scriptCensor board can't stop obscenity intoxication on OTT social media | सेंसर बोर्ड ने कहा OTT, सोशल मीडिया पर नशा व अश्लीलता पर रोक नहीं लगा सकते | Patrika News

सेंसर बोर्ड ने कहा OTT, सोशल मीडिया पर नशा व अश्लीलता पर रोक नहीं लगा सकते

हाईकोर्ट : जनहित याचिका पर केंद्र की ओर से जवाब नहीं, अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद.

बिलासपुर

Updated: November 18, 2021 08:30:17 pm

बिलासपुर . ओटीटी, सोशल मीडिया (OTT Social Media) पर शराब और तंबाकू के विज्ञापन व अश्लीलता के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर केंद्रीय फि़ल्म प्रमाणन बोर्ड ने (Central Board of Film Certification) जवाब प्रस्तुत किया है। बोर्ड का कहना है कि ओटीटी व सोशल मीडिया उसके माध्यम से शासित नहीं होते। उसके द्वारा सिर्फ फिल्मों, लघु फि़ल्म, वृत्तचित्र आदि को प्रमाणपत्र दिया जाता है। मामले में केंद्र सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों का जवाब नहीं मिला है। मामले में प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय ,सूचना और प्रसारण मंत्रालय व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब देने कहा था। प्रकरण में सिर्फ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का जवाब मिला है। केंद्र की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए लगातार समय लिया जा रहा है। कोर्ट ने 3 सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई तय की है।

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इससे युवाओं में बढ़ रही नशे और अपराध की प्रवृत्ति
बता दें कि शहर के समाजसेवी व प्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष रामावतार अग्रवाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सोशल मीडिया व ओटीटी पर नशे के विज्ञापनों व अश्लील सामग्री पर प्रतिबंध लगाने दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। अग्रवाल ने अपनी याचिका में कहा है कि नशीले पदार्थ जैसे गुटका, सिगरेट और शराब के जो विज्ञापन सोशल मीडिया, टेलीविजन और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दिखाए जा रहे हैं, उससे युवा आकर्षित होकर उसका सेवन कर रहे है। इससे समाज के युवा बड़ी संख्या में नशे के आदी होते जा रहे है।

केंद्र की गाइडलाइन दरकिनार, कोई कार्रवाई नहीं
याचिका में बताया गया है कि शराब के विज्ञापन ब्रांड नेम से म्यूजिक सीडी, पानी बोतल, सोडा आदि के नाम पर भ्रमित करते हुए दिखाए जा रहे हैं। इसके अलावा तंबाकू,गुटका, शराब और ड्रग्स के विज्ञापन व सेवन इन सीरीज में खुलेआम दिखाया जाता है। सेक्स और पोर्न तक इसमें दिखाया जा रहा। केंद्र सरकार की गाइडलाइन का कोई भी पालन नही कर रहा है, न कोई कार्रवाई की जा रही है। यह समाज के लिए घातक है।

केंद्र द्वारा रोक और कार्रवाई को लेकर जवाब नहीं
याचिका में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड तथा गृह मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट द्वारा इस सब पर रोक के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों पर जानकारी मांगी थी, पर फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अलावा किसी का जवाब नहीं मिला।

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