अमेरिकन सेटेलाइट 8 ने बताया कि छत्तीसगढ़ के इस जिले का 160 वर्ग किमी दायरा हो गया है मरुस्थल

शोध अध्ययन में जीआईएस प्रणाली एवं रिमोट सेंसिंग के माध्यम से इस जिले की हकीकत का अध्ययन किया गया है

बिलासपुर। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) की प्राकृतिक संसाधन विद्यापीठ के अंतर्गत ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग में रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस प्रणाली के माध्यम से जांजगीर-चांपा में हो रहे जनसंख्या वृद्धि का जांजगीर-चांपा की सतह पर क्या प्रभाव पड़ रहा है पर शोध किया गया।
शोधार्थी डॉ. प्रसून सोनी ने इस विषय पर शोध अध्ययन किया है। उनके शोध निर्देशक डॉ. पुष्पराज सिंह, विभागाध्यक्ष एवं सह-प्राध्यापक, ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग हैं। उक्त शोध का शीर्षक '' मॉनिटरिंग ऑफ डिजरटिफिकेशन इन जांजगीर-चांपा डिस्ट्रिक्ट ऑफ छत्तीसगढ़ यूजिंग रिमोट सेंसिंग एनजीआईएस टेक्नालॉजी'' है। डॉ. प्रसून सोनी को शोध उपाधि मई 2019 को प्रदान की गई वहीं पंजीयन 2014 में हुआ था। शोधार्थी डॉ. प्रसून सोनी वर्तमान में गुरू घासीदास विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग में सहायक प्राध्यापक (तदर्थ) के पद पर कार्यरत हैं।
शोध अध्ययन में जीआईएस प्रणाली एवं रिमोट सेंसिंग के माध्यम से तत्कालीन बिलासपुर जिले के जांजगीर-चांपा में जनसंख्या वृद्धि का क्या प्रभाव हो रहा का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में अमेरिकन सेटेलाइट लैंड सेट 8 की भी मदद ली गई। इसके अतिरिक्त पावर प्लांट का वहां के तापमान पर क्या प्रभाव हुआ इसका अध्ययन जांजगीर चांपा में तापमान, मानव हस्तक्षेप का पर्यावरण पर क्या प्रभाव हो रहा है का अध्ययन किया गया।
इस शोध में पाये गये परिणामों के अनुसार जांजगीर-चांपा के लगभग 160 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मरुस्थलीकरण से प्रभावित है जिसके लिए जनसंख्या वृद्धि जिम्मेदार है। जिसका असर पर्यावरण एवं नदियों पर भी पड़ रहा है। इस परिवर्तन में नदियां सूखती जा रही हैं। सुझाव के तौर पर शोधकर्ता द्वारा जनभागीदारी के माध्यम से ऐसे विषयों को हल किया जा सकता है। इस परिणामों के लिए ऊर्जा की मांग की पूर्ति के लिए लगातार बढ़ते जा रहे पावर प्लांट भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं।

JYANT KUMAR SINGH
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