बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की डॉ. सुषमा सिंह विगत पांच वर्षों से निदान एनजीओ के हाइजीन प्रोजेक्ट मुक्ति के माध्यम से माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के ऊपर कार्य कर रही है। जिसके अंतर्गत, स्कूलों में पीरियड्स के दौरान शर्मिंदगी व संकोच से ऊबर कर बालिकाओं की सेहत, सुरक्षा व उनके स्वाभिमान पर भी कार्य कर रही है। साथ ही गांव व देहात में मां, दादी जो पुराने, गन्दे व सूती साड़ी को फाड़कर, राख, घास व सूखी पत्तियों से घरेलू पैड बनाकर जिस तरह आने वाली भावी पीढिय़ों को विरासत दे रही हैं।

उनके खिलाफ भी लोहा लेकर मुक्ति सैनेटरी पैड बनाने की यूनिट डाली। जो अपने आप में आज एक मुहीम का रूप ले चुकी है। जो इको-फ्रेंडली भी है। इस क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए उनका मुम्बई में वीमेन ग्लोबल अवाड्र्स में सम्मानित किया गया। निदान संस्था के माध्यम से माहवारी स्वच्छता का कार्य कर डॉ.सुषमा की सराहना हर तरफ की जा रही है। उन्होंने बालिकाओं को स्वच्छता का महत्व बताया साथ ही पीरियड्स के दौरान शर्मिंदगी महसूस करने के भाव को भी कम किया। इस मुहिम में बालिकाओं के स्वास्थ्य सकारात्मक प्रभाव पड़ा है साथ ही उन्होंने पर्यावरण के संरक्षण का कार्य किया है। इसी शृंखला में वीमेन ग्लोबल अवाड्र्स में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मुम्बई में सम्मानित हुई। उन्हें अप्रिशिएशन अवार्ड से नवाजा गया। जो शहर के लिए गर्व की बात है। डॉ.सुषमा ने अपने इस अवार्ड को हर उस महिला को समर्पित किया, जो समाज में महिला शक्ति के उत्थान के लिए संकल्पित है।

टॉप टेन में बनाई जगह
इस अवार्ड के लिए 6050 महिलाओं के बीच छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले की डॉ. सुषमा सिंह टॉप 10 में अपनी जगह बना पाई। इस पुरस्कार की दौड़ में भारत, स्पेन, मेक्सिको व यूएस भी से भी लोग शामिल थे। लेकिन उनके बीच में अलग जगह बनाकर प्रत्येक महिला के लिए प्रेरणा बनी है।

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