डॉ.प्रभुदत्त खेरा कब आए थे छत्तीसगढ़, कैसे खुद फटेहाल रहकर बैगा आदिवासी बच्चों को पढ़ाते थे

डॉ.प्रभुदत्त खेरा कब आए थे छत्तीसगढ़, कैसे खुद फटेहाल रहकर बैगा आदिवासी बच्चों को पढ़ाते थे
डॉ.प्रभुदत्त खेरा कब आए थे छत्तीसगढ़, कैसे खुद फटेहाल रहकर बैगा आदिवासी बच्चों को पढ़ाते थे

Murari Soni | Updated: 23 Sep 2019, 12:55:36 PM (IST) Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

उनका जन्म 13 अप्रैल 1928 को हुआ था। उनका अंतिम संस्कार कल 24 सितंबर को सुबह 11 बजे मुंगेली जिले के लमनी गांव में किया जाएगा।

बिलासपुर. प्रसिद्ध समाज सेवी एवं शिक्षाविद् डाॅ.प्रभुदत्त खैरा का आज सुबह लंबी बीमारी के बाद अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। उनका जन्म 13 अप्रैल 1928 को हुआ था। उनका अंतिम संस्कार कल 24 सितंबर को सुबह 11 बजे मुंगेली जिले के लमनी गांव में किया जाएगा।
डाॅ.खैरा पिछले 35 वर्ष से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र अचानकमार के जंगलों के बीच लमनी गांव में आदिवासी बच्चों को शिक्षित कर रहे थे।
वे दिल्ली विश्वविद्यालय में 15 साल तक समाजशास्त्र पढ़ाते रहे हैं. उनका सन 1983-84 में बिलासपुर आना हुआ. इस दौरान वे अचानकमार के जंगल घूमने गए. वहां पर आदिवासी बच्चों को शिक्षा से दूर देखकर उनका मन काफी व्यथित हुआ और उन्होंने वर्तमान मुंगेली जिले के लमनी गांव में ही बसने का फैसला कर लिया।
इसके बाद उन्होंने आदिवासी बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने प्रोफ़ेसर की नौकरी छोड़ दी और दिल्ली का ऐशो आराम छोड़कर लमनी के जंगलों में ही आ बसे

अपना पूरा जीवन आदिवासियों के लिए समर्पित कर दिया

आदिवासी बच्चों के मसीहा कहे जाने वाले डॉक्टर पीडी खैरा अब नहीं रहे। डॉक्टर खेरा ने सोमवार को बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल में अंतिम सांसें लीं। उनके निधन पर आदिवासियों सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। मूलत: दिल्ली निवासी डॉक्टर पीडी खैरा ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों के लिए समर्पित कर दिया था। करीब 35 वर्ष पहले नौकरी छोड़कर आदिवासी अंचल के ग्राम लमनी में आदिवासियों के उत्थान के लिए काम करने पहुंचे थे और वहीं वस गए। खुद फटेहाल रहकर गरीब बैगा आदिवासी बच्चों के लिए काम किया। खुद की पेंशन से आदिवासियों को पढ़ाया। चार-चार शिक्षक रखकर अचानक मार टाइगर रिजर्व क्षेत्र के छपरवा गांव में हाईस्कूल प्रारंभ किया। देखते ही देखते डॉक्टर खेरा प्रदेश ही नहीं पूरे देश में आदिवासी मसीहा के रुप में पहचाने जाने लगे। आधुनिकता से दूर घने जंगल में आदिवासियों के साथ साधा जीवन जीने वाले डॉक्टर खैरा के निधन की खबर जैसे ही राजनेताओं को लगी सभी अपोलो हास्पिटल पहुंच गए। सोमवार की तड़के लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह, एसडीएम देवेंद्र पटेल सहित कई नामी निगामी हस्तियां अपोलो हॉस्पिटल पहुंचीं। डॉक्टर खेरा लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

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