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Russia ukraine war impact : उद्योगपतियों के 1500 करोड़ फंसे, बोले माल बेचा तो बिक जाएगा घर, नहीं दिया तो बंद हो जाएगा उद्योग

~ बम गिरा रहा रूस, बर्बाद हो रहे प्रदेश chhatisgarh के एमएसएमई MSME सेक्टर
~ प्रदेश के चार औद्योगिक जिलों में 1500 करोड़ से ज्यादा की सरकारी सप्लाई फंसी
~ उद्योगपति बोले टेंडर पूरा किया तो घर बिक जाएगा, नहीं पूरा किया तो उद्योग बंद हो जाएगा
~ उद्योगपतियों ने पीएम से लगाई गुहार, कहा फोर्स मेजर क्लास के अंतर्गत लिया जाए इस सेक्टर को

बिलासपुर

Updated: May 04, 2022 10:58:04 pm

बिलासपुर. रूस और यूक्रेन युद्ध का प्रभाव छत्तीसगढ़ के एमएसएमई सेक्टर पर जबरदस्त रूप से पड़ा है। आलम यह है कि छत्तीसगढ़ सहायक व लघु उद्योग संघ की ओर से पीएम मोदी से गुहार लगाई गई है कि उन्हें उचित मूल्य पर रॉ मेटेरियल raw material उपलब्ध करवाया जाए, साथ ही एमएसएमई MSME सेक्टर को फोर्स मेजर क्लास force major class में शामिल किया जाए। युद्ध के कारण रॉ मेटेरियल की बढ़ी कीमतों के कारण उद्योग ऑर्डर पूरा करने में खुद को असमर्थ बता रहे हैं।
msme sector in crisis, sirgitti industrial area
प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर में एक अनुमान के मुताबिक मिनिमम 1500 करोड़ से ज्यादा का सरकारी सप्लाई टेंडर फंस गया है या प्रभावित हुआ है। इसमें स्टील, जिंक, मेटल से जुड़े सप्लाई वाले उत्पाद शामिल हैं।
निजी कंपनियों के ऑर्डर तो जैसे तैसे मैनेज भी कर ले रहे हैं लेकिन सरकारी जिसमें राज्य और केंद्र दोनों का ऑर्डर शामिल है वो इनके लिए गले की फांस बन गया है, क्योंकि ये एग्रीमेंटेटड है। उद्योगपति कह रहे हैं कि यदि सरकारी ऑर्डर को वर्तमान स्थिति में पूरा किया तो घर बिक जाएगा यदि पूरा नहीं किया तो कंपनी ब्लैकलिस्ट हो जाएगी और उनका उद्योग बंद हो जाएगा। स्थिति यह है कि वर्तमान में प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहरों रायपुर, भिलाई, कोरबा, रायगढ़ आदि में उद्योगों अपनी उत्पादन क्षमता आधी कर दी है।
कैसे प्रभावित हुए उद्योग
प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर में एक अनुमान के मुताबिक मिनिमम 1500 करोड़ से ज्यादा का सरकारी सप्लाई टेंडर फंस गया है या प्रभावित हुआ है। इसमें स्टील, जिंक, मेटल से जुड़े सप्लाई वाले उत्पाद शामिल हैं। उद्योगपतियों ने बताया कि टेंडर क्लियर होने और सप्लाई डिलीवरी की टाइमिंग के बीच का समय प्रोडक्शन का होता है। इसी प्रोडक्शन अवधि में युद्ध के कारण लोहे, मेटल, ईंधन, कोयला की कीमत डेढग़ुनी हो चुकी है। इसके कारण उनका कैपिटल कॉस्ट भी डेढ़ गुना हो गया है। पुराने टेंडर के हिसाब से जिस उत्पादन में तीन से पांच प्रतिशत की मार्जिन थी अब उसका प्रोडक्शन कॉस्ट ही दस से 15 प्रतिशत बढ़ चुका है।
विगत छह माह में उछाल
लोहा 50 से 60 प्रतिशत
कोयला- 50 प्रतिशत
कॉपर- 400 से 900 रुपए
ट्रांसपोर्टेशन- 50 प्रतिशत
अल्यूमिनियम- 125 से 200 रुपए
ब्रांज- 400 से 700 रुपए
पीतल- 300 से 500 रुपए

