बीकानेर निवासी डॉ. उज्जवल कल्ला के दो रिसर्च को मिला पेटेंट

bikaner news - Two research of Dr. Ujjwal Kalla, resident of Bikaner, got patent

By: Jaibhagwan Upadhyay

Published: 12 Jul 2021, 06:22 PM IST

इंसानी जिंदगी के खतरे को कम करेगी, लागत भी घटाएगी
बीकानेर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उज्जवल कल्ला को दोनों रिसर्च में मिले पेंटेंट
बीकानेर.भोपाल.
मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) के इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उज्जवल कल्ला की दो रिसर्च इंसानी जिंदगी को बचाने के साथ ही मशीन की लागत को भी कम करेगी। दोनों रिसर्च को भारत सरकार से पेंटेंट भी मिल गया है।

डॉ. कल्ला ने हाईवोल्टेज इंसूलेटर टेस्टिंग मशीन बनाई है। इसकी मदद से इंसूलेटर के फ्लैश को बिना खतरे के लैब में ही चैक किया जा सकता। वहीं उन्होंने सिंगल फेस पानी की मोटर को जनरेटर में बदला है। इससे जनरेटर की लागत और मेंटनेंस दोनों कम होगा। उल्लेखनीय है कि डॉ. कल्ला बीकानेर शहर के रहने वाले हैं। डॉ. कल्ला ने बताया कि हाईवोल्टेज इंसूलेटर का उपयोग बिजली सप्लाई के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए 11 केवी की लाइन पर 70 हजार वोल्ट का करंट प्रवाहित किया जाए तो वह बहता है।

हवा में करंट बहाए जाने को फ्लैश ओवर वोल्टेज कहा जाता है। इसके लिए जिन इंसूलेटर का उपयोग किया जाता है उसे निर्माण के समय टेस्ट किया जाता है कि कहीं ये खराब तो नहीं है। अगर ये खराब होंगे तो लो वोल्टेज पर ही फ्लैश आ जाएगा। फैक्ट्री में इनके फ्लैश को एक ऑपरेटर टेस्ट करता है। इस दौरान उसे करंट लगने का खतरा बना रहता है। हमने जो तकनीक विकसित की है उसमें लैब में बैठकर ही केबल के अंदर के करंट की जांच की जा सकेगी कि इंसूलेटर में फ्लैश आ रहा है या नहीं। इस तकनीक की मदद से जांच में अधिक सटीकता आएगी। वहींए ऑपरेटर की जरूरत भी खत्म हो जाएगी। ये मशीन फॉल्ट टेस्टिंग यानी मानवीय गलतियों को भी खत्म कर देगी।

कम स्पीड में भी बन सकेगी बिजली
डॉ. कल्ला ने बताया कि उन्होंने आइआइटी दिल्ली से पढ़ाई की है। उस समय मैंने सिंगल फेस वाली पानी की मोटर को जनरेटर में बदलने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। अब मुझे इस तकनीक का पेंटेंट मिल चुका है। वर्तमान में जनरेटर को फिक्स स्पीड में चलाने पर बिजली बनती है। मेरे बनाए जनरेटर में स्पीड कम होने पर बिजली बनती रहती है। इसमें मैंने वाइडिंग को मोटर के स्थिर हिस्से में लगाया है, जबकि सामान्य जनरेटर में घूमने वाले हिस्से में लगाया जाता है। घर्षण होने से फॉल्ट का खतरा रहता है। इससे मेंटनेंस भी बढ़ता है। इस तकनीक से कीमत में कमी आएगी। इसमें हवा और डीजल दोनों की मदद से बिजली बनाई जा सकती है। जबकि सामान्य जनरेटर में हवा से बिजली नहीं बन सकती क्योंकि वो फिक्स स्पीड में बिजली बनाता है।

Jaibhagwan Upadhyay Reporting
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