थाली में परोस रहे मीठे जहर से बढ़ रहा कैंसर का खतरा

थाली में भोजन की जगह जहर परोसा जा रहा है। यह हकीकत है। एसपी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र में पहुंचने वाले मरीजों के आंकड़ों से पता चलता है। कैंसर एवं कृषि विशेषज्ञों के बढ़ते कैंसर पर चिंतित है।

By: Nikhil swami

Published: 08 Dec 2019, 10:05 AM IST

जयप्रकाश गहलोत. बीकानेर. थाली में भोजन की जगह जहर परोसा जा रहा है। यह हकीकत है। एसपी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र में पहुंचने वाले मरीजों के आंकड़ों से पता चलता है। कैंसर एवं कृषि विशेषज्ञों के बढ़ते कैंसर पर चिंतित है।


70 सालों में भारत में कीटनाशक का उपयोग 20 हजार टन से 90 हजार टन हो गया है जो मानव स्वास्थ्य के घातक है। फसलों में कीटनाशकों का ज्यादा उपयोग करने से जमीन की सेहत लगातार खराब हो रही है। साथ ही हमारी थाली भी जहरीली होती जा रही है। कीटनाशकों का प्रयोग बंद करने के लिए किसानों को कीट ज्ञान हासिल करके खुद जागरूक होना होगा।


ज्यादा कीटनाशकों से बढ़ रही कैंसर की बीमारी
एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एचएस कुमार का कहना है कीटनाशक के जमीनी पानी में मिलने के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं। कीटनाशक खाने के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने के बाद हमारे शरीर में जमा होते रहते हैं। कीटनाशकों के बढ़ते प्रभाव से शरीर का नर्वस सिस्टम प्रभावित हो रहा है। इसके चलते पेट दर्द, जोड़ दर्द, कैंसर जैसी घातक बीमारियां शरीर को अपनी चपेट में ले रही हैं।


पौधों को नहीं मिल रहे जरूरी पोषक तत्व
कृषि अनुसंधान केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक कृषि विशेषज्ञ डॉ. पीएस शेखावत ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खरपतवारनाशी को कैंसरकारक घोषित किया हुआ है लेकिन इसके बाद भी इसका प्रचलन लगातार बढ़ रहा है। पौधों को 17 प्रकार के पोषक तत्वों की जरूरत होती है लेकिन किसान केवल यूरिया व डीएपी का अधिकतम प्रयोग कर रहा है, जिससे भूमि का स्वास्थ्य खराब हो रहा है और पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हैं।

दूषित हो रहा खानपान
कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मुकेश सिंघल के मुताबिक फसलों में बेहिसाब प्रयोग हो रहे कीटनाशकों के कारण खान-पान दूषित रहा है। इसके चलते मनुष्य दिन-प्रतिदिन गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहा है।


प्रतिबंध के बावजूद हो रहा उपयोग
डॉ. कुमार ने बताया कि मोनोडोपोटाश विश्व के 60 देशों में पूरी तरह प्रतिबंधित हैए जिसमें भारत शामिल है। मोनोडोपोटाश का भारत में खुलेआम उपयोग हो रहा है। जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।


70 साल में चार गुणा बढ़ा उपयोग
डॉ सिंघल ने बताया 1950 में हुए एक सर्वे में पता चला कि 1950 में 20 हजार टन कीटनाशक का उपयोग किया जा रहा था। वहीं हाल ही में हुए सर्वे में सामने आया कि 70 साल में भारत में कीटनाशक की खपत 90 हजार टन हो गई।

Nikhil swami Reporting
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