शहर में नशीली दवाओं के कारोबारियों की भरमार,पुलिस का खौफ नहीं, बेच रहे जहर

शहर में नशीली दवाओं के कारोबारियों की भरमार,पुलिस का खौफ नहीं, बेच रहे जहर

Amil Shrivas | Publish: Jul, 13 2018 05:36:34 PM (IST) Bilaspur, Chhattisgarh, India

इस तरह आती हैं दवाईयां, ऐसे चलता है नशे का कारोबार

बिलासपुर. शहर में नशे के कारोबारियों की भरमार है। कारोबारी नए नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा कई बार पकड़े जाने के बाद जेल जा चुके हैं। नशे के सौदागरों ने अपने नाबालिग बेटों को भी इस धंधे में धकेल दिया है। शहर के जरहाभाठा मिनी बस्ती, टिकरापारा, तोरवा और तालापारा क्षेत्र में नशीली दवाइयां बेचने वालों की संख्या अधिक है। पिछले 5 साल में पुलिस ने 65 नशे के सौदागरों को पकडकऱ जेल भेज चुकी है।

नशीली दवाइयों का उपयोग करने वालों में शहर के युवा वर्ग की संख्या बढ़ती जा रही है। सस्ता और आसानी से मिलने के कारण युवा इसका लगातार उपयोग कर रहे हैं। शहर के जरहाभाठा मिनी बस्ती, जतिया तालाब, तोरवा, देवरीखुर्द और तालापारा क्षेत्र में नशे के कारोबारियों की संख्या अधिक है। पिछले 5 साल में पुलिस ने 65 नशे के कारोबारियों को पकडकऱ जेल भेज चुकी है। जेल से छूटने के बाद नशे के सौदागर फिर से नशीली दवाइयां बेच रहे हैं। नशे के सौदागरों ने गोरखधंधे में अपने नाबालिग बेटों को भी लगा दिया है। पुलिस ने सौदागरों के बेटों को भी कई बार पकडकऱ जेल भेज चुकी है।

कटनी से आता है माल, लेकिन पुलिस नहीं देती ध्यान
अब तक पकड़े गए नशे के अधिकांश सौदागरों ने पुलिस को बताया है कि शहर में नशीली दवाइयां और इंजेक्शन कटनी स्थित साईं मेडिकल स्टोर्स से सप्लाई होती है। नशे का सामान ट्रेन और सडक़ मार्ग से शहर पहुंचता है। पुलिस को इतनी बड़ी जानकारी मिलने के बाद भी अब तक कटनी से माल सप्लाई करने वाले को पकड़ा नहीं गया है।

नशीली दवा और कट्टे के साथ पकड़ाया था किशोर
जरहाभाठा मिनी बस्ती में रहने वाले एक नशे के सौदागर के बेटे से पुलिस ने जनवरी 2017 में भारी मात्रा में नशीली दवाइंया, इंजेक्शन और देशी कट्टा बरामद किया था। आरोपी किशोर ने बताया था कि नशीली दवाइयां बेचने से उनका परिवार चलता है। पिता के जेल चले जाने के बाद उसने दवाइयां और इंजेक्शन बेचना शुरू किया था।

रात में होती है डिलवरी
सौदागरों ने शहर में नशीली दवाइयां और इंजेक्शन रात में सौदागरों तक पहुंचने का खुलासा किया है। ट्रेन और सडक़ मार्ग से माल पहुंचने के बाद रात में चार पहिया वाहनों से सौदागरों तक माल की डिलवरी होती है। वाहनों की जांच नहीं होने से माल आसानी से नशे के सौदागरों तक पहुंच जाता है।

10 गुना कीमत पर बिकता है माल
नशे के कारोबार में 10 गुना फायदा होने के कारण नशे के सौदागर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एविल, रेक्सोजेसिक, ल्यूपीजेसिक इंजेक्शन की कीमत आमतौर पर ढाई रुपए- 5 रुपए के बीच होती है। इसे कटनी से शहर लाने के बाद 30- 40 रुपए में बेचते हैं।

घरो में नहीं, कचरे में ढेर में छिपाते हैं नशे का सामान
पुलिस के अनुसार नशे के सौदागर घर में नशीली दवाइयां और इंजेक्शन छिपाने के बजाए आसपास के कचड़े के ढेर में इसे छिपाते हैं, ताकि माल पकड़ाए नहीं और आसानी से खरीदारों तक पहुंचाया जा सके।

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