सीएम से लेकर मंत्री तक ने देखे हालात, गंदे पानी का दंश फिर भी समाधान नहीं

waste management issue: समस्या के चलते अब पलायन करने को मजबूर क्षेत्रवासी, सुजानदेसर रोड के दोनों तरफ फैला गंदा पानी, पर्यावरण, रोजगार, स्वास्थ्य आदि प्रभावित

बीकानेर. गंगाशहर.

सुजानदेसर रोड के दोनों तरफ लम्बे चौड़े भू-भाग में फैल घरेलू गंदे पानी एवं बरसाती पानी की समस्या को शासन और प्रशासन दोनों जानते और समझते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मौजूदा स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल और ऊर्जा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला इस क्षेत्र का दौरा कर लोगों को समस्या से निजात दिलाने का वादा कर चुके हैं। इसके बावजूद गंदे पानी की समस्या सालों से जस की तस है। दर्जनों परिवार गंदे पानी की परेशानी झेल रहे हैं। कई परिवार तो यहां से पलायन भी कर चुके हैं।

नब्बे के दशक में शुरुआत

लोग बताते हैं कि 90 के दशक में चांदमल ढड्ढा के बाग के पीछे कोचर के ईंट भट्टे में बरसाती पानी भरने से इस परेशानी की शुरुआत हुई। फिर आवासीय क्षेत्र का सीवरेज का पानी भी सड़क के दूसरी तरफ गड्ढों में छोड़ा जाने लगा। आज गंदे पानी की जद में सुजानदेसर एवं गंगाशहर के वार्ड 3 एवं वार्ड 27 आ चुके हैं। क्षेत्रवासियों ने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन आज तक किसी ने समाधान के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किए। करीब 80-100 बीघा भूमि क्षेत्र में पसरे गंदे पानी ने यहां की आबोहवा को दूषित कर दिया है।

जब मौके पर आए जनप्रतिनिधि

जनप्रतिनिधि : तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
मौका देखा : वर्ष 2009

यह कहा: अधिकारियों को समस्या के समाधान का प्रोजेक्ट बनाकर देने के निर्देश दिए। लोगों को जल्द परेशानी से निजात दिलाने का वादा किया।
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मकानों को नुकसान

बंद पड़े ईंट भट्टों के गड्ढों में गंदा पानी भरा रहने से आस-पास के मकानों में सीलन आ रही है। अधिकतर घरों में दरारें आ गई है। पानी से सड़ांध आती रहती है। इस पानी से इस क्षेत्र में पर्यावरण, रोजगार, स्वास्थ्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।

दिया है प्रस्ताव

सरकार ने सुजानदेसर रोड पर एकत्र गंदे पानी की निकासी का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए है। आरयूआइडीपी ने 10 करोड़ रुपए का अनुमानित प्रस्ताव दिया है। इस राशि से गंदे पानी वाले स्थान पर एक पम्पिंग स्टेशन बनाकर पाइप लाइन से गंदे पानी को आगे गोचर में ले जाया जाएगा।
डीके मित्तल, अधिशासी अभियंता, आरयूआइडीपी

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रहना मजबूरी

1993 में बनाए मकान को बचाने के लिए हर साल मिट्टी और मलबा डलवाते हैं। अब तक करीब एक लाख रुपए खर्च कर चुके हैं। सीलन व बदबू से हालात खराब है, लेकिन यहां रहना मजबूरी है।
अर्जुनसिंह चौहान, क्षेत्रवासी

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1990 में लाखों रुपए खर्च कर मकान बनवाया। तब पता नहीं था कि मकान चारों ओर से गंदे पानी से घिर जाएगा। अभी कुछ दिन पहले ही घर के पीछे की दीवार बचाने के लिए कई ट्रॉली मिट्टी डलवाई थी।
गंगादेवी, क्षेत्रवासी

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8 वर्ष पहले अपनी जमा पूंजी खर्च कर घर बनाया। छह महीने से गंदे पानी का स्तर बढ़ रहा है। एेसे में भयभीत होकर परिवार के साथ अन्य जगह किराए के मकान में जाकर रहने लगे हैं।

धन्नेसिंह, क्षेत्रवासी

सीएम से लेकर मंत्री तक ने देखे हालात, गंदे पानी का दंश फिर भी समाधान नहीं

जनप्रतिनिधि : तत्कालीन स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल

मौका देखा : वर्ष 2011
यह कहा : मौके पर ही लोगों की बात सुनी और नक्शा तैयार कराया। इसके बाद चांदमल बाग के पास पम्पिंग स्टेशन बना। यहां से पानी डिग्गियों में डालना शुरू किया, लेकिन डिग्गियां भरने के बाद गंदा पानी आगे क्षेत्र में फैल गया। अब पम्पिंग स्टेशन भी बंद पड़ा है।

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जनप्रतिनिधि : ऊर्जा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला

मौका देखा : वर्ष 2019
यह कहा : लोगों से परेशानी सुनी, समस्या समाधान का वादा किया। दस करोड़ रुपए सरकार से स्वीकृत कराने के साथ शीघ्र काम शुरू कराने की बात कही। आज तक समस्या बरकरार है।

dinesh swami Reporting
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