दो शताब्दी से भारत में टिड्डी दलों का ऐसे हुआ हमला

दो शताब्दी से भारत में टिड्डी दलों का ऐसे हुआ हमला

Jitendra Goswami | Updated: 14 Jun 2019, 04:30:48 PM (IST) Bikaner, Bikaner, Rajasthan, India

टिड्डियों के व्याापक प्रजनन झुंड बनाना और उससे फसलों को होने वाली क्षति की लगातार दो वर्ष से अधिक अवधि को प्लेग अवधि कहते हैं।

बीकानेर. रेगिस्तानी टिड्डी का आक्रमण सामान्यतया प्लेग चक्र के प्रारंभिक चरणों में होता है। टिड्डियों के व्याापक प्रजनन झुंड बनाना और उससे फसलों को होने वाली क्षति की लगातार दो वर्ष से अधिक अवधि को प्लेग अवधि कहते हैं। उसके बाद 1 से 8 वर्ष की बहुत कम टिड्डी गतिविधियों को टिड्डी प्रकोपमुक्त अवधि कहते हैं। इसके बाद फिर से अगली प्लेग अवधि आती है। भारत ने पिछली दो शताब्दियों के दौरान निम्नानुसार कई टिड्डी प्लेग और उतार.चढ़ाव देखे हैं। वनस्पति संरक्षण संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह तस्वीर नजर आती है।

 

विभिन्न वर्षों के दौरान पाया गया टिड्डी प्लेग


1812.1821 1900.1907
1843.1844 1912.1920
1863.1867 1926.1930
1869.1873 1940.1946
1876.1881 1949.1955
1889.1891 1959.1962

 

विभिन्न वर्षों के दौरान पाए गए टिड्डी उतार.चढ़ाव


वर्ष टिड्डी झुंडों के आक्रमणों की संख्या

1964 004
1968 167
1970 002
1973 006
1974 006
1975 019
1976 002
1978 020
1983 026
1986 003
1989 015
1993 172
1997 004

 

छोटे स्तर पर प्रजनन पर नियंत्रण

 

वर्ष 1998, 2002, 2005, 2007 और 2010 के दौरान छोटे स्तर पर भी स्थानीय टिड्डी के प्रजनन की सूचना मिली थी जिस पर नियंत्रण कर लिया गया। वर्ष 2010 से 2012.13 तक स्थिति नियंत्रण में रही और बड़े स्तर पर टिड्डी के प्रजनन और उनके झुंडों की कोई सूचना नहीं प्राप्त हुई। तथापि राजस्थान और गुजरात राज्यों में कुछ स्थानों पर समय.समय पर रेगिस्तानी टिड्डी के कहीं.कहीं पर मौजूद होने की सूचना प्राप्त हुई थी।

 

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