स्टोरियों का सैटअप तैयार, हर मैच पर होगा करोड़ों का सट्टा

आईपीएल सीजन-१३ :- बीकानेर और नोखा सट्टे के लिए देशभर में बदनाम

By: Jaiprakash

Published: 15 Sep 2020, 09:50 AM IST

बीकानेर। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के प्रति युवाओं में बेहद क्रेज है। फटाफट क्रिकेट खेल प्रेमियों के लिए जितना मनोजरंजन है, उससे कई गुना सटोरियों के लिए कमाई का जरिया बना हुआ है। बीकानेर शहर के कई इलाकों समेत नोखा, श्रीडूंगरगढ़, लूणकरनसर, जामसर, खाजूवाला व छतरगढ़ में हर मैच पर करोड़ों के दांव लगते हैं। पुलिस की फौरी कार्रवाई से स्टोरियों के हौसलें बुलंद हैं। नतीजन हर बार क्रिकेट का टेस्ट मैच हो, वन-डे हो या टवेंटी-२० क्रिकेट मैच सटोरिये सैकड़ों युवाओं को कर्ज और अपराध के दलदल में धंसा देते हैं और पुलिस व प्रशासन मूकदर्शक बने रहते हैं।

बीकानेर संभाग ही नहीं प्रदेशभर में सटोरिये संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे हैं। सट्टे का पूरा करोड़ों का कारोबार सटोरियों की ओर से बनाए गए कोडवर्ड से किया जाता है। लाखों करोड़ों के दावं एक फोन पर लगते है और रद्द होते हैं।

ऐसे चलती है स्टोरियों की चेन
हर शहर में एक प्रमुख सटोरिया होता है जो मुंबई, नागपुर व दिल्ली में बैठे बुकी के संपर्क में रहता है। मुखिया बनने के लिए वह बुकी को एडवांस रकम जमा कराता है। फिर शहर का यही मुखिया अपने अलग-अलग एजेंट बनाता है। वह अपने इन एजेंटों से एक निश्चित एडवांस रकम वसूल करता है ताकि वे अगर घाटे जाए तो उसका रुपया न डूबे। मैच शुरू होने के आधा घंटा पहले सटोरिए अलर्ट हो जाते हैं। इसके बाद सट्टा खेलने वाले वाले (जिन्हेंं पेंटर कहते हैं) दावं लगाने के लिए फोन करने लगते हैं, जिन्हें सटोरियों के एजेंट यानि खाईवाल रिसीव करते हैं। सट्टे की भाषा में एक लाख रुपए को एक पेटी, ५० हजार को आधी पेटी व २५ हजार को क्वार्टर कहते हैं। यदि भाव कम करना हो तो फोन पर पटंर को पाछी खाई लगााई बोलना पड़ता है। तब उसका सट्टा कट जाता है। सट्टा लगाने वाले को पंटर कहते हैं।

मैच के अगले दिन होता है राशि का भुगतान
सटोरिये बेहद ईमानदारी से काम करते हैं। फोन पर ही लाखों-करोड़ों रुपए के दावं लगते हैं। सटोरिए मैच में राशि जीतते हैं या हारते हैं बेहद ईमानदारी से राशि का भुगतान करते हैं। सटोरियों की ओर से तय किराना दुकानों, जनरल स्टोर, सब्जी की दुकानें, मोबाइ शॉप, पान की दुकान पर भुगतान कर दिया जाता है। संबंधित दुकानों से राशि लेने वाले को सटोरियों की ओर से तय कोडवर्ड बताने पर वह रुपया उसे दे दिया जाता है। इनके कोडवर्ड भी कुछ इस तरह होते हैं किराणा की दुकान पर हजारों के भुगतान के लिए बादाम दे दो, लाखों में काजू-किसमिस, जनरल स्टोर पर ब्रश, कंघा व पैराशूट ऑयल, मोबाइल की दुकान पर बैट्री दे दो, ईयर फोन लेने है और बड़ी रकम होने पर लेटेस्ट स्मार्ट फोन की मांग करते हैं। पान की दुकान पर मसालेदार पान, बनारसी पान व मद्रासी मान इनके कोडवर्ड हैं।

छोटी मछलियों को पकड़ पुलिस कर लेती है इतिश्री
जिले में बड़े स्तरपर क्रिकेट सट्टा होता है लेकिन पुलिस महज छोटे सटोरियों को पकड़कर इतिश्री कर लेती है। पूरे खेल में इसमें टॉस से लेकर जीत तक के दांव लगाए जाते हैं। पिछले आईपीएल ने पुलिस ने जिलेभर में महज १३ कार्रवाई की थी। स्टोरियों को पकड़ा था, इनमें भी एक-दो को छोड़करर कोई नामचीन सटोरिया नहीं था।

सट्टे को लेकर संजीदा नहीं होती पुलिस
शहर में मोबाइील के जरिए संचालित हो रहे सट्टे पर पुलिस संजीदा नहीं है। शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट सट्टा संचालित होने की बात प्रमाणित होने के बावजूद पुलिस इसे गंभीरता से नहीं लेती। करीब पांच साल पहले पुलिस अधीक्षक ने नोखा के सटोरियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। इतना ही नहीं प्रदेश का पहला ऐसा मामला था, जिसमें सटोरियों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था।

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- दो से पांच करोड़ का कारोबार हर दिन बीकानेर जिले में
- मुंबई, दिल्ली व नागपुर में बड़े स्टोरिए तय करते हैं भाव
- जिले में सटोरियों के लिए सैकड़ों एजेंट करते हैं काम
- हजारों लोग करते हैं दावं
- बड़े सटोरियों कई बार बड़ी रकम का हवाला से लेन-देेन करते हैं।

आईपीएल सीजन-१३
- १९ सितंबर से शुरू होगा क्रिकेट का महामुकाबला
- टीमें ८
- प्रत्येक टीम १४-१४ लीग मैच खेलती है
- सेमीफाइनल में दो-दो टीमें का एक-एक मैच
- फाइनल में दो टीमों के बीच मुकाबला
- फाइनल मैच जीतने वाली टीम बनती है विजेता
- एक टीम में ११ खिलाड़ी खेलते हैं लेकिन टीम का हिस्सा कुल १५ खिलाड़ी होते हैं


इनका कहना है...
आईपीएल मैच को लेकर पुलिस ने प्लान तैयार किया है, जिसके तहत जिलेभर के थानाधिकारियों को अलर्ट कर दिया है। जिला स्पेशल टीम के अलावा विशेष टीमें गठित की गई है। क्रिकेट सटोरियों के साथ किसी पुलिस अधिकारी की संलिप्तता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रहलादसिंह कृष्णिया, पुलिस अधीक्षक

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