जोगी की जाति निरस्त होते ही गरमाई राजनीति, कमरे में साय-बघेल की गुफ्तगू, बोले-एफआईआर हो

जोगी की जाति निरस्त होते ही गरमाई राजनीति, कमरे में साय-बघेल की गुफ्तगू, बोले-एफआईआर हो
Jogi's caste will be abolished as soon as it is annihilated politics, in the room Sai-Baghel's gutta, speak-FIR

Kajal Kiran Kashyap | Updated: 04 Jul 2017, 01:02:00 AM (IST) bilaspur

भूपेश बघेल ने जोगी पिता-पुत्र पर अपराध दर्ज करने व अमित की विधायकी निरस्त करने की मांग रखी, साय ने कहा, जोगी कानून के अपराधी, अब कार्रवाई होगी

बिलासपुर. सोमवार को जिला प्रशासन द्वारा अजीत जोगी का जाति प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने की खबर मिलते ही प्रदेशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां जोगी राजनीतिक संकट में दिखाई पड़ रहे, तो वहीं प्रतिद्वंदी दल इसे लेकर सक्रिय हो गए हैं।

भाजपा-कांग्रेस के नेताओं ने इसे लेकर बयानबाजी तेज कर दी है। साथ ही जोगी कांग्रेस को घेरने की रणनीति तैयार की जा रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने अजीत जोगी व अमित जोगी के खिलाफ  एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। साथ ही मरवाही सीट से अमित जोगी के निर्वाचन को भी निरस्त करने की मांग की है।

इतना ही नहीं, उन्होंने इसी मसले पर भाजपा व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को भी घेरने की कोशिश की। दूसरी तरफ अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा के नंद कुमार साय ने जोगी पर छलावा करने का आरोप लगाते हुए कहा, कि जोगी कानून के अपराधी हैं। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। इस मसले को लेकर सोमवार को छत्तीसगढ़ भवन के बंद कमरे में साय व भूपेश की खास गुफ्तगू भी चर्चा का विषय है।

भूपेश -साय की बंद कमरे में गुफ्तगू: जोगी के जाति प्रकरण को कलेक्टर द्वारा घोषणा करने के पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और भाजपा राष्ट्रीय नेता नंद कुमार साय छत्तीसगढ़ भवन के कमरा नम्ंबर 01 में मिले। दोनों नेताओं ने बंद कमरे में 10 से15 मिनट तक चर्चा की। बताया जाता है भूपेश बघेल जैसे ही नंद कुमार के पास पहुंचे दोनों ने मुस्कुराते हुए हाथ मिलाए। दोनों के चेहरे की मुस्कान देखकर एेसा लग रहा था मानो जोगी से जंग जीत ली हो। इसके बाद बंद कमरे में चर्चा की गई।

किंडो ने बनाया था प्रमाण पत्र : अजीत जोगी ने मुख्यमंत्री बनने से पहले कभी आदिवासी होने का लाभ नहीं लिया। मरवाही उप चुनाव लडऩे के लिए जोगी ने आदिवासी होने का प्रमाण प़त्र बनवाया। तब बिलासपुर के तत्कालीन अपर कलेक्टर एचपी किंडो ने कलेक्टर के बिहाफ  में जोगी को आदिवासी का प्रमाण पत्र प्रदान किया था। राज्य शासन से हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट मिलने पर बिलासपुर कलेक्टर पी दयानंद ने एडिशनल कलेक्टर को उसे मार्क किया। और  एडिशनल कलेक्टर ने किंडो द्वारा जारी प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया।

