बिलासपुर में 4 प्रवेश द्वार और 6 जीरो प्रवेश द्वार बैकडोर पूरा खुला, सुरक्षित नहीं स्टेशन

जोन में इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम के तहत हुए कार्य अधर में

By: Amil Shrivas

Published: 24 Jul 2018, 06:05 PM IST

बिलासपुर. बिलासपुर रेलवे स्टेशन में 4 प्रवेश द्वार है और इसमें केवल एक ही गेट नम्बर 3 में एकीकृत सुरक्षा प्रणाली के तहत बैग स्केनर मशीन और मेटल डिटेक्टर लगा है वही गेट का दूसरा हिस्सा खुला है जहां से कोई भी आसानी से आ सकता है। रेलवे सुरक्षा बल के कुछ अधिकारियों से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा की बिलासपुर रेलवे स्टेशन में चार गेट होने का कोई औचित्य अब तक समझ में नहीं आया। इससे सुरक्षा के इंतजाम कर पाना काफी मुश्किल है। वही पीछे के हिस्से को सुरक्षित करने की भी बात हर कोई कर रहा है।

दो साल में 11 करोड़ के सामान चोरी
देश का सबसे ज्यादा कमाऊ पूत रेलवे स्टेशन सुरक्षा के लिहाज से काफी कमजोर हैं चोरी होना रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में आम बात हैं पिछले दो साल में चोरी के आंकड़ों की बात की जाए तो जीआरपी के दर्ज आकंड़ों में लगभग 11 करोड़ रुपए के समान यात्रियों ने स्टेशन में गवाए हैं। इसमें केवल 10 लाख के समान ही जीआरपी बरामद कर सकी है। जो शायद एक प्रतिशत भी नहीं है।

एकीकृत सुरक्षा प्रणाली के तहत बिलासपुर रेलवे स्टेशन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की योजना 4 साल पहले तत्कालीन वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त ने बनाई और इसके लिए जोन में सीएससी (मुख्य सुरक्षा आयुक्त) भेजा था उस दौरान मौजूद फंड से लगभग 8 करोड़ के सुरक्षा संबधी मशीनी उपकरण खरीदे गए और लगभग पांच सौ मीटर 4 फीट की बाऊंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा था लेकिन किसी कारण वश यह योजना अधर में ही अटक गई और रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता नहीं हो पाई है। इंट्रीगे्रटेड सिक्योरिटी सिस्टम (एकीकृत सुरक्षा प्रणाली) के तहत रेलवे में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की योजना तैयार की गई। इसके तहत रेलवे स्टेशन में बैग स्केनर मशीन, मेटर डिटेक्टर गेट, हेण्ड मेटर डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरा, बम निरोधी दस्ता के उपकरण, एक एंट्री और एक एग्जीट गेट के साथ ही बिलासपुर रेलवे स्टेशन को सुरक्षित करने छह फिट की उची बाउंड्रीवॉल चुचुहियापारा फाटक से तारबाहर यार्ड तक तैयार करने की योजना बनाई गई थी। योजना में लगभग 64 करोड़ रुपए खर्च कर बिलासपुर रेलवे स्टेशन को चारों ओर से सुरक्षित हो जाता। योजना के तहत कार्य शुरू भी किया गया लेकिन यह योजना अपने मुकाम तक पहुंच पाती इससे पहले ही दम तोड़ गई। इसका उचित कारण किसी भी अधिकारी के पास नहीं हैं।
कुछ अधिकारियों ने वॉल के लिए रुपए ही सेंशन न होने की जानकारी दी।

किस मद से बनी लगभग पांच सौ मीटर बाउंड्रीवाल अधिकारियों को पता ही नहीं
बिलासपुर के चुचुहियापारा ओवर ब्रिज के आगे लेप्ट साइड में लगभग 4 फुट उची बाउंड्री बनाई गई है कुछ की माने यह इंट्रीग्रेटेड़ सिक्योरिटी सिस्टम के तहत तैयार किया गया है वहीं जोन के अधिकारियों की माने तो सुरक्षा के बाउंड्री वॉल बनाने की योजना बनाई गई है लेकिन उसके तहत अभी तक फंड ही पास नहीं हुआ हैं, यह बाउंड्रीवाल किस मद से बनी यह अधिकारियों को भी पता नहीं है जोन कार्यालय मंडल कार्यालय के पास जवाब होने की बात कहता है तो मंडल कार्यालय जोन ही बजट पास करता है वही बता सकता है कह पल्ला झाड़ रहा है।

Amil Shrivas
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