लैब का अपशिष्ट पानी भी किया जा सकेगा रीसाइकिल, देखें वीडियो

राज्य के पहले लैब वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लान्ट का डूंगर कॉलेज में लोकार्पण

By: अनुश्री जोशी

Published: 04 Jan 2018, 09:44 AM IST

Bikaner, Rajasthan, India

शहर में मेडिकल कॉलेज व जगह-जगह खुली लैब का अपशिष्ट पानी भी रीसाइकिल कर पीने योग्य बनाया जा सकेगा। इसके लिए डूंगर कॉलेज के केमिस्ट्री विभाग के व्याख्याताओं व विद्यार्थियों ने लैब वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया है। राजकीय डूंगर कॉलेज बीकानेर के ग्रीन केमिस्ट्री रिसर्च सेंटर की ओर से डिजाइन व केमिस्ट्री एसोसिएशन द्वारा निर्मित राज्य के इस पहले लैब वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लान्ट का लोकार्पण बुधवार को डूंगर कॉलेज में किया गया।

 

व्याख्याता डॉ. नरेन्द्र भोजक ने बताया कि किसी भी प्रयोगशाला से सीधे छोड़े गए एक मिलीलीटर अम्ल से लगभग एक लाख लीटर पानी प्रदूषित हो जाता है। प्रयोगशाला के पानी को बिना ट्रीटमेंट भूमिगत जल में छोडऩे से पानी और मिट्टी दोनों की गुणवत्ता खराब होती है, जिससे विभिन्न बीमारियां हो सकती हैं। इस समस्या के निदान के लिए सेंटर की दस सदस्यों की टीम ने यह प्लान्ट बनाया है। अब इसे कॉलेज की एमएससी की प्रयोगशाला में स्थापित कर प्रदर्शित किया गया है।

 

मल्टीस्टेप प्रोजेक्ट
संयोजक डॉ. भोजक ने बताया कि वेस्ट वाटर के ट्रीटमेंट एवं पुन: उपयोग पर यह मल्टीस्टेप प्रोजेक्ट है। इसके प्रथम चरण का पायलट स्केल प्लान्ट का लोकापर्ण किया गया है और दूसरा चरण बुधवार से शुरू किया गया। कार्यक्रम में डॉ. आरपी माथुर एवं डॉ. सुषमा जैन ने प्राचार्य डॉ. बेला भनोत व डॉ. सतीश कौशिक का स्वागत किया। डॉ. भनोत ने कहा कि राजस्थान में पहली बार शोधार्थियों ने लैब वेस्ट वाटर को डिस्टिल्ड वाटर में बदलने का संयत्र बनाया है। इससे भूमिगत जल में भी सुधार होगा। डॉ. सतीश कौशिक ने कहा कि इस विधि से पर्यावरण संरक्षण के ग्रीन सिद्धांतों को व्यावाहारिक रूप से सीखा जा सकता है।

 

पांच विद्यार्थियों ने बनाया 3डी मॉडल
ग्रीन केमिस्ट्री रिसर्च सेंटर के राजस्थान प्रभारी डॉ. नरेन्द्र भोजक ने बताया कि डूंगर कॉलेज के पांच विद्यार्थियों अब्दुल शाहिद, हिमानी सुथार, जागृति गोसाई, सोनू सहारण एवं करिश्मा सांखला ने सोलर 3डी ट्रांसपेरेन्ट मॉडल बनाया। इसमें वाटर ट्रीटमेंट के दूसरे चरण को दर्शाया गया है। इससे वेस्ट वाटर को डिस्टिल्ड वाटर में बदला जाएगा। गौरतलब है कि डिस्टिल्ड वाटर 20 रुपए प्रति लीटर मिलता है, जिसे प्रत्येक प्रयोगशाला में खरीदा जाता है एवं वेस्ट वाटर जमीन में बहा दिया जाता है। इस प्रकार सोलर 3डी ट्रांसपेरेन्ट मॉडल में वेस्ट वाटर से डिस्टिल्ड वाटर बनाने की शुरुआत करने वाला डूंगर कॉलेज राजस्थान का पहला कॉलेज बन गया है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned