scriptHigh Court changed the death sentence to life imprisonment | मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला हाईकोर्ट ने | Patrika News

मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला हाईकोर्ट ने

हाईकोर्ट ने अपने ही दो बच्चों की हत्या के दोषी की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। कोर्ट ने अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास और हत्या का कारण स्पष्ट न होने पर प्रकरण को रेयर ऑफ रेयरेस्ट नहीं माना। लेकिन अपराध की प्रकृति और भविष्य में फिर ऐसा अपराध न किया जाए, इसे देखते हुए अभियुक्त को पूरे जीवन कारावास की सजा दी है।

बिलासपुर

Published: May 17, 2022 07:39:39 pm

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने अपने ही दो बच्चों की हत्या के दोषी की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। कोर्ट ने अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास और हत्या का कारण स्पष्ट न होने पर प्रकरण को रेयर ऑफ रेयरेस्ट नहीं माना। लेकिन अपराध की प्रकृति और भविष्य में फिर ऐसा अपराध न किया जाए, इसे देखते हुए अभियुक्त को पूरे जीवन कारावास की सजा दी है। अपीलकर्ता डोलालाल को अपर सत्र न्यायाधीश सरायपाली ने मृत्युदंड दिया था। सजा की पुष्टि के लिए प्रकरण हाईकोर्ट भेजा गया। साथ ही डोलालाल की अपील पर भी सुनवाई हुई।
मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला हाईकोर्ट ने
मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला हाईकोर्ट ने
अपने ही बच्चों की हत्या की, परिस्थिति जन्य साक्ष्य पर सजा

अभियोजन का मामला संक्षेप में यह है कि 25 और 26 जनवरी, 2017 को ग्राम कायतपाली, पुलिस थाना बसना अंतर्गत पूरन सिदार के खेत के पास, अपीलकर्ता ने अपने बेटे शुभम, उम्र लगभग 8 वर्ष और बेटी जैस्मीन उर्फ सोनिया, क़रीब 9 साल की कुदाल (रापा) से सिर काटकर हत्या कर दी थी। कुदाल और आरोपी का शॉल घटना स्थल से बरामद हुआ। आरोपी डोलालाल अपने गांव और घर से फरार पाया गया। परिजनों से पूछताछ के बाद सरायपाली पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसके कपड़ों पर खून के धब्बे पाए गए।
जॉन एफ कैनेडी को कोड किया डिवीजन बेंच ने, बच्चे सबसे मूल्यवान संसाधन

प्रकरण की सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल, जस्टिस रजनी दुबे की डिवीजन बेंच ने अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के कथन का उल्लेख किया कि "बच्चे" दुनिया के सबसे मूल्यवान संसाधन हैं और भविष्य के लिए सबसे अच्छी उम्मीद है।" कोर्ट ने जेल अधीक्षक रायपुर की रिपोर्ट देखी जिसमें उसका आचरण संतोषजनक पाए। अपीलकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, हालांकि उसने अपराध किया है, अपराध जो जघन्य है जिससे दो बच्चों की मौत हो गई। भविष्य में इस तरह के अपराध न हों इसलिए कोर्ट अपीलकर्ता को निचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को उसके शेष प्राकृतिक जीवन के कारावास में बदल दिया।

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