एटीआर में आवास बनवाने पर कोर्ट ने कहा यह पैसे की बर्बादी, वन्यजीव होंगे प्रभावित

एटीआर में आवास बनवाने पर कोर्ट ने कहा यह पैसे की बर्बादी, वन्यजीव होंगे प्रभावित

Anil Kumar Srivas | Publish: Jul, 13 2018 06:52:05 PM (IST) Bilaspur, Chhattisgarh, India

हाईकोर्ट ने लगाई रोक: प्रतिबंध के बाद भी प्रशासन बनवा रहा था पीएम आवास

बिलासपुर. चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की युगलपीठ ने अचानकमार टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में पीएम आवास योजना के तहत 7.45 करोड की लागत से बनाए जा रहे 621 मकानों के निर्माण पर रोक लगा दी है। गुरुवार को जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने कहा कि कोर क्षेत्र में इस प्रकार के निर्माण से पैसों की तो बरबादी होगी ही, जंगल और वन्यप्राणियों का जीवन भी प्रभावित होगा। वैसे भी 2020 तक एटीआर के कोर क्षेत्र के गांवों को विस्थापित करना ही है तो नए मकान बनाने का कोई मतलब नहीं है।

एटीआर के कोर क्षेत्र में पीएम आवास योजना के तहत शासन ने 7.45 करोड की लागत से 621 मकानों के निर्माण को मंजूरी देते हुए निर्माण कार्य शुरू करा दिया है। वन क्षेत्र में पक्के निर्माण कराए जाने के खिलाफ रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने जनहित याचिका दायर कर निर्माण कार्य बंद कराए जाने की मांग की है। याचिका