कैसे भुगतेंगे उद्योग
उद्योगपतियों ने बताया कि टेंडर फायनल होने के बाद सप्लाई देनी होती है इसके पहले उत्पादन करना होता है। अब रॉ मेटेरियल का भाव काफी बढ़ चुका है। इसके बाद भी यदि हम उत्पादन करते हैं तो हमें 50 प्रतिशत घाटा होगा हमारा उद्योग चौपट हो जाएगा। यदि सप्लाई नहीं करते हैं तो हमें आरपीएन यानि रिस्क परचेस नोटिस जारी होगा, इसमें माल दूसरे राज्य से मंगवाएंगे और जो डिफरेंस एमाउंट आएगा वो हमें भरना पड़ेगा। नहीं भर पाए तो ब्लैक लिस्ट हो जाएंगे।

प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों का हाल
कोरबा लगभग 150 करोड़ का प्रभाव
कोरबा के उद्योगपति श्रीकांत बुधिया ने बताया कि यहां 70 से 80 एमएसएमई उद्योग हैं। इनमें से स्टेट और सेंट्रल सहित बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के सप्लाई ऑर्डर की बात करें तो लोहा, कॉपर और सीमेंट के महंगा होने के कारण 150 करोड़ के सरकारी ऑर्डर फंस गए हैं।
रायपुर उरला में कम से कम सात सौ करोड़
रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपति अश्विनी गर्ग ने बताया कि यहां करीब पांच से सात सौ इंडस्ट्र्री हैं। सभी तो सरकारी सप्लाई नहीं करती पर एक अनुमान के मुताबिक जितनी कंपनियों के पास सरकारी ऑर्डर हैं वो कम से कम सात करोड़ का होगा जो फिलहाल प्रभावित हो गया है।
रायगढ़ औद्योगिक क्षेत्र: पचास से सौ करोड़
रायगढ़ औद्योगिक क्षेत्र से उद्योगपति सुनील अग्रवाल ने बताया कि यहां लगभग १०० एमएसएमई संचालित हैं। इनमें से 60 से 70 ऐसे उद्योग हैं जो सरकारी सप्लाई का काम करते हैं। कम से कम यहां पचास से 100 करोड़ रुपए का मामला फंसा है।
भिलाई औद्योगिक क्षेत्र: 400 करोड़ फंसा
भिलाई औद्योगिक क्षेत्र से उद्योगपति केके झा ने बताया कि यहां इस सेक्टर से लगभग 400 उद्योग हैं। अधिकांश की सरकारी डिपार्टमेंट्स व पीएसयू में सप्लाई का टेंडर है। करीब चार सौ करोड़ का मामला फंस गया है।
सीएम बोले संघ के माध्यम से निगोशिएट करें
हाल में भिलाई में एमएसएमई सेक्टर के उद्योगपतियों की बैठक सीएम के साथ आयोजित हुई थी। उसमें इस मामले को उद्योगों ने प्रमुखता से उठाया। इस पर सीएम भूपेश बघेल ने उद्योगों को संघ के माध्यम से संबंधित कंपनियों से निगोशिएट करने की सलाह दी है।
वर्जन
्प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की गई है कि युद्ध आरंभ से समाप्ति के तीन माह बाद तक एमएसएमई सेक्टर को फोर्स मेजर क्लास में लिया जाय और रॉ मटेरियल की आपूर्ति का भी उचित मूल्य दिलवाया जाए।
हरीश केडिया, प्रदेश अध्यक्ष, छग, लघु एवं सहायक उद्योग संघ

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