महिला एवं बाल विकास परियोजना: कागजों में धूल फांक रही नन्दघर योजना

महिला एवं बाल विकास परियोजना: कागजों में धूल फांक रही नन्दघर योजना

dinesh swami | Publish: Feb, 15 2018 10:42:57 AM (IST) Bikaner, Rajasthan, India

व्यवस्थाओं को सुधारने व केन्द्रों की हालत स्तरीय बनाने के लिए प्रारम्भ की गई 'नंदघर योजना' महज कागजी कवायद बनकर रह गई है।

लूणाराम वर्मा/महाजन. महिला एवं बाल विकास परियोजना के तहत क्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों पर जनसहयोग के माध्यम से व्यवस्थाओं को सुधारने व केन्द्रों की हालत स्तरीय बनाने के लिए प्रारम्भ की गई 'नंदघर योजना' महज कागजी कवायद बनकर रह गई है। हालात यह है कि कई अड़चनों के कारण दो वर्ष बीतने के बाद भी आंगनबाड़ी केन्द्रों को भामाशाह नहीं मिल पाये है।

 

दो साल पहले विभाग की और से आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के उद्ेश्य को लेकर नंदघर योजना प्रारम्भ की गई थी। योजना की जटिलता के कारण कोई भी भामाशाह आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लेना तो दूर इसमें हाथ डालने से भी कतरा रहे है। भामाशाह, सामाजिक ट्रस्ट, गैर सरकारी संगठन व कॉरपोरेट के तहत एक या अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लेने का प्रावधान है।

 

पांच साल तक आंगनबाड़ी केन्द्रों पर जरूरी कार्य करवाए जाते है। लूणकरनसर उपखण्ड क्षेत्र में अभी तक एक भी भामाशाह आगे नहीं आया है। योजना के तहत नियम व मापदण्ड इतने कठिन है कि भामाशाह इससे कतरा रहे हैं। सामाजिक संगठन केन्द्रों पर जरूरतों को पूर्ण कर रहा है परन्तु नियमों में कोई बंधना नहीं चाहता। बड़े दानदाताओं के आगे नहीं आने से लगभग सभी केन्द्रों पर व्यवस्थाएं बदहाल है।

 

यह होने थे कार्य
नंदघर योजना के तहत भामाशाह द्वारा चार प्रकार के कार्य करवाने का प्रावधान है। पहला जमीन उपलब्ध करवाकर भवन निर्माण करवाना, दूसरा सिर्फ जमीन उपलब्ध करवाना, तीसरा सिर्फ भवन का निर्माण करवाना एवं चौथा केन्द्र पर भौतिक संसाधान उपलब्ध करवाना है।

 

भामाशाह द्वारा केन्द्र पर राशि व्यय करने के लिए भी नियम बना है। एक केन्द्र के लिए प्रथम वर्ष ३० हजार रुपये व अगले चार साल तक दस हजार रुपये प्रति वर्ष खर्च करने होंगे। भामाशाह अधिक राशि व्यय करता है उसे प्रोत्साहित करने का प्रावधान भी है।

 

उरमूल कर रहा सहयोग
लूणकरनसर उपखण्ड क्षेत्र में १८८ मुख्य व २८ मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हो रहे है। अधिकांश केन्द्रों पर संसाधनों का अभाव है। उरमूल सेतू संस्थान कई केन्द्रों पर पानी, शिक्षण सामग्री व अन्य संसाधनों की पूर्ति करवाकर सहयोग दे रहा है।

 

संचालन करना कठिन
लूणकरनसर तहसील क्षेत्र में कुल २१६ आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हो रहे हंै। नंदघर योजना के तहत भामाशाह आगे नहीं आने से केेन्द्रों पर व्यवस्थाओं का सुचारू संचालन करना कठिन बन रहा है। उरमूल सेतू संस्थान कुछ केन्द्रों पर भौतिक सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए सहयोग कर रहा है।
नवरंगलाल मेघवाल, सीडीपीओ महिला एवं बाल विकास परियोजना।

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