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प्राचार्य के पद पर प्रमोशन के लिए 5 वर्ष व्याख्याता होना जरूरी, हाईकोर्ट का आदेश

हाईकोर्ट ने एक मामले में आदेश दिया है कि प्रदेश में प्राचार्य के पद पर पदोन्नति हेतु व्याख्याता के पद पर पांच वर्ष के अध्यापन का अनुभव अनिवार्य है

बिलासपुर

Published: April 01, 2022 10:40:06 pm

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक मामले में आदेश दिया है कि प्रदेश में प्राचार्य के पद पर पदोन्नति हेतु व्याख्याता के पद पर पांच वर्ष के अध्यापन का अनुभव अनिवार्य है।
छत्तीसगढ़ विद्यालय शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती एवं प्रोन्नति नियम, 2019 के नियम 14 एवं 15 के अंतर्गत अधिनियमित अनुसूची के अनुसार
कोर्ट ने इस अनिवार्यता को उचित ठहराया है। साथ ही कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर याचिकाकर्ताओं पर 20 हजार रुपए जुर्माना भी किया है। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं की वजह से भर्ती प्रक्रिया विलम्बित हुई।
प्राचार्य के पद पर प्रमोशन के लिए 5 वर्ष व्याख्याता होना जरूरी, हाईकोर्ट का आदेश
प्राचार्य के पद पर प्रमोशन के लिए 5 वर्ष व्याख्याता होना जरूरी, हाईकोर्ट का आदेश
व्याख्याताओं (एल बी )द्वारा प्राचार्य पद पर प्रमोशन में प्राथमिकता देने के लिए अलग अलग लगभग 80 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग ने व्याख्याता पद पर 5 साल के अनुभव का जो नीति नियम बनाया है उसके विपरीत जाकर पदोन्नति नहीं दी जा सकती।
यह है मामला- राजेश शर्मा ,तोशन प्रसाद ,हेमलता वर्मा , अनिल कुमार , अमृत लाल साहू व अन्य ने हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से अलग अलग याचिका पेश कर स्वयं को प्राचार्य पद पर प्रमोशन देने में प्राथमिकता देने की मांग की।. इनके अनुसार वे सब 10 जुलाई 1998 में शिक्षा कर्मी ग्रेड वन पंचायत विभाग में नियुक्त हुए थे। कई साल बाद शासन ने गत 30 जून 2018 को शिक्षा कर्मियों को शिक्षा विभाग में संविलयन करने का निश्चय किया। इसके बाद 28 सितंबर 2018 से इन्हें संविलयित कर लिया गया। जब शिक्षा विभाग में प्राचार्य पद पर प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई तो व्याख्याता (एल बी) को अपात्र बता दिया गया।.स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा कि इनके पास 5 वर्ष का अनुभव नहीं है क्योंकि यह सब 2018 में ही संविलयित किये गए हैं। इसे ही हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
पूर्व के अनुभव को सेवा में जोड़ने की थी मांग- याचिकाकर्ताओं ने अपने पूर्व के अनुभव जिसमें उन्होंने पंचायत विभाग में कार्य किया था, उसे भी सेवाकाल में जोड़ने की मांग की। इसे शासन ने अस्वीकार कर दिया।.सभी पक्षों की बहस के बाद जस्टिस संजय के अग्रवाल ने सभी याचिकाएं खारिज कर शासन की पदोन्नति नीति के अनुरूप ही प्रमोशन किये जाने का निर्देश दिया।

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