लंबित मामलों पर दिल्ली केज्यूडिशियल रिफॉर्म कार्यक्रम में जताई गई चिंता

लंबित मामलों पर दिल्ली केज्यूडिशियल रिफॉर्म कार्यक्रम में जताई गई चिंता

Amil Shrivas | Publish: Feb, 15 2018 06:41:46 PM (IST) Bilaspur, Chhattisgarh, India

देश के विभिन्न जिला न्यायालयों से लेकर हाईकोर्ट तक में करोड़ों मामले सुनवाई के अभाव में लंबित हंै

बिलासपुर . बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में ९ से ११ फरवरी तक हुए रूल ऑफ लॉ-कंवेशन २०१८ के ज्यूडिशियल रिफॉर्म कार्यक्रम में देश के विभिन्न न्यायायलों म लंबित मामलों पर चिंता जताई गई। कहा गया कि देश के विभिन्न जिला न्यायालयों से लेकर हाईकोर्ट तक में करोड़ों मामले सुनवाई के अभाव में लंबित हंै। इसमें प्रमुख रूप से जजों की कमी, अधिवक्ताओं द्वारा मामले के निष्पादन में कमी, गवाहों का समय पर हाजिर नहीं होना समेत कई कारण जिम्मेदार हैं। प्रदेश का ही आंकड़ा लें तो ३ लाख से अधिक मामले प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। साथ ही हाईकोर्ट में भी ५८ हजार से अधिक मामलों की सुनवाई होनी है।
बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता शामिल हुए। कार्यक्रम से लौटकर अधिवक्ता विनय दुबे एवं आशीष शुक्ला ने बताया, कि तीन दिवसीय कंवेंशन काफी सकारात्मक रहा। इसमें देश के ख्यति प्राप्त कानूनवदों वाइस प्रेसिडेंट बीएआई श्याम दीवान, पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद, सीनियर एडवोकेट केटीएस तुलसी , जमशेद पी कामा, अमरजीत सिंह चांडोक, अशोक देसाई, केवी विश्राथन, सोली सोराबजी, एके गांगुली, राजीव दत्ता, यतिन ओझा, पूर्व अध्यक्ष बीओआई रुपिंदर सिंह सूरी समेत कई ख्याति प्राप्त न्यायविदों ने अपने विचार साझा किए। सभी ने एक स्वर से न्यायपालिका में पारदर्शिता की वकालत की तथा कहा गया हायर ज्यूडिशियरी में जजों के चयन, प्रमोशन तथा रिटायरमेंट संबंधी सभी जानकारी पब्लिक डोमेन में होनी चाहिए। ताकि सिस्टम में किसी प्रकार के शक की कोई गुंजाइश ना रहे। साथ ही जजों की कमी को लेकर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस बात पर विशेष चिंता जताई गई कि देश के विभिन्न न्यायालयों में लंबित केसों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। इस समय देश में करीब ३ करोड़ से अधिक मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं।


हाईकोर्ट में ५८ हजार प्रदेश में ३ लाख से अधिक मामले लंबित: ज्ञात हो कि हाईकोर्ट में ५८ हजार से अधिक मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं। रही बात प्रदेश के विभिन्न जिला न्यायालयों की तो आंकड़ा ३ लाख से अधिक का है। हालांकि लोक अदालत एवं हाईकोर्ट की शनिवार को होने वाली विशेष बेंच की नियमित सुनवाई से लंबित मामलों की संख्या में अपेक्षाकृत कमी आई है। लेकिन पंडेंसी घटाने की यही रफ्तार रही तो इन मामलों के निराकरण में वर्षों लगेंगे। साथ ही प्रतिदिन दायर होने वाले मामलों को शामिल करें तो ये एक अंतहीन सिलसिला सा है, जो शायद ही कभी थमे।

पेंडेसी की बढ़ती संख्या में लोक अदालत के नियमित आयोजन एवं हाईकोर्ट में तेजी से याचिकाओं के निराकरण से काफी फर्क पड़ा है। लंबित मामलों की संख्या तेजी से घटी है। हालांकि आंकड़े दे पाना अभी संभव नहीं होगा। विभिन्न न्यायालयों में जजों की कमी दूर कर और अधिवक्ताओं के प्रयास से इसमें और कमी लाई जा सकती है।
सीके केशरवानी, अध्यक्ष, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन

MP/CG लाइव टीवी

Ad Block is Banned