‘सुनके दया करो विनय म्होरी खास है, माई मोटी शीतला तुमसे अरदास है’

शीतला अष्टमी- घर-घर और मंदिरों में हुआ मां शीतला का पूजन
मंदिरों में लगी श्रद्धालुओं की कतारें, बासोड़ा अर्पित, किया जलाभिषेक

By: Vimal

Published: 05 Apr 2021, 11:19 AM IST

बीकानेर. ‘सुनके दया करो विनय म्होरी खास है’, ‘सुपने में दरस दिखाया रे, हो माजी शीतला’ सरीखे भजन और स्तुतियां घर-घर और मंदिरों में गूंजते रहे। शीतला अष्टमी पर घरों सहित मंदिरों में मां शीतला की पूजा-अर्चना कर शीतल जल से जलाभिषेक किया गया। मंदिरों में अलसुबह से श्रद्धालुओं की लंबी कतारे लगी।

श्रद्धालुओं ने बासोडा के रूप में शनिवार को तैयार किए गए भोजन का भोग मां शीतला के अर्पित किया और इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया। छोटे बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना को लेकर बच्चों को मां शीतला के चरणों में धोक लगवाई गई। घरों में पानी की मटकियों पर मां शीतला की अनुकृति चित्रित कर पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने पूजा-अर्चना के दौरान मां शीतला की स्तुती वंदना कर घर-परिवार की सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। गली-मोहल्लों में माता की सवारी गदर्भ का पूजन किया गया। शीतला अष्टमी पर लोगों ने गर्म पेय और खाद्य पदार्थो का सेवन वर्जित रखा।

 

मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की कतारें
शीतला अष्टमी पर शीतला गेट, मरुनायक चौक सहित शहर में विभिन्न स्थानों पर स्थित मां शीतला के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। बच्चों, महिला और पुरुषों ने कतारों में लगकर मां शीतला का दर्शन कर जलाभिषेक किया। शीतला गेट स्थित मां शीतला के मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी। मंदिर से सडक़ मार्ग तक लंबी कतारों में लगकर श्रद्धालुओं ने मां शीतला के दर्शन किए। अलसुबह से रात तक मंदिरों में दर्शन-पूजन और स्तुती वंदना का दौर चलता रहा।

 

विविध खाद्य सामग्रियों का भोग अर्पित
शीतला अष्टमी पर घर-घर और मंदिरों में शनिवार को तैयार की गई विविध खाद्य सामग्रियों का भोग मां शीतला के अर्पित किया। इस दौरान लोगों ने गुळराब, छाछ राब, बाजरा रोटी, कैर सांगरी सब्जी, बेसन और मोगर से तैयार पराठे, दही, कलाकंद, दही बड़े, कांजी बड़े आदि सामग्रियों को बासोड़ा के रूप में अर्पित किया और इन्हे प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया।

 

पानी की मटकियों पर मां शीतला का पूजन
शीतला अष्टमी की परम्परा अनुसार घर-घर में पीने के पानी की नई मटकिया रखी गई। अलसुबह घर परिवार की महिलाओं ने सामुहिक रूप से इन मटकियों पर कुमकुम से मां शीतला की अनुकृति चित्रित कर विविध पूजन सामग्रियों से मां शीतला का पूजन किया। आरती कर बासोड़ा अर्पित किया और मां शीतला की कथा को सुना।

 

गदर्भ का किया पूजन
मां शीतला की सवारी गदर्भ का गली-मोहल्लों सहित मंदिरों के बाहर पूजन किया गया। महिलाओं ने गदर्भ पूजन कर उसकी परिक्रमा की । महिलाओं ने सामुहिक रूप से गदर्भ के पूजन के दौरान वस्त्र भी अर्पित किए और बासोड़ा भोग गदर्भ को खिलाया।

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