पुलिस सोचती रही आरोपियों का पीछा कर रहे हैं, पर वास्तव में गुंडे उनके पीछे थे...उसके बाद जो हुआ वह फ़िल्मी कहानी से कम नहीं

पुलिस सोचती रही आरोपियों का पीछा कर रहे हैं, पर वास्तव में गुंडे उनके पीछे थे...उसके बाद जो हुआ वह फ़िल्मी कहानी से कम नहीं

Saurabh Tiwari | Updated: 08 Aug 2019, 06:27:24 PM (IST) Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

पैसे का ऑफर दिया, जान की धमकी मिली, लेकिन नहीं डोला ईमान, जानिए आरोपी को गिरफ्तार करने तक कैसे संकट का सामना किया पुलिस ने

बिलासपुर। राजस्थान के भरतपुर के रुदावल गांव से ओएलएक्स पर ठगी के एक आरोपी को गिरफ्तार कर बिलासपुर लाने की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। यहां से भेजी गई पुलिस टीम को लालच से लेकर जान की धमकी तक मिली। वहां की पुलिस से असहयोग मिलने के बाद भी उनका ईमान नहीं डोला और अंतत: ठगी के मुख्य आरोपी के पिता को गिरफ्तार कर पुलिस बिलासपुर ले आई। आइए जानते हैं किस तरह से पुलिस टीम ने संघर्ष किया।

रायपुर के नेवरा टंडवा निवासी इंद्रेश वर्मा पिता ऋषि वर्मा (30) ओएलएक्स (OLX fraud) पर बाइक खरीदने के झांसे में आकर 1 लाख 4 हजार रुपए के ठगी का शिकार हो गया था। वह वर्तमान में सिरगिट्टी थाने के बन्नाक चौक में रहता है। इसलिए सिरगिट्टी थाने में उसने रिपोर्ट लिखाई और बताया कि मोबाइल नंबर 9350063954 चलाने वाले ने उसके साथ एक लाख 4 हजार रुपए की ठगी की है।

सिरगिट्टी पुलिस के पास आरोपी तक पहुंचने के लिए यह मोबाइल नंबर ही एक आधार था। साइबर सेल (cyber cell) से लोकेशन ट्रेस करने पर पता चला कि यह नंबर राजस्थान (Rajasthan police) के भरतपुर जिले के नगर थाना अंतर्गत दुदावल गांव का है। एसपी प्रशांत अग्रवाल ने सिरगिट्टी टीआई सुशांत कुमार के नेतृत्व में एक टीम बनाई और कार में राजस्थान के लिए रवाना किया। लोकेशन ट्रेस करते-करते टीम भरतपुर पहुंच गई। टीम को लगा कि अब आरोपी उनकी पकड़ से कुछ दूर है।

पुलिस सूत्र बताते हैं कि यहीं पर बिलासपुर पुलिस की टीम चूक रही थी। दरअसल, उन्हें लग रहा था कि वे आरोपी के पीछे जा रहे हैं, जबकि उनकी कार के पीछे गुंडे लग गए थे। इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि कार में सीजी का नंबर होने के कारण कुछ लोग उसका पीछा कर रहे हैं। टीम के कप्तान टीआई ने इसे गंभीरता से लिया और कार तेजी से आगे दौड़वाई। सूनसान और अंधेरे में रोक कार की नंबर प्लेट को निकलवाकर रखवा दिया।

राजस्थान का दुदावल गांव हरियाणा राज्य (Haryana police) की सीमा से लगा हुआ है। अलबत्ता, टीम हरियाणा पुलिस के पास पहुंची और वहां आने की कहानी बताई, पर वहां मौजूद प्रभारी ने कहा कि वे सिर्फ एक कांस्टेबल भेज सकते हैं। इसके अलावा कुछ मदद नहीं कर सकते। (Chhattisgarh police) पुलिस की टीम वहां से राजस्थान के नगर थाना पहुंची और ठगी के आरोपी को पकड़ने के लिए बल देने का आग्रह किया, लेकिन नगर पुलिस तो हरियाणा पुलिस से भी एक कदम आगे निकली। कहा कि उस गांव में जाना खतरे से खाली नहीं है। चाकू, तलवार तो आम बात है। वहां गोली तक चलती है। इसलिए यहां की पुलिस कभी किसी को गिरफ्तार करने वहां नहीं जाती। तब तक तीन दिन गुजर चुके थे।

टीम के नेतृत्वकर्ता इन सारी बातों से एसपी अग्रवाल को अवगत कराते रहे और उनके मार्गदर्शन पर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जाती रही। जैसे-तैसे कर पांचवें दिन नगर थाने से एक एसआई और कुछ कांस्टेबल को उनके साथ दुदावत गांव भेजा गया। पुलिस की गाड़ी को देखते ही गांव वालों की भीड़ लग गई, जिन्हें देखते ही कुछ देर के लिए तो सिरगिट्टी पुलिस की टीम सकते में आ गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बहादुरी के साथ ग्रामीणों से चर्चा की और उन्हें बताया कि मोबाइल नंबर 9350063954 के धारक ने बिलासपुर में कैसे ठगी की है। यह मोबाइल नंबर आस मोहम्मद उर्फ आसू पिता डरे खां इस्माइल (60) के नाम है।

आरोपी तक पहुंचने से पहले ही कुछ ग्रामीणों ने टीम से पूछा कि कितने रुपए की ठगी की गई है। 1 लाख 4 हजार रुपए जवाब मिला तो एक ग्रामीण ने कहा कि आप लोगों को हम 3 लाख रुपए दे रहे हैं। पैसे लीजिए और चले जाइए। राजस्थान की एक पुलिसकर्मी ने टीआई से कहा कि आज तक यहां कोई पुलिस किसी को गिरफ्तार कर नहीं ले जा पाई है। इसलिए उनकी बातें मानते हुए रकम लेकर लौट जाएं। टीआई ने उससे कहा कि उन्हें यहां आए पांच दिन हो गए हैं। अब वह आरोपी को लिए बगैर नहीं जाएंगे। चाहे जो भी हो जाए।

इस बीच भीड़ की ओर से धमकियां तक आने लगीं, लेकिन बिलासपुर पुलिस पर इसका कोई असर नहीं हुआ। ग्रामीणों पर दबाव बनाते हुए पुलिस की टीम आरोपी आस मोहम्मद के घर तक पहुंच गई। आस मोहम्मद ने बताया कि यह नंबर उसके नाम पर है, पर इस्तेमाल उसका बेटा जुनैद करता है। उसने ही रकम की ठगी की है और पैसे अपने दोस्त के खाते में डलवाया है। पुलिस को सारा माजरा समझ में आ गया। इधर, भीड़ आस मोहम्मद को नहीं ले जाने देने पर अड़ी हुई थी। टीआई ने चाल चली और कहा कि पूछताछ के लिए स्थानीय थाने लेकर जा रहे हैं। इस पर ग्रामीण शांत हुए। बिलासपुर पुलिस की टीम ने उसे अपने वाहन पर बैठाया और सीधे बिलासपुर के लिए रवाना हो गए।

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