पेपरलेस कल्चर को छोड़ महाधिवक्ता कार्यालय को डिजिटलाइज करने पर रहेगा जोर, शासन से लेंगे अनुमति - एजी सतीश

पेपरलेस कल्चर को छोड़ महाधिवक्ता कार्यालय को डिजिटलाइज करने पर रहेगा जोर, शासन से लेंगे अनुमति - एजी सतीश

Anil Kumar Srivas | Updated: 04 Jun 2019, 12:30:00 PM (IST) Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

हाईकोर्ट

बिलासपुर. हाईकोर्ट के नए महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने सोमवार को अपना पद भार संभाला और पिछले तीन-चार दिनों से चल रहे विवादों का पटाक्षेप करते हुए कहा कि नई जिम्मेदारी मिली है अब इसका निर्वहण बेहतर तरीके से करना ही मेरा उ²ेश्य है। पूर्व में क्या हुआ या नहीं हुआ, वो अतीत की बात है। शासन ने मुझे इस काम के लिए चुना है तो पूरा फोकस इसकी बेहतरी को लेकर होगा। उन्होंने भविष्य के रूपरेखा की जानकारी देते हुए कहा कि महाधिवक्ता कार्यालय प्रमुख रूप से शासन व हाईकोर्ट के बीच एक समन्वय सेतु की तरह काम करेगा ताकि कार्य सुगमता से तो हो ही, लागत भी कम आए। इसके लिए महाधिवक्ता कार्यालय के समस्त दस्तावेजों को डिजिटलाइज किए जाने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। शासन से इस कार्य के लिए अनुमति मांगी जाएगी। साथ ही हाईकोर्ट से भी अनुरोध किया जाएगा कि जिन दस्तावेजों को पूर्व में डिजिटलाइज किया जा चुका है, उसे महाधिवक्ता कार्यालय को प्रदान किया जाए, ताकि मामलों की सुनवाई में किसी प्रकार का व्यवधान या अतिरिक्त समय न लगे व त्वरित सुनवाई का मार्ग प्रशस्त हो सके।

उन्होंने कहा कि महाधिवक्ता कार्यालय से प्रदेश के दूरदराज के जिले, ब्लाकों व संभाग में याचिकाओं की कापी दस्तावेजों के माध्यम से भेजने में काफी वक्त लगता है। इस प्रक्रिया को बंद कर पेपरलेस कल्चर की ओर बढऩे की योजना है। अभी ऐसा होता है कि महाधिवक्ता कार्यालय से अधिकारियों व विभागों को दस्तावेजों के भेजने में काफी वक्त लगता है। अब फैक्स, मोबाइल ऐप या डिजिटाइज माध्यम से ऐसा किया जाएगा, जिससे अतिरिक्त समय न लगे और अधिकारियों को समय पर सूचना मिल जाए। कोशिश होगी की सभी मुकदमे का जवाब शासन की ओर से 15 दिनों में हाईकोर्ट में पेश की जा सके।

एजी वर्मा ने कहा कि पदभार संभालते ही उन्होंने पहला काम पुलिस के जवानों के लिए किया है। वर्तमान में ऐसी व्यवस्था है कि कोर्ट आने के दौरान उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्हें धूप या बारिश में खुले आसामान के नीचे घंटों खड़ा रहना पड़ता था। अब ऐंसा नहीं होगा उनके लिए शेड की व्यवस्था की जाएगी, ताकि आराम से वो अपना काम निपटा सकें। साथ ही जिन मामलों के लिए वाईसी की नियुक्ति नहीं हो पाई है, उसे तुरंत किया जा सके और जिन मामलों में नियुक्ति हो गई है उनसे समय पर अधिकतम 15 दिनों में जवाब के लिए कहा जाएगा।

नई नियुक्तियों की संभावना नहीं : महाधिवक्ता की नियुक्ति के बाद क्या नई नियुक्ति की कोई संभावना है। इस पर एजी वर्मा ने साफ इंकार करते हुए कहा नहीं। सभी अपना काम बेहतर तरीके से कर रहे हैं। इसलिए इसमें बदलाव किए जाने की कोई संभावना नहीं है। ये पूछे जाने पर कि आपके एजी बनने के बाद असिस्टेंट एजी का पद खाली हुआ है। इस पर किसकी नियुक्ति होगी। इस पर उन्होंने कहा कि ये शासन के अधिकार क्षेत्र में है। उनका बोलना मुनासिब नहीं होगा।

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