बेगुनाही साबित करने में डॉक्टर को 11 वर्ष लगे

बेगुनाही साबित करने में डॉक्टर को 11 वर्ष लगे
बेगुनाही साबित करने में डॉक्टर को 11 वर्ष लगे

Murari Soni | Updated: 10 Sep 2019, 01:25:36 PM (IST) Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

प्रकरण में किसी प्रकार का साक्ष्य, गवाह व दस्तावेज पेश नहीं किए जाने पर 9 सिंतबर को फैसला सुनाते हुए दोषमुक्त करार दिया है।

बिलासपुर. सीजेएम कोर्ट ने पूर्व महापौर अशोक पिंगले के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोपी डाक्टर जयराम रमेश अय्यर के खिलाफ प्रकरण में किसी प्रकार का साक्ष्य, गवाह व दस्तावेज पेश नहीं किए जाने पर 9 सिंतबर को फैसला सुनाते हुए दोषमुक्त करार दिया है। सीजेएम डीडी चौहान के इस फैसले से चिकित्सक अय्यर को आखिरकार 11 वर्ष बाद न्यायालय ने दोषी नहीं मानते हुए आरोप मुक्त कर दिया।
ये मामला 2008 का है। बिलासपुर के पूर्व मेयर अशोक पिंगले की 2 अगस्त 2008 को बेचैनी की शिकायत हुई तो वे इलाज के लिए चिकित्सक डा. होतचंदानी से मिले। उनक परीक्षण करने के बाद डा. ने अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया। निजी अस्पताल के इंटरवेंशनल कार्डियालाजिस्ट डा. अय्यर ने परीक्षण के बाद माइल्ड हार्ट अटैक होने की बात कहते हुए 2 अगस्त को उनकी एंजियोप्लास्टी कर दी।

4 अगस्त को उनकी तबीयत ठीक होने पर डिस्चार्ज कराने की बात कहने पर डाक्टर ने एक-दो दिन और रुकने के लिए कहा। इसी बीच 6 अगस्त की रात उनकी तबीयत फिर से बिगड़ गई। तेज बुखार के बाद मैसिव हार्ट अटैक आया, जो स्टेंथ डाला गया था वो ब्लाक हो गया और उनकी मौत हो गई।

उक्त घटना के बाद अपोलो अस्पताल ने जांच कमेटी बनाई और 8 अगस्त को प्रबंधन ने सेवा से बर्खास्त कर दिया। उनकी मौत के बाद बहन मंदाकिनी पिंगले ने अपने भाई की मौत में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डा. अय्यर के खिलाफ सिविल लाइन थाने में 304 ए के साथ दस्तावेजों में कूटरचना व साक्ष्य छिापाने की धारा 468 व 201 के तहत अपराध दर्ज कराया। उक्त धाराओं के तहत अपराध दर्ज होने के बाद डा. अय्यर ने अधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास के माध्यम से इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याचिका में कहा गया कि इलाज में किसी प्रकार की कोताही नहीं की गई। ना ही दस्तावेजों में किसी प्रकार की कूटरचना और साक्ष्य छिपाए गए हैं। जस्टिस संजय के अग्रवाल ने मामले की सुनवाई के बाद जुलाई 2015 में याचिकाकर्ता को 304 ए व 201 के तहत अपराध नहीं बनना पाते हुए इसे क्वैश कर दिया। लेकिन धारा 468 के तहत किसी प्रकार का निर्णय नहीं दिया व मामले को निचली अदालत में भेज दिया।

इस प्रकरण में जुलाई 2015 के बाद से 11 लोगों की गवाही हुई। प्रकरण में 9 सिंतबर को फैसला देते हुए सीजेएम कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश किए गए चालान में 468 का अपराध साबित नहीं करने पर आरोपी चिकित्सक को दोषमुक्त करार दिया है।

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