अमित की विधायकी खतरे में, परिवार पर पड़ेगा राजनीतिक असर: पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का जाति (आदिवासी कंवर) प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद इसका सीधा असर अमित जोगी की विधायकी पर पड़ेगा। इससे जोगी पिता-पुत्र पर फिलहाल राजनीतिक संकट मंडराने लगा है। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा है। हाईपावर कमेटी के परीक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा जोगी की जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के बाद अब अजीत जोगी को आदिवासियों को मिलने वाले लाभ की पात्रता नहीं रह गई है। फिलहाल अजीत जोगी तो ऐसे किसी पद पर नहीं हैं, लेकिन अमित जोगी मरवाही की आरक्षित सीट से विधायक हैं। उनकी जाति को लेकर पहले ही मरवाही सीट से उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंदी समीरा पैकरा और आदिवासी नेता संत कुमार नेताम ने याचिका लगा रखी है। हाल में ही पैकरा व नेताम ने केविएट भी दायर किया है। जाति प्रमाण निरस्त होने से मामले में अमित जोगी का पक्ष कमजोर पड़ सकता है।

अजीत व अमित के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो -भूपेश:  बघेल ने अजीत जोगी व अमित जोगी के खिलाफ  एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। बिलासपुर पहुंचे भूपेश बघेल ने अजीत जोगी के जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद मरवाही सीट से अमित जोगी के निर्वाचन को भी निरस्त करने की भी मांग है। उन्होंने कहा, इस मामले में राज्य सरकार को चुनाव आयोग को भी सूचना भेजनी चाहिए। भूपेश ने कहा, अजीत जोगी की जाति के संबंध में हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट आ जाने के बाद भी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह उनसे दोस्ती निभा रहे हैं, जिस तरह से वे उन्हें पिछले 6 साल से बचा रहे थे। बघेल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2011 को दो माह के भीतर हाईपावर कमेटी को फैसला करने कहा था। लेकिन मुख्यमंत्री ने कमेटी का गठन ही जनवरी 2013 को किया। हाईपावर कमेटी और छानबीन समिति की रिपोर्ट 18 सितंबर 2013 को आई, जिसे सरकार ने कोर्ट में पेश करने के बाद वापस ले लिया। इस बार भी रिपोर्ट 31 मई 2017 से तैयार हो चुकी है, लेकिन इसके बारे में अनाधिकृत रूप से ही सही जानकारी 27 जून को आई। हम उस रिपोर्ट को प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, उसका अध्ययन करने के बाद विस्तार से इस बारे में बात करेंगे।

जाति मुद्दा राजनीतिक गुब्बारा कोर्ट में निकालेंगे हवा- अमित : कार्रवाई पर मरवाही विधायक अमित जोगी ने कहा, इससे उन्हें जरा भी आश्चर्य नहीं हुआ, ये तो होना ही था। राज्य की छानबीन समिति सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी है ही नहीं, बल्कि वो तो सीएम पावर कमेटी है। इसलिए सीएम के मन मुताबिक और दिशा निर्देश से सब गैर कानूनी काम हो रहा है। अमित ने कहा, लगता है सीएम जल्दी में हैं, इसलिए उन्हें न्यायपालिका के नियम-कानून का रेड सिग्नल दिखाई नहीं दे रहा। राजनीतिक द्वेष में सीएम ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारत सारे नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। सुप्रीम कोर्ट ने जाति निर्धारण की प्रक्रिया के लिए हाई पॉवर कमिटी में एक विजिलेंस सेल बनाया है, जिसमें डीएसपी रैंक का अधिकारी जाति की पूरी छानबीन करता है। अगर विजिलेंस सेल ने जाति का सही होना पाया तो धारा 21 के तहत हाई पावर कमिटी विजिलेंस कमेटी की रिपोर्ट मानने कानूनी रूप से बाध्य होती है। लेकिन हमारे मामले में बिलकुल इसके विपरीत हुआ। उपलब्ध दस्तावेजों से पता चलता है कि हाई पावर कमिटी ने विजिलेंस सेल की रिपोर्ट जो कि हमारे पक्ष में थी, उसे अंदाज कर  स्वयं ही अपनी एक रिपोर्ट हमारे विरुद्ध लिख डाली। ये कृत्य पूर्णत: गैर कानूनी, और सुप्रीम कोर्ट की घोर अवहेलना है।

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