खरना पूजन के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का छठ महाव्रत, अस्ताचलगामी सूर्य को आज शाम देंगे अर्घ्य

छठ व्रतियों ने बाजारों में प्लास्टिक के टब की भी खरीदारी की ताकि घाटों पर न जाने की स्थिति में घरों की छतों पर टबों में पानी भरकर भगवान सूर्य को अघ्र्य दें सकें। शनिचरी, वृहस्पति, बुधवारी सहित विभिन्न बाजारों में छठव्रती गन्ना, हरी सब्जी, फल-फूल, कंदमूल आदि की खरीदारी करते देखे गए। घरों में छठी माता के गीत गाती हुए महिलाएं देखी गईं।

By: Karunakant Chaubey

Published: 20 Nov 2020, 10:42 AM IST

बिलासपुर. खरना पूजन के साथ ही 36 घंटे का छठ महाव्रत गुरुवार की शाम शुरू हो गया। पूरे दिन उपवास रखने के बाद देर शाम गुड़, चावल एवं दूध की खीर बनाई और छठी मइया का पूजन कर उन्हें प्रसाद अर्पित किया। इसके बाद व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के महाव्रत की शुरुआत की। शुक्रवार की शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अघ्र्य दिया जाएगा।

महापौर रामशरण यादव के नेतृत्व में शहर के अरपा घाट, पचरीघाट, कुदुदंड घाट के साथ ही जोरापारा तालाब, ईरानी मोहल्ला चांटीडीह, भारतमाता चौक चिंगराजपारा सहित अन्य तालाबों में साफ-सफाई कराई गई जिससे छठ व्रती सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही अस्ताचलगामी व उदीयमान सूर्य को अघ्र्य दे सकें।

छठ व्रतियों ने बाजारों में प्लास्टिक के टब की भी खरीदारी की ताकि घाटों पर न जाने की स्थिति में घरों की छतों पर टबों में पानी भरकर भगवान सूर्य को अघ्र्य दें सकें। शनिचरी, वृहस्पति, बुधवारी सहित विभिन्न बाजारों में छठव्रती गन्ना, हरी सब्जी, फल-फूल, कंदमूल आदि की खरीदारी करते देखे गए। घरों में छठी माता के गीत गाती हुए महिलाएं देखी गईं।

36 घंटे का निर्जला व्रत का परायण २१ नवम्बर की सुबह उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देने के बाद किया जाएगा। व्रतियों के मुताबिक शुक्रवार की शाम व एवं शनिवार की सुबह सूर्यदेव को अघ्र्य के लिए जरूरी पूजन सामग्री एवं हरी सब्जियों की खरीदारी गुरुवार को की गई। व्रती महिलाओं के मुताबिक खरना प्रसाद के रूप में खीर व रोटी खाने के साथ ही उनका व्रत शुरू हो गया है। अब शनिवार को उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देने के साथ व्रत का परायण किया जाएगा।

दउरा सजाया, आज देंगे शाम का अघ्र्य

खरना पूजन के बाद व्रतियों ने गुरुवार को रात में ही छठी मइया के पूजन के लिए दउरा एवं सूप सजाया। इसमें सभी तरह के मौसमी फल एवं सब्जियों को स्थान दिया गया। वहीं कई व्रतियों ने इस त्योहार पर बनने वाले ठेकुआ, खजूर एवं पूड़ी आदि पकवान बनाए। यह सभी पकवान शुक्रवार को पूजा में शामिल किए जाएंगे।

व्रतियों ने भरे कोसी

पुत्र की लालसा के साथ गुरुवार को सैकड़ों व्रतियों ने कोसी (दीपमाला) भरने की तैयारी शुरू कर दी है। व्रतियों के मुताबिक पुत्र की लालसा में कई महिलाएं अपने पति के साथ मिलकर छठ महाव्रत कर रहे हैं। वे कोसी भरकर माता से पुत्र की कामना करेंगे। कई व्रती पुत्र प्राप्ति के बाद कोसी भरकर माता की पूजा करेंगी।

छठ पूजा का है पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक सबसे पहले सूर्यदेव की पूजा पांडवों की मां कुंती ने किया था। इसी पूजा के परिणाम स्वरुप उन्हें कर्ण जैसा बीर, प्रतापी एवं दानी पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी परंपरा के तहत आज भी महिलाएं घर में सुख, संवृद्धि एवं पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए विधि विधान से भगवान सूर्य की पूजा करती हैं।

छठघाटों पर किया व्रतियों के बैठने का इंतजाम

महापौर रामशरण यादव ने तालाबों सहित अरपा घाटों का निरीक्षण कर छठव्रतियों के बैठने के लिए साफ-सफाई कराई ताकि कोरोना संकट में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कुछ लोग घाटों पर भी भगवान भास्कर को अघ्र्य दे सकें। उधर पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच के लोगों ने इस साल कोरोना संकट को देखते हुए छठघाट पर कोई आयोजन नहीं करने का निर्णय किया है। इस साल घाट के किनारे साफ-सफाई तक नहीं कराई गई। त्योहार के एक दिन पहले महापौर कुछ स्थानों पर सफाई कराते देखे गए।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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