मजहब के भेदभाव को हटाकर सच्ची श्रद्धा के साथ करेंगे मां जगतजननी की पूजा

हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग एकजुट होकर वर्षों से मां अंबे की प्रतिमा की स्थापना कर रहे हैं। शहर के गोलबाजार में होने वाला दुर्गाउत्सव कौमी एकता की मिसाल है।

By: सूरज राजपूत

Published: 14 Oct 2015, 09:52 AM IST

बिलासपुर. शहर के गोलबाजार में होने वाला दुर्गाउत्सव कौमी एकता की मिसाल है। यहां हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग एकजुट होकर वर्षों से मां अंबे की प्रतिमा की स्थापना कर रहे हैं। समिति के सदस्यों में कई लोग मुस्लिम समाज के हैं। वे पूरे उत्साह के साथ बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

यहां के सभी सदस्य माता की आराधना को किसी धर्म से जोडऩे के बजाए उत्सव को आस्था व श्रद्धाभाव का पर्व मानते हुए सहयोग करते हैं। पूजा से लेकर सजावट व दुर्गा विसर्जन तक के कार्य में हिन्दू, मुस्लिम एकजुट होकर काम करते हैं। कौमी एकता का प्रतीक यह पंडाल एक उदाहरण प्रस्तुत कर देश में सभी को भाईचारे का संदेश दे रहा है।

नवयुवक दुर्गोत्सव समिति गोल बाजार में दुर्गोत्सव 53 वर्ष से मनाया जा रहा है। माता की पूजा-अर्चना के साथ ही यहां पर हर कुछ खास होता है। दुर्गोत्सव समिति के सदस्य इलियास खान ने बताया कि गोलबाजार में दुर्गोत्सव सिर्फ हिन्दूओं के लिए नहीं बल्कि यहां रहने वाले मुस्लिम समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है।

मैं जब आठ साल का  था तब से इस दुर्गोत्सव समिति से जुड़ा हुआ हूं। उसी शिद्दत के साथ मां दुर्गा के प्रति आस्था रखता हूं। इस दुर्गोत्सव समिति की सबसे खास बात कौमी एकता है। यहां सदस्य नहीं बल्कि समिति के अध्यक्ष भी मुस्लिम समुदाय के लोग रह चुके है। वर्तमान अध्यक्ष दस्तगीर भाभा  हैं।

प्रसाद के  साथ बांटी जाती है शृंगार सामग्री
समिति के सदस्य हर्षित केशरवानी ने बताया कि समिति द्वारा तीन दिनों तक भव्य भंडारा का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही तीनों दिन तक पंडाल में आने वाली माता व बहनों को शृंगार की सामग्री भी प्रसाद स्वरूप दी जाती है। यहां हजारों लोगों की भीड़ नवरात्रि के दौरान दर्शन के लिए उमड़ती है।

आकर्षण का केन्द्र है माता का शृंगार
इस दुर्गोत्सव समिति द्वारा 53 साल से माता के एक ही रूप को दिखाया जाता है। बस शृंगार अलग होता है। इस बार भी माता की पहली बार स्थापित की गई प्रतिमा का रूप देखने को मिलेगा और शृंगार राजसी होगा। माता की प्रतिमा एक ही मूर्तिकार रतनपाल द्वारा बनाई जाती है और पुजारी शहर के ही पुरुषोत्तम महाराज हैं। माता का  हर एक आभूषण सोने का होता है। सभी आभूषण भक्तों द्वारा चढ़ाए गए हैं और हर साल माता को आकर्षक रूप में दिखाया जाता है।

ऐसे हुई थी शुरुआत
गोलबाजार में 53 साल पहले गोवर्धन लाल गुप्ता, मदनलाल शुक्ला, देवीदीन गुप्ता, प्रेमलाल शर्मा व सत्यनारायण साहू ने मिल-जुलकर आपसी सहयोग से मां दुर्गा की स्थापना कर पूजन प्रारंभ किया था। आज इस दुर्गोत्सव में गोलबाजार के सभी व्यापारी सहयोग करते है। इसके साथ ही मूलचंद खंडेलवाल, राजेश पांडे, अनिल खंडेलवाल, शंकरलाल साहू, कुंवर सिंह, द्वारिका प्रसाद अग्रवाल, विकास खंडेलवाल, जवाहर सराफ, युगल शर्मा,  दिग्विजय सिंह, सीताराम खंडेलवाल, गोपाल प्रसाद साहू, डॉ.महेन्द्र गुप्ता सहित सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहता है।

माता का लहंगा पहनकर होती है बेटी विदा
दुर्गोत्सव समिति के सदस्यों ने बताया कि माता को डिजाइनर पारंपरिक वस्त्र पहनाया जाता है। माता का लहंगा मोहल्ले में शादी होने वाली बेटी को उपहार स्वरूप दिया जाता है। शादी में माता का लहंगा पहनकर ही बेटी शामिल होती है और विदाई भी उसी जोड़े में की जाती है। हर साल किसी न किसी बेटी को माता का लहंगा मिलता है।
(काजल किरण कश्यप)

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सूरज राजपूत Desk/Reporting
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