नियुक्ति में धोखाधड़ी के आरोपी को संवैधानिक लाभ नहीं

चीफ जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस पी. सैम कोशी की बेंच ने कहा है कि सरकारी और अर्ध सरकारी संस्थाओं में धोखाधड़ी से नियुक्ति पाने के आरोपी को संवैधानिक लाभ प्राप्त नहीं होगा।

By: आशीष गुप्ता

Published: 29 Jun 2015, 11:43 PM IST

बिलासपुर. चीफ जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस पी. सैम कोशी की बेंच ने कहा है कि सरकारी और अर्ध सरकारी संस्थाओं में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर धोखाधड़ी से नियुक्ति पाने के आरोपी को संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उपचार प्राप्त नहीं है। हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी के खिलाफ शिक्षाकर्मी की अपील खारिज कर दी है। सिंगल बेंच ने पहले ही कलक्टर के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

क्या है मामला
गरियाबंद में रहने वाले पूरण सिंह पाण्डेय की नियुक्ति 2007 में मणिपुर जनपद पंचायत में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के पद पर हुई थी। फर्जी मार्कशीट के आधार पर नियुक्ति की शिकायत मिलने के बाद जांच करवाई गई। आरोप सही मिलने पर 6 दिसंबर 2008 को नियुक्ति रद्द कर दी गई। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने फरवरी 2012 को कलक्टर को प्राकतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए याचिकाकर्ता को सुनवाई का पर्याप्त मौका देने के निर्देश दिए थे।

कलक्टर ने की थी कार्रवाई
इसके बाद कलक्टर ने नोटिस जारी कर पक्ष रखने का अवसर दिया। सुनवाई का मौका देने के बाद इसी आधार पर उसे 28 फरवरी 2015 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके खिलाफ दोबारा याचिका लगाई गई। सिंगल बेंच ने 21 अप्रैल 2015 को दिए गए फैसले में कलक्टर के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ अपील की गई थी।

शिक्षाकर्मी की अपील खारिज
चीफ जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस पी. सैम कोशी की बेंच ने अपील खारिज करते हुए कहा है कि सरकारी और अर्ध सरकारी संस्थाएं जहां संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत नियुक्तियां होती हैं, वहां धोखाधड़ी कर नियुक्ति पाने के आरोपी को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उपचार प्राप्त नहीं है। याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए तर्कों को मंजूर करने से नियुक्ति के अवैध आदेश को दोबारा मान्य करना होगा।
Show More
आशीष गुप्ता
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned