भाषा की सीमाओं से परे अनुभूति बिना संदेश देना असंभव

भाषा की सीमाओं से परे अनुभूति बिना संदेश देना असंभव

Nikhil Swami | Publish: Mar, 17 2019 11:23:56 AM (IST) Bikaner, Bikaner, Rajasthan, India

बीकानेर थियेटर फेस्टिवल के तीसरे दिन शनिवार को साहित्यकार नंदकिशोर आचार्य व अभिनेता राजेन्द्र गुप्ता के संवाद हुए वहीं पांच नाटकों का मंचन किया गया। शहर के अलग-अलग ऑडिटोरियम में सुबह से देर रात तक एक के बाद एक नाटक के मंचन का दौर चलता रहा। इन नाटकों वर्तमान सामयिकी व राजनीति के साथ राजनेताओं द्वारा किए गए घोटालों पर भी कटाक्ष किया गया।

बीकानेर. बीकानेर थियेटर फेस्टिवल के तीसरे दिन शनिवार को साहित्यकार नंदकिशोर आचार्य व अभिनेता राजेन्द्र गुप्ता के संवाद हुए वहीं पांच नाटकों का मंचन किया गया। शहर के अलग-अलग ऑडिटोरियम में सुबह से देर रात तक एक के बाद एक नाटक के मंचन का दौर चलता रहा। इन नाटकों वर्तमान सामयिकी व राजनीति के साथ राजनेताओं द्वारा किए गए घोटालों पर भी कटाक्ष किया गया।

 


सुबह हंसा गेस्ट हाउस में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नन्दकिशोर आचार्य और अभिनेता राजेन्द्र गुप्ता के बीच संवाद हुआ। इसमें संवाद सूत्र साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी थे। संवाद में अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि बिना अनुभूति के कोई संदेश दिया ही नहीं जा सकता, जबकि नंदकिशोर आचार्य ने कहा कि हर अनुभूती अपने आप में एक संदेश होती होती है और अनुभूति की पहुंच भाषा की सीमाओं से भी परे है।

 


रंगमंच अभिनेता का माध्यम है या निर्देशक का, इस सवाल के जवाब में राजेंद्र गुप्ता ने कहा की यह अभिनेता एवं निर्देशक दोनों का माध्यम है। डॉ. आचार्य ने कहा कि एक सहित्यिक कृति और उस पर आधारित नाटक या फि ल्म दोनों अलग- अलग विधाएं हैं और उन्हें इसी रूप में ही लेना चाहिए।

 

इस दौरान जयरूप जीवन को वर्ष २०१९ का निर्मोही नाट्य सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान स्वरूप में जीवन को सम्मान पत्र, शॉल और ११ हजार रुपए प्रदान किए गए।
थियेटर फेस्टिवल के तीसरे दिन शनिवार को प्रथम नाटक 'पांचालीÓ का मंचन जयरूप जीवन के निर्देशन में हुआ। नाटक में पांचाली की केंद्रीय भूमिका मंदाकिनी जोशी ने निभाई तथा द्रोपदी के प्रतिशोध और द्वंद्व को प्रभावी रूप से उभारा गया।

 

नाटक में पांचाली के दृष्टिकोण में एक अंतरदृष्टि से महाभारत के समय में महिलाओं के शोषण की स्थितियों का विश्लेषण भी प्रमुखता से दर्शाया गया वहीं पांचाली की विचार प्रक्रिया का चित्रण एक गहारी मनोवैज्ञानिक समझ के रूप में उभर कर सामने आई।

 


भाई-भतीजावाद की राजनीतिक अंतरधाराएं उजागर
दोपहर दो बजे टीएम ऑडिटोरियम में उड़ान आर्ट संस्थान हैदराबाद से आए सौरभ के निर्देशन में दूसरे नाटक 'सैंया भए कोतवालÓ का मंचन किया गया। ग्रामीण दर्शकों को मध्यनजर रखते हुए शहरी दर्शकों के लिए डिजाइन किया गया यह नाटक महाराष्ट्र के लोक तमाशा के प्रारूप का अनुसरण करता दिखा।

 

इसमें अयोग्य को विशेष पद बैठाने और नाटक की थपकी वालल्ी कॉमेडी में भाई-भतीजावाद की राजनीतिक अंतरधाराओं को बखूबी उजागर किया गया है।

 


राजस्थान के शौर्य व वीरता को दिखाया
तीसरी प्रस्तुति जयपुर के तपन भट्ट के निर्देशन में नाटक 'राजपुतानाÓ के मंचन के रूप में रही। इस नाटक का मंचन सायं 4.30 बजे रेलवे ऑडिटोरियम में किया गया। इस नाटक में राजस्थान की पन्ना धाय, हाड़ी रानी और मीरा की कहानियों के माध्यम से राजस्थान के गीत संगीत और लोक संस्कृति को प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया गया। इसके साथ राजस्थान की शौर्य व वीरता से अवगत करवाते हुए रानी पदमिनी के बलिदान को भी बखूबी दर्शाया गया।

 


सामाजिक मुद्दों पर चुटकी ली
चौथे नाटक 'गोरखधंधाÓ का मंचन रविन्द्र रंगमंच में दिल्ली के जे.पी. सिंह जयवद्र्धन के निर्देशन में किया गया। इस नाटक में गोरखधंधों की वर्तमान स्थितियों को तीखा कटाक्ष किया गया वहीं दर्शक भी तालियां बजाने को मजबूर हो गए। इस नाटक में दिल्ली की छोटी-छोटी समस्याओं पर पात्र प्रभावी रूप से खेला व गंभीर समस्याओं को सहज हास्य के माध्यम से मंच पर प्रदर्शित किया। साथ ही वर्तमान में व्याप्त सामाजिक व व्यक्तिगत सामाजिक मुद्दों पर चुटकी भी ली गई।

 


कृष्ण लीलाओं से अवगत करवाया
पांचवें नाटक का मंचन अहमदाबाद के अशोक बांठिया के निर्देशन में किया गया। नाटक 'कृष्णा-लवर एंड वारियरÓ के मंचन में कृष्ण प्रेमी और योद्धा भगवान श्री कृष्ण की जीवनी का विस्तृत रूप से प्रदर्शन किया गया। इसमें कान्हा का बचपन, राधा-कृष्ण प्रेम गाथा, कंस का वध, शिशुपाल का वध और महाकाव्य से पुन: जुड़ाव आदि का प्रभावी मंचन किया गया। इसमें महाभारत के चपल दृश्य, द्रोपदी चीर हरण, गीता उपदेश, अश्वत्थामा शाप, गांधारी का कृष्ण को शाप मंचन में शास्त्रीय गीत और रास को भी उचित स्थान दिया गया।

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