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WEATHER : सटीक पूर्वानुमान: मौसम का मिजाज भले ही नेचुरल, हमारा अनुमान भी अब करीब-करीब एक्चुअल

locationबिलासपुरPublished: Nov 14, 2022 12:08:04 am

Submitted by:

JYANT KUMAR SINGH

- मौसम पूर्वानुमान forecast की सटीकता accuracy में 50 से 8० प्रतिशत तक का सुधार
- छत्तीसगढ़ में 80 से 90 प्रतिशत की आई सटीकता
- लू, heat wave , भारी बारिश heavy rain और चक्रवात cyclone के मामले में भी काफी सुधार

WEATHER : सटीक पूर्वानुमान: मौसम का मिजाज भले ही नेचुरल, हमारा अनुमान भी अब करीब-करीब एक्चुअल
पिछले दस वर्षों की तुलना में यदि आज मौसम की भविष्यवाणी या पुर्वामान की बात करें तो पूरे देश की स्थिति में 50 से 80 प्रतिशत तक सटीकता में सुधार आया है। जबकि छत्तीसगढ़ के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अब पूर्वानुमान में 80 से 90 प्रतिशत की सटीकता आ गई है। इसके पीछे का प्रमुख कारण आधुनिक संसाधन, कौशल प्रशिक्षण और मौसम का न्यूूमेरिकल वेदर प्रिडिक्शन में 14 मॉडल को शामिल करना है।
बिलासपुर. पिछले दस वर्षों की तुलना में यदि आज मौसम की भविष्यवाणी या पुर्वामान weather forecast की बात करें तो पूरे देश की स्थिति में 50 से 80 प्रतिशत तक सटीकता में सुधार आया है। जबकि छत्तीसगढ़ के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अब पूर्वानुमान में 80 से 90 प्रतिशत की सटीकता आ गई है। इसके पीछे का प्रमुख कारण आधुनिक संसाधन, कौशल प्रशिक्षण और मौसम का न्यूूमेरिकल वेदर प्रिडिक्शन में 14 मॉडल को शामिल करना है।
इस मामले में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत मौसम विभाग indian METEOROLOGICAL DEPARTMENT सटीकता accuracy , लीड समय lead time तथा प्रभाव के पैमानों पर लगातार सुधार कर रहा है हाल के वर्षों में भारी वर्षा heavy rain , लू, heat wave गरज के साथ तूफान storm और चक्रवातों cyclone के संबंध में पूर्वानुमान कौशल में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं और इसमें सटीकता आई है। हलांकि अभी भी बादल का फटना, भूस्खलन, हिमस्खलन व भूकंप आदि पहुंच से दूर बने हुए हैं।

ऐसे समझें सुधार और सटीकता के आंकड़े को
0. 24 घंटे की लीड अवधि के साथ भारी वर्षा की चेतावनी के लिए पता लगाने की संभावना 2021 में 74 प्रतिशत है। अब यदि 2002 से 20 के बीच मौसम पूर्वानुमान की गणना कौशल की तुलना में वर्ष 2021 का सुधार देखें तो यह 51 प्रतिशत सुधरा हुआ है।

0. 24 घंटे की लीड अवधि में यदि लू की चेतावनी की बात करें तो इसके पता लगाने की संभावना 2021 में 97 प्रतिशत है। यदि इसकी तुलना वर्ष 2014 से 20 के बीच करें तो 15 प्रतिशत का सुधार है।

०. 24 घंटे की लीड अवधि में गरज के साथ तूफान की चेतावनी का पता लगाने की संभावना 2016 में 31 प्रतिशत थी जो कि वर्ष 2021 में 86 प्रतिशत है।


०. मार्च से जून 2021 के दौरान तीन घंटे के तत्काल पूर्वानुमान के साथ गरज के साथ तूफान की चेतावनी का पता लगाने की संभावना 79 प्रतिशत सटीक रही।
गलत चेतावनी में सुधार
०. भारी वर्षा की गलत चेतावनी की दर और चेतावनी न देने की दर की बात करें तो वर्ष 2021 में 26 प्रतिशत है जिनमें 2002 से 20 के बीच इनके कौशल की तुलना में वर्ष 2021 में 21 और 53 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
०. लू की गलत चेतावनी मामले की बात करें तो वर्ष 2021 में 63 से 82 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
०. २४,४८,७२ घंटे की लीड अवधि में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का पता लगाने में पिछले वर्षों की तुलना में वर्ष 2021 में 63,91,164 किमी का सुधार हुआ है।

सटीकता के प्रमुख कारण
०. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार पूर्वानुमान क्षमताओं में बेहतरी के लिए मानसून मिशन की शुरुआत की है जिसका पहला चरण 2012 से 17 था वहीं दूसरा चरण 2017 से 22 है जो कि जारी है। इसके तहत भारत अपनी उच्च कंप्यूटिंग निष्पादन प्रणाली यानि एचपीसी का विस्तार किया जा रहा है जो अब 10 पेटाफ्लॉप क्षमता के नजदीक है।
०. लंबे समय के पूर्वानुमान के लिए देश में नए सांख्यिकीय मॉडलों,कपल्ड एटमॉस्फियर ओशन मॉडल यानि एमएमसीएफएस और मल्टी एनसेंबर प्रणाली का प्रयोग आरंभ हुआ है।

14 मॉडलों का हो रहा प्रयोग
छत्तीसढ़ के इंडियन मेटरलॉजी डिपार्टमेंट के मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि पहले पूर्वानुमान के लिए तीन मॉडल जीएफएस, जीईएफएस और डब्ल्यू आरएफएस का प्रयोग होता था। इससे ही वेदर का न्यूमेरिकल डेटा प्रिडिक्शन होता था इसलिए सटीकता थोड़ी कम थी अब पूरे विश्व के टॉप टेन माॉडल का भी प्रयोग आंकड़ों की गणना के लिए हो रहा है इस प्रकार अब हमारे यहां 14 मॉडल पर गणना हो रही है इससे हमारी सटीकता काफी बढ़ी है।
यहां आती है दिक्कत
सर्दी, गर्मी और भारी बारिश के मामले में सटीकता काफी सुधरी है लेकिन मौसम के कुछ भयानक पहलू अभी भी हमारी पहुंच से दूर हैं जैसे बादल का फटना, भूस्खलन आदि। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मामले में प्रयास चल रहा है जहां तक बादल फटने की बात है इसके लिए भारी वर्षा की चेतावनी जारी होती है लेकिन परेशानी यह है कि बादल फटने का एरिया काफी कम होता है और इसमें बिल्कुल सही जगह की गणना मुश्किल होती है क्योंकि जो पूर्वानुमान तैयार किए जाते हैं वो लगभग 50 से 100 मील की दूरी के होते हैं।

एक्सपर्ट व्यू
देखिए मौसम पूरी तरह से प्राकृतिक है फिर भी हमारे पूर्वानुमान अब सटीकता के करीब पहुंच चुके हैं। पूरे देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी मोसम के पूर्वानुमान में 80 से 90 प्रतिशत की सटीकता आई है। पिछले वर्ष ठंड के दिनों में दिसंबर से फरवरी तक हमारे पूर्वानुमान लगभग शतप्रतिशत सटीक रहे थे। नई तकनीक, सेटअप का अधुनिकीकरण और स्टाफ का कौशल प्रशिक्षण काफी सहायक रहा है। प्रकृति पर किसी का जोर नहीं है फिर हमारी कोशिश इस दिशा में लगातार जारी है।
एचपी चंद्रा, मौसम वैज्ञानिक, आईएमडी रायपुर

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