शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं कर सकते, 8वीं क्लास तक शिक्षा देना स्कूलों के लिए अनिवार्य

शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं कर सकते, 8वीं क्लास तक शिक्षा देना स्कूलों के लिए अनिवार्य

Anil Kumar Srivas | Publish: Jul, 14 2018 12:25:43 PM (IST) Bilaspur, Chhattisgarh, India

हाईकोर्ट ने दिया आदेश

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने 8वीं तक की शिक्षा को अनिवार्य बताते हुए सभी स्कूलों के लिए आदेश जारी कर कहा है कि ना सिर्फ शिक्षा बल्कि 8वीं तक पास होने की जिम्मेदारी भी स्कूल प्रबंधन पर है। अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं जाता तो उन्हें घरों से निकालकर स्कूल लाएं और अलग से परीक्षा लेकर उत्तीर्ण कराएं।

रायपुर के मास्टर वत्सल खाखरिया उम्र 14 वर्ष ने अपनी मां नंदा खाखरिया के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। अधिवक्ता अभिषेक देशमुख के मार्फत दायर याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता वत्सल दिल्ली पब्लिक स्कूल दुर्ग में 8वीं का छात्र है, जिसे स्कूल प्रबंधन ने ये कहते हुए 8वीं के परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी कि उसकी उपस्थिति कम है। स्कूल के 214 दिनों में से महज 11 दिन ही उपस्थित हुआ है। जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग से आदेश मिलने के बाद याचिकाकर्ता 4 विषयों की परीक्षा में ही शामिल हो सका। अंग्रेजी और संस्कृत की परीक्षा में शामिल नहीं हो सका। स्कूल ने 28 मार्च 2018 को रिजल्ट जारी कर चार विषयों में पास कर दिया। लेकिन 9वीं कक्षा में प्रमोट नहीं किया।

जस्टिस संजय के अग्रवाल ने मामले की सुनवाई के बाद निर्णय दिया कि 14 वर्ष तक अनिवार्य शिक्षा दिए जाने का प्रावधान संवैधानिक हक में शामिल है। इसकी अनदेखी नहीं हो सकती। सभी स्कूलों के लिए 8वीं तक के छात्रों को शिक्षा देना और उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। इसके लिए छात्रों को घर से लाकर अलग से परीक्षा लेनी ही क्यों ना लेनी पड़े।

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