अजंता आर्ट और साउथ कल्चर की मिक्स थीम पर होंगे मां के आलौकिक रूप के दर्शन

दुर्गोत्सव में मां दुर्गा की प्रतिमा को खास रूप देने के लिए अजंता आर्ट को सबसे पहले शहर में आदर्श दुर्गोत्सव समिति ने ही शुरू किया था।

बिलासपुर. दुर्गोत्सव में मां दुर्गा की प्रतिमा को खास रूप देने के लिए अजंता आर्ट को सबसे पहले शहर में आदर्श दुर्गोत्सव समिति ने ही शुरू किया था। आज भी उसी पैर्टन पर माता की प्रतिमा बनाकर दुर्गोत्सव मनाया जाता है। सालों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी कायम रखने का प्रयास समिति द्वारा की जा रही है। यह अजंता आर्ट के नाम से ही प्रसिद्ध है। 40 वर्षों से मूर्ति की खासियत को ही लोग देखने के लिए इस पंडाल में आते हैं।

आदर्श दुर्गोत्सव समिति गोंड़पारा सुभाष नगर की ओर से दुर्गोत्सव हर साल धूमधाम से मनाया जाता है । शहर में इनकी मूर्ति को हर कोई पसंद करता है। समिति के वरिष्ठ सदस्य मनीष सराफ ने बताया कि गोंड़पारा के पुराने लोगों ने मिलजुल कर इसकी शुरुआत की।

प्रतिमा को सबसे खास बनाने के लिए पैर्टन पर  विशेष ध्यान दिया जाता है। अजंता आर्ट को महत्व देते हुए इसकी शुरुआत की गई। आज तक वही पैर्टन चल रहा है। इसकी भव्यता में वृद्धि हो रही है। इस बार मूर्ति माना से लाई जा रही है। यह१३ फीट ऊंची व 20 फीट चौड़ी होगी। इस दुर्गोत्सव समिति को स्थानीय लोगों ने धीरे-धीरे भव्य बना दिया है।

यहां के युवा सदस्यों के साथ वरिष्ठ सदस्य भी सक्रिय होकर कार्य कर रहे हैं। इसमें अध्यक्ष अमित शुक्ला, कार्यकारी अध्यक्ष मोंटी गुप्ता, मयंक मिश्रा, सुमित केशरवानी, अर्पित केशरवानी, शिवम सराफ, अजय गुप्ता, महेश गुप्ता, शैलेन्द्र उमरिया, केशव बाजपेयी,  सुमीत राव ठाकरे, अमित दुबे सहित समिति के सदस्यों का विशेष सहयोग रहता है। यहां नवरात्र में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की यहां कतार लगती है।

सजावट है आकर्षण का केन्द्र

आदर्श दुर्गोत्सव समिति पंडाल व मूर्ति के साथ ही लाइटिंग व सजावट के लिए भी प्रसिद्ध है। सजावट देखने के लिए बड़ी संख्या में  लोग  यहां आते हैं। रंगीन झालरों में हर साल कुछ नयापन देकर सजावट की जाती है। इस बार रंगीन झालर की रोशनी से पंडाल को सजाया जाएगा।

झांकी से देंगे जागरुकता का संदेश

समिति की ओर से हर दिन नई झांकी तैयार कर समसामयिक मुद्दों को प्रदर्शित की जाती है। इस बार भी तीन दिनों तक अलग-अलग जीवंत झांकी सजाई जाएगी। इसमें समिति के युवा ही जीवंत झांकी का हिस्सा बनकर जागरुकता का संदेश देंगे।

दक्षिण भारत के पद्मनाभम मंदिर का नजारा
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष मोंटी गुप्ता ने बताया कि इस बार दक्षिण भारत में स्थित पद्मनाभम मंदिर की तर्ज पर माता का पंडाल तैयार किया जा रहा है। शहर में ही साउथ के मंदिर की झलक दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले भी कई बार समिति द्वारा खास पंडाल बनाए गए हैं। पंडाल का निर्माण सदस्यों के मार्ग दर्शन में किया जा रहा है। इस पंडाल की ऊंचाई 70 फीट व चौड़ाई 40 फीट है। पंडाल में प्रवेश करने वालों को अंदर भी दक्षिण भारतीय कला का दर्शन करन को मिलेगा।
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सूरज राजपूत Desk/Reporting
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