की लंका, युद्ध में गए बालि का हुआ वध

Atul Acharya | Updated: 06 Oct 2019, 12:54:27 PM (IST) Bikaner, Bikaner, Rajasthan, India

Ramlila Manchan- 'इस समय न रण करने जाओ, दिल मेरा बहुत धड़कता, मैं नहीं समझती क्या कारण....पत्नी तारा बालि को रणभूमि में जाने से मना कर रही है, लेकिन पति बालि ने जबाव दिया प्यारी प्रीतम हो न दु:ख को प्राप्त हो, रण में सौ सुग्रीव हो...सुग्रीव-बालि युद्ध से पूर्व का यह संवाद बालि व उसकी पत्नी के बीच में शनिवार रात को लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर में चल रही रामलीला के मंच पर साकार हो रहा था।

बीकानेर. 'इस समय न रण करने जाओ, दिल मेरा बहुत धड़कता, मैं नहीं समझती क्या कारण....पत्नी तारा बालि को रणभूमि में जाने से मना कर रही है, लेकिन पति बालि ने जबाव दिया प्यारी प्रीतम हो न दु:ख को प्राप्त हो, रण में सौ सुग्रीव हो...सुग्रीव-बालि युद्ध से पूर्व का यह संवाद बालि व उसकी पत्नी के बीच में शनिवार रात को लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर में चल रही रामलीला के मंच पर साकार हो रहा था। जहां श्रीराम कला मंदिर के तत्वावधान में चल रामलीला का मंचन किया जा रहा है।

शनिवार को रामलीला में हनुमान अवतरण, सुग्रीव-बालि युद्ध, हनुमान-राम मिलन, रावण-सीता संवाद सहित कई प्रसंगों को मंच पर साकार किया गया। नवरात्रा के दौरान शहर में कई स्थनों पर रामलीला का मंचन हो रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु देररात तक डटे रहते हैं। रामलीला आयोजन को लेकर गिरीराज जोशी सहित श्रद्धालु सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

कौन कहां से आया...
'कौन कहां से आया है, कुछ अपनी बता बंदरे, उद्यान उजाड़ा क्यों मेरा... रावण ने हनुमानजी से सवाल किया, कहा कि क्या कारण था जो मेरा उद्यान उजाड़ दिया, जवाब में हनुमानजी ने कहा 'महाराज मैं दूत राम रघुराज का हूं, बजरंगी हूं बानर देश का...रावण-हनुमान संवाद का दृश्य शनिवार को गवरन्मेंट प्रेस रोड स्थित गोपीनाथ मंदिर में चल रही रामलीला में साकार हो रहा था। जहां बड़ी तादाद में श्रद्धालु रामलीला के साक्षी बने थे।

शहरी जन कल्याण सेवा संस्थान एवं श्री राम रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला में शनिवार को लंका दहन, रावण-सीता संवाद सहित कई प्रसंगों का साकार मंचन हुआ। कमेटी के तत्वावधान में जय नारायण गोयल, भंवरलाल बडग़ुर्जर, घीसाराम सैनी, आशा भार्गव, मोहम्मद राठौड़ का सम्मान किया गया। आयोजन को लेकर खुशालचंद व्यास, किशन स्वामी आदि भागीदारी निभा रहे हैं।

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