दिव्यांगता को कभी नहीं बनाई कमजोरी, 14 प्रतियोगिता परीक्षा में संजय ने लहराया परचम

उम्र बढऩे के साथ आंख की रोशनी भी कम हो गई

By: Amil Shrivas

Updated: 03 Dec 2019, 12:53 PM IST

बिलासपुर. हर किसी के जीवन में परेशानियां बनी रहती है। यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम उसका कैसे सामना करते है। कुछ लोग तो कोशिश किए बिना ही हिम्मत हार जाते है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है जो परेशानियों का सामना करते हुए अपनी मंजिल तक पहुंच जाते है। ऐसे ही है यमुना नगर मंगला के संजय सोंधी का जो दृष्टि बाधित होने के बाद भी लगातार 14 प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल कर अपना लोहा मनवाया है। उनके हिम्मत, लगन और हौसले के दम पर आज वे दिल्ली में राजस्व मुख्यालय में रेवेन्यू डिपार्टमेंट में एसडीएम के पद पर कार्यरत है। इन्होंने लोगों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया है कि व्यक्ति अपनी कमी को अनदेखा कर मेहनत व लगन से आगे बढ़े तो वह हर कुछ हासिल कर सकता है। संजय सोंधी के सामने दिव्यांगता शब्द विलुप्त सी हो जाती है क्योंकि उन्होंने पढ़ाई को बड़े लगन से कर लगातार सफलता हासिल की है। संजय सोंधी ने बताया कि वह एक सामान्य परिवार से है। बचपन में उन्हें दिखाई देता था लेकिन समय के साथ आंख की रोशनी कम होती गई और एक समय ऐसा आया जब उन्हें दिखाई देना ही बंद हो गया। इस समस्या के बाद भी वे हार नहीं माने और अपनी पढ़ाई करते रहे। पिता सिंचाई विभाग में लेखा पाल थे अचानक से उनकी मृत्यु हो जाने से परिवार के सामने समस्या आई। लेकिन संजय की माता ने परिस्थिति को सम्हाला और अपने बच्चों का पूरा सहयोग करते है बच्चों की पढ़ाई को जारी रखा। जिसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है। संजय अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां को देते है।

कार्य को सराहा लोगों ने
संजय ने बताया कि दिव्यांग के तौर पर उनके कार्य के दौरान कई खट्टे-मीठे अनुभव हुए है। जिसमें एक अनुभव ऐसा रहा है जब वे एनएसएसओ में सांख्यिकी मंत्रालय बिलासपुर में कनिष्क सांख्यिकी अधिकारी के तौर पर पदस्थ थे तब कुछ समय तो काम नहीं कराया गया। बाद में जब फिल्ड पर जाना शुरू किया तो दूसरे सह कर्मियों की तुलना में एक हफ्ते में अपना सर्वे का कार्य पूरा किया। जिसे सराहा गया।

ऑडियों बनाकर करते थे पढ़ाई

संजय सोंधी ने बताया कि पढ़ाई धमतरी, बिलासपुर, चांपा जैसे जगहों से हुई है। 12वीं की परीक्षा लाल बहादुर शास्त्री स्कूल से पास हुए। फिर स्नातक की पढ़ाई चांपा के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से आगे बढ़े। इसी तहर से स्नातकोत्तर की पढ़ाई हुई। पढ़ाई के लिए वे खुद करेंट अफेयर की ऑडियों रिकॉड करके पढ़ते थे। परीक्षा में राइटर की सहायता लेते थे।

इन 14 परीक्षाओं में हासिल की सफलता

संजय ने व्यापम शिक्षाकर्मी परीक्षा, रेलवे की परीक्षा, एसएससी की परीक्षा में 4 बार, बैक पीओ, सीजीपीएससी में 5 बार, केन्द्रीय विद्यालय परीक्षा , यूपीएससी की परीक्षा में सफलता दर्ज की है। दिव्यांग होने के बाद भी हर परीक्षा में अच्छे अंक अर्जित कर टॉप पर रहे। वर्ष 2012 में सीजीपीएससी की परीक्षा परिणाम में टॉप टेन में स्थान बनाया। इसके साथ ही चार विषय एमए इकोनॉमिक्स, एमए पॉलिटिकल साइंस, एमबीए, एमएससी मैथ में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की है। वहीं तीन विषयों में नेट क्वालिफाइड भी है।

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