20% इज़ाफ़ा: अब खाली हो जाएंगे पालकों के जेब जिस स्कूल में पढ़ते हैं आपके बच्चे वह बन गए दूकान

स्कूलों में नया सत्र:

By: Amil Shrivas

Updated: 29 Mar 2019, 01:14 PM IST

बिलासपुर. नए शैक्षिक सत्र ने दस्तक देने के साथ ही अभिभावकों की जेब ढीली करनी शुरू कर दी है। एक तरफ जहां कॉपी-किताबों के दामों में 10 से 20 फीसदी तक वृद्धि हो गयी है,वहीं स्कूल संचालक अपने पंसदीदा दुकानदारों व प्रकाशकों से सौदेबाजी करके अभिभावकों को महज तीन-चार दिन में कोर्स खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों में होम एग्जाम के परीक्षा परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पास अगली कक्षा में विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर उन्हें नए कोर्स के साथ विद्यालय के आने के लिए कहा जा रहा है। स्कूलों की कोशिश है कि गर्मी की छुट्टियों से पहले छात्रों को कम से कम एक यूनिट के कोर्स की पढ़ाई करायी जा सके। इसलिए स्कूलों में इस समय नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया और पढ़ाई को लेकर भागदौड़ चल रही है।

पत्रिका व्यू
नए सत्र में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि, प्रवेश प्रक्रिया में अक्सर मनमानी करने की शिकायतें आती हैं लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी शिकायत नहीं मिलने का तर्क देकर ऐसे स्कूलों को मनमानी करने की छूट दे देते हैं। पालक मजबूरी में नहीं बोलता है और अगर हिम्मत करके शिकायत करता भी है तो अधिकारी उसे गंभीरता से नहीं लेते हैं और स्कूलों के प्रभाव में आ जाते हैं। अधिकारियों को चाहिए कि वे मनमानी करने वाले स्कूलों पर विधि सम्मत कार्रवाई करें और शिक्षा जगत को व्यवसाय बनने से रोकें।

मनाही के बावजूद पढ़ाते हैं निजी लेखकों की पुस्तकें
सीबीएसई ने निर्देश दे रखे हैं कि बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ायी जायं लेकिन शहर के अंग्रेजी स्कूलों के संचालक इसे नहीं मानते हैं, वे अपने हिसाब से लेखकों की किताबें तय करते हैं और इसके लिए प्रकाशकों से सौदेबाजी तक की जाती है।

सीजी बोर्ड से संबद्ध स्कूल भी कर रहे मनमानी
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से मान्यता प्राप्त निजी स्कूल भी सरकार के नियम नहीं मान रहे हैं। इन्हें नियमत: सीजी बोर्ड की पुस्तकें पढ़ानी चाहिए लेकिन यहां भी निजी लेखकों की किताबें पढ़ायी जा रही है। ऐसे स्कूल खुद को सीबीएसई पैटर्न का बताते हैं जबकि उनका सीबीएसई से कोई लेना-देना नहीं है और वे सीजी बोर्ड के नियमों से बंधे हैं।

कमीशनखोरी से बढ़ते हैं दाम
कॉपी-किताबों के दाम बढऩे की सबसे बड़ी वजह शहर के अधिकांश अंग्रेजी स्कूलों द्वारा प्रकाशकों से किसी न किसी रूप में लाभ लेना है। इसमें कैश से लेकर स्कूल संचालन से जुड़ी सामग्री तक लेना शामिल है। इसके एवज में स्कूल संचालक संबंधित प्रकाशक/बुक सेलर्स की किताबें अपने विद्यालय में चलाता है। ये किताबें खरीदने के लिए कई बार सीधे पालकों को दुकान का पता बता दिया जाता है और ये किताबें शहर की अन्य किसी दुकान पर नहीं मिलेंगी। इस बार कुछ स्कूलों ने तो अधिक कमीशन के चक्कर में बुक सेलर्स को किनारे कर सीधे प्रकाशकों से सौदेबाजी कर अपने स्कूल परिसर में ही एक-दो दिन के लिए स्टॉल लगाकर किताबें बेच दी। एक प्रमुख अंग्रेजी स्कूल में पढऩे वाले अपने बेटे के लिए किताबें खरीदने पहुंचे एक पालक ने कहा मजबूरी में खरीदी, क्योंकि अगर नहीं खरीदी तो कहीं भी ये किताबें नहीं मिलेंगी। इस पालक का कहना है कि अगर ओपन बाजार में पालक ये किताबें खरीदें तो उन्हें बुक सेलर्स 10-15 फीसदी तक छूट भी दे सकते हैं।

सीबीएसई से संबद्ध प्रमुख स्कूल
डीपीएस, केन्द्रीय विद्यालय, महर्षि विद्या मंदिर, सेंट पलौटी, सेंट फ्रांसिस स्कूल, लोयला पब्लिक स्कूल, कृष्णा पब्लिक स्कूल, ब्रिलियंट,जैन पब्लिक स्कूल, आधारशिला विद्या मंदिर, बर्जेस स्कूल।

Amil Shrivas
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