नहीं रहे आदिवासी बच्चों के मसीहा डॉक्टर पीडी खैरा, अंतिम दर्शन के लिए अस्पताल में लगा लोगों का तांता

नहीं रहे आदिवासी बच्चों के मसीहा डॉक्टर पीडी खैरा, अंतिम दर्शन के लिए अस्पताल में लगा लोगों का तांता
नहीं रहे आदिवासी बच्चों के मसीहा डॉक्टर पीडी खैरा, अंतिम दर्शन के लिए अस्पताल में लगा लोगों का तांता

Murari Soni | Updated: 23 Sep 2019, 12:34:33 PM (IST) Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

डॉक्टर खेरा ने सोमवार को बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल में अंतिम सांसें लीं। उनके निधन पर आदिवासियों सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।

बिलासपुर. आदिवासी बच्चों के मसीहा कहे जाने वाले डॉक्टर पीडी खैरा अब नहीं रहे। डॉक्टर खेरा ने सोमवार को बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल में अंतिम सांसें लीं। उनके निधन पर आदिवासियों सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। मूलत: दिल्ली निवासी डॉक्टर पीडी खैरा ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों के लिए समर्पित कर दिया था। करीब 35 वर्ष पहले नौकरी छोड़कर आदिवासी अंचल के ग्राम लमनी में आदिवासियों के उत्थान के लिए काम करने पहुंचे थे और वहीं वस गए।

खुद फटेहाल रहकर गरीब बैगा आदिवासी बच्चों के लिए काम किया। खुद की पेंशन से आदिवासियों को पढ़ाया। चार-चार शिक्षक रखकर अचानक मार टाइगर रिजर्व क्षेत्र के छपरवा गांव में हाईस्कूल प्रारंभ किया। देखते ही देखते डॉक्टर खेरा प्रदेश ही नहीं पूरे देश में आदिवासी मसीहा के रुप में पहचाने जाने लगे।

आधुनिकता से दूर घने जंगल में आदिवासियों के साथ साधा जीवन जीने वाले डॉक्टर खैरा के निधन की खबर जैसे ही राजनेताओं को लगी सभी अपोलो हास्पिटल पहुंच गए। सोमवार की तड़के लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह, एसडीएम देवेंद्र पटेल सहित कई नामी निगामी हस्तियां अपोलो हॉस्पिटल पहुंचीं। डॉक्टर खेरा लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

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