बहुचर्चित एफआईआर और चालान निकाला झूठा, थाने के एसआई पर लगा 90 हजार रुपए उगाही का आरोप

जमीन की रजिस्ट्री 7 अगस्त 2015 को हुई थी और जमीन बिक्री के दौरान सकलदेव रजिस्ट्री में गवाही बने थे। जमीन आशुतोष केशरवानी ने खरीदी थी। उस समय हेमओ देवी भी रजिस्ट्री कार्यालय में मौजूद थी। साथ ही हेमओ देवी ने जमीन बिक्री से किसी प्रकार की आपत्ति और लेनदेन का विवाद नहीं होने की बात कही थी।

By: Karunakant Chaubey

Published: 02 Sep 2020, 02:37 PM IST

बिलासपुर. सरकंडा थाने में जमीन बिक्री के नाम पर हुई बहुचर्चित एफआईआर और चालान सीएसपी कोतवाली की जांच में झूठी निकली। जिस डॉक्टर के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा था, उसने शिकायत डीजीपी डीएम अवस्थी से की थी। मामले में डॉक्टर और दूसरे व्यक्ति ने जांच अधिकारी एसआईद्वारा डरा घमकाकर 90 हजार रुपए की उगाही करना पाया गया है। एफआईआर दर्ज कराने वाले के खिलाफ एफआईआर और जांच अधिकारी एसआई के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

जानकारी के अनुसार सरकंडा निवासी डॉ. अवधेश साहू पिता सकलदेव साहू ने 25 मई 2018 को सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके मित्र डॉ. सौम्यदीप शर्मा निवासी निराला नगर ने उनकी मां हेमओ देवी के नाम पर 2400 वर्ग फीट जमीन का डायवर्सन कराने के लिए रुपए लिए थे। साथ ही जमीन के दस्तावेज भी अपने पास रखे थे। डायवर्सन नहीं होने पर पूछने पर उसने जमीन में उत्तम नाम के व्यक्ति का नाम होने की जानकारी दी थी। डॉ. सौम्यदीप ने उनकी मां से जमीन की पॉवर ऑफ अटर्नी लेकर जमीन को आशुतोष केशरवानी को बेच दी थी। शिकायत पर पुलिस ने डॉ. सौम्यदीप और आशुतोष के खिलाफ चारसौबीसी का मामला दर्ज कियाथा।

डीजीपी से की थी निष्पक्ष जांच की मांग

डॉ. सौम्यदीप ने एफआईआर के बाद मामले की निष्पक्ष जांच के लिए डीजीपी डीएम अवस्थी को 10 अक्टूबर 2019 को शिकायत की थी। डीजीपी ने मामले में जांच के आदेश दिए थे। सरकंडा पुलिस ने सौम्यदीप को 23 अक्टूबर 2019९ को मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 10 दिनों के बाद सौम्यदीप को कोर्ट से जमानत मिली थी।

जांच में कई चौकाने वाले खुलासे

डीजीपी से हुई शिकायत की जांच कोतवाली सीएसपी निमेश बरैया ने की जिसमें यह बात सामने आई थी कि एफआईआर के बाद जांच अधिकारी एसआई रामआश्रय यादव ने बिना किसी दस्तावेज के लिए सौम्यदीप को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जबकि जमीन कर पॉवर ऑफ अटर्नी देते समय हेमओ देवी और उनके पति सकलदेव ने अंगूठा लगाकर इकरारनामा किया था।

जमीन की रजिस्ट्री 7 अगस्त 2015 को हुई थी और जमीन बिक्री के दौरान सकलदेव रजिस्ट्री में गवाही बने थे। जमीन आशुतोष केशरवानी ने खरीदी थी। उस समय हेमओ देवी भी रजिस्ट्री कार्यालय में मौजूद थी। साथ ही हेमओ देवी ने जमीन बिक्री से किसी प्रकार की आपत्ति और लेनदेन का विवाद नहीं होने की बात कही थी। जमीन बिक्री कर रकम भी हेमओ देवी को मिली थी।

जांच अधिकारी ने धमकाकर वसूले 90 हजार रुपए , की कार्रवाई की अनुशांसा

जांच अधिकारी ने मामले में आशुतोष और सौम्यदीप को गिरफ्तार करने की धमकी देकर 90 हजार रुपए वसूल किए थे। जांच अधिकारी ने मामले में एफआईआर झूठा और चालान झूठा तैयार करना पाया। सीएसपी निमेश बरैया ने डॉ.अवधेश के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराने पर धारा 182,211 के तहत मामला दर्ज करने और जांच अधिकारी रामआश्रय के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा एसपी से की है।

सरकंडा में जमीन बिक्री की धोखाधड़ी के मामले में जांच जारी है। सभी पक्षों से मिली शिकायत पर हर बिन्दु पर जांच की जा रही है। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

-प्रशांत अग्रवाल, एसपी बिलासपुर

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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