सड़क पर मवेशी को लेकर हाई कोर्ट ने प्रदेश के सभी नगर निगमों को नोटिस जारी किया

Chhattisgarh high court: सड़कों पर आवारा पशुओं के उन्मुक्त विचरण मामले में प्रदेश के सभी नगर निगमों को नोटिस, चार सप्ताह में मांगा जवाब

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने सड़कों पर आवारा पशुओं के उन्मुक्त विचरण को लेकर दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए प्रदेश के सभी नगर निगमों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। प्रकरण की पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने इन सभी को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया था। साथ ही पूछा था कि इन्हें सड़कों पर आने से रोकने के लिए किस तरह का एक्शन प्लान बनाया है। इसकी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करें।

ज्ञात हो कि इस इस मामले में कोर्ट गौ-सेवा आयोग, छत्तीसगढ़ पशु कल्याण बोर्ड व नेशनल हाईवे समेत राज्य शासन को पूर्व में ही पक्षकार बनाते हुए जवाब तलब कर चुका है। सीजे पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की युगलपीठ में शासन ने पूर्व में अपना जवाब प्रस्तुत कर बताया है कि सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने के लिए काऊ कैचर का लगातर इस्तेमाल किया जा रहा है। धीरे-धीरे हम पशुओं को सड़क से हटाने में कामयाब होंगे। इस पर युगलपीठ ने धीरे-धीरे पर आपत्ति जताई थी। गुरुवार को सीजे ने सुनवाई के दौरान कहा कि इससे काम नहीं चलेगा। सभी नगर निगम इस संबंध में ठोस एक्शन प्लान बनाएं और चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करें।

आवारा पशुओं के सड़कों पर उन्मुक्त विचरण से हो रही दुर्घटनाओं के खिलाफ संजय रजक ने अधिवक्ता सुनील ओटवानी व राजेश चिकारा ने अधिवक्ता पलाश तिवारी व प्रकाश तिवारी के माध्यम से अलग-अलग याचिकाएं लगाई है। इसमें कहा गया है कि इनकी वजह से आए दिन दुघर्टनाएं हो रही हैं। कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, दुघर्टनाओं की वारदात विशेष तौर पर रात में होती है। इस पर रोक लगाने के लिए शासन, नगर निगम, एनएच व लोनिवि द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की जा रही है।

Murari Soni Reporting
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