कोरोनाकाल में घाटे से उभरी उरमूल डेयरी

bikaner news - Urmul Dairy emerged out of losses in the Coronasal

By: Jaibhagwan Upadhyay

Published: 17 Apr 2021, 12:01 PM IST

मैनेजमेंट में किया गया सुधार बना वरदान, अब दूसरी डेयरी समितियों की नजर
एक्सक्लूसिव स्टोरी
बीकानेर.
कोरोना महामारी में एक ओर जहां बड़ी-बड़ी कम्पनियां घाटे में डूब गई या फिर बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं, वहीं बीकानेर की उरमूल डेयरी ने करीब दो करोड़ रुपए के घाटे से निकलकर नायाब उदाहरण पेश किया है। मैनेजमेंट की ओर से किए गए बदलाव डेयरी प्रशासन के लिए न केवल कारगर साबित हुए बल्कि अब उसी बदलाव पर प्रदेश की अन्य दुग्ध उत्पादन समितियों ने काम करना भी शुरू कर दिया है।

डेयरी के वार्षिक घाटे पर नजर डालें तो छह माह पहले तक वह करीब दो करोड़ रुपए घाटे में चल रही थी, लेकिन वर्तमान में वह २८ लाख रुपए के अनुमानित मुनाफे में आ चुकी है। डेयरी प्रशासन की ओर से घाटे से निकलने के लिए जो तरीके अपनाए थे, उन्हें देख अब प्रदेश के उच्चाधिकारी बीकानेर की उरमूल डेयरी को मॉडल डेयरी के रूप में देखने लगे हैं। हालांकि इससे पूर्व वर्ष 2017-18 में भी डेयरी मुनाफे में रही थी, लेकिन इससे पहले और उसके बाद डेयरी को लगातार घाटे का दंश झेलना पड़ा था।


घाटे से यूं बाहर आई डेयरी
बीकानेर उरमूल डेयरी बीकानेर ही नहीं अपने आस-पास गांवों से भी दुग्ध संकलन का काम बड़े पैमाने पर करती है। लेकिन इतनी बड़ी डेयरी होने के बावजूद लॉकडाउन के दौरान डेयरी प्रशासन के पास महज 38 हजार लीटर दूध का प्रतिदिन संकलन हो रहा था। सबसे पहले मैनेजमेंट ने दुग्ध संकलन को बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके लिए दुग्ध उत्पादकों के दो बार रुपए बढ़ाए गए। इसका नतीजा यह हुआ कि दुग्ध संकलन का कार्य तेजी से बढऩे लगा। पिछले छह माह में डेयरी प्रशासन ने करीब साठ हजार लीटर दूध संकलन में इजाफा किया है।

वर्तमान में करीब एक लाख लीटर दूध के आंकड़ों को डेयरी प्रशासन छूने वाला है। इतना ही नहीं दूध की आवक बढऩे के साथ-साथ डेयरी प्रशासन ने अपने मोटे खर्चों में भी कटौती करनी शुरू कर दी। ठेकेदारों के माध्यम से लगे कार्मिकों को डेयरी प्रशासन ने हटाना शुरू कर दिया। हटाए गए कार्मिकों के काम को डेयरी प्रशासन के अधिकारियों और कार्मिकों को सौंपा गया।


गुणवत्ता पर दिया ध्यान
डेयरी के प्रबंध संचालक डॉ.एसएन पुरोहित ने बताया कि उरमूल डेयरी प्रशासन ने लॉकडाउन में अपने खर्चों में कटौती करने और दुग्ध संकलन को बढ़ाने के साथ-साथ दूध की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया। इसका नतीजा यह निकला कि दूध के एसएनएफ और फैट में बढ़ोतरी होने लगी। जिससे डेयरी प्रशासन का फायदा दिनों-दिन बढऩे लगा। पुरोहित ने बताया कि हर बार दूध बढऩे पर उसका घी और पाउडर बना लिया जाता है, लेकिन इस वर्ष हमने दूध से घी और पाउडर बनाने के स्थान पर दूध की बिक्री पर जोर रखा।


दिल्ली दूध का बड़ा खरीदार
उरमूल डेयरी के प्रबंध संचालक डॉ. एसएन पुरोहित ने बताया कि दिल्ली स्थित भारत सरकार का उपक्रम दिल्ली मिल्क स्कीम दूध का बड़ा खरीदार है। बीकानेर डेयरी से सप्ताह में दो टैंकर दूध के दिल्ली जाते थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान हमने तीन टैंकर दूध के भेजने शुरू कर दिए। इतना ही नहीं अतिरिक्त भेजे जाने वाले दूध का मूल्य भी हमने पहले से कहीं ज्यादा लिया। पुरोहित ने बताया कि लॉकडाउन से पूर्व डेयरी प्रशासन के पास पाउडर और घी का बड़ा स्टॉक पड़ा था, जिसे मुनाफे में बेचना शुरू कर दिया। यही वजह रही कि डेयरी प्रशासन दो करोड़ के घाटे से उभरकर २८ लाख रुपए मुनाफे में चली आई।

Jaibhagwan Upadhyay Reporting
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