बिलासपुर के कानन पेंडारी जू में हुआ कुछ ऐसा की खड़े-खड़े कांप रहे शेर, भालू, चीता और टाइगर

Cold increased: कानन पेंडारी में चारों तरफ पेड़ पौधा होने के कारण ठंड अधिक रहता है। शाम होते यहां ठंड बढ़ जाती है। कानन प्रबंधन द्वारा यहां के वन्य प्राणियों को ठंड से बचाने के लिए हर साल पक्षी व सांप के केज में बल्ब, हिरण के केज के शेड के ऊपर पैरा डाला जाता है।

बिलासपुर. कानन पेंडारी में चारों तरफ पेड़ पौधा होने के कारण ठंड अधिक रहता है। शाम होते यहां ठंड बढ़ जाती है। कानन प्रबंधन द्वारा यहां के वन्य प्राणियों को ठंड से बचाने के लिए हर साल पक्षी व सांप के केज में बल्ब, हिरण के केज के शेड के ऊपर पैरा डाला जाता है। दोनों वन्य जीवों के लिए व्यवस्था कर दिया गया है लेकिन बाघ, तेंदुए व भालू के लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ठंड बढऩे से वन्य प्राणी बीमार पड़ सकते हैं।

विंटर सीजन शुरू हो गया है। अभी सुबह और रात में ठंड लग रही है। इससे सिर्फ इंसान ही नहीं जीव-जंतु भी प्रभावित हो रहे हैं। ठंड को देखते हुए कानन पेंडारी प्रबंधन ने कानन में वन्य प्राणियों के लिए व्यवस्था की है। कानन में शाकाहारी व मांसाहारी दोनों ही तरह के वन्य प्राणी है और सभी के लिए अलग-अलग तरह की व्यवस्था की गई है। ठंड से जीवों को बचाने के लिए पैरा, प्लाई और बल्ब की व्यवस्था की गई है।

बेजुबान पक्षियों व जीवों को ठंड से बचाने की पूरी व्यवस्था हो चुकी है। शाकाहारी जानवरों चीतल, हिरन, नीलगाय को ठंड से बचाने के लिए बाड़ा में पैरा रखा गया है। मांसाहारी जानवरों शेर, लकड़ बग्घा, बाघ, तेंदुआ को शीत से बचाने के लिए केजों की खिड़कियों को प्लाई से बंद करने के साथ ही उसमें पैरा रखा जाता है। लेकिन इस साल अभी तक बड़े जानवरों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

कानन पेंडारी के रेंजन होरेश शर्मा ने बताया पक्षी, सांप, हिरन सहित अन्य वन्य जीवों को ठंड से बचाने की व्यवस्था कर दी गई है लेकिन बड़े वन्य जीव के लिए जल्द की प्लाई और पैरा हायलोजन की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कि बताया सर्पों के लिए उनके केजों में मटका रखकर बल्ब लगाने के साथ बारदाना भी लपेटा जा रहा है। पक्षियों के केजों को भी बल्ब लगाकर गर्म रखने की व्यवस्था की गई है।

कानन पेंडारी में बढ़ी ठंड, कांपने लगे शेर भालू

यहां है खतरा

बाघ, तेंदुआ सहित अन्य मांसाहारी खंूखार जानवरों के केज के नीचे का प्लस्तर सीमेंट से किया गया है। शाम होते ही फर्श ठंडा हो जाता है जिसका असर वन्य प्राणियों के ऊपर पड़ता है। तीन साल पहले ठंड के कारण दो शावकों को निमोनिया हो गया था जिनकी कुछ दिन बाद दोनों की मौत हो गई थी।

वर्जन- छोटे छोटे वन्य जीवों को ठंड से बचाने की व्यवस्था कर दी गई है। बड़े वन्य प्राणियों के लिए किया जा रहा है। एक दो दिन में इनको भी ठंड से बचाने की व्यवस्था कर ली जाएगी।
होरेश शर्मा,रेंजर कानन पेंडारी

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Murari Soni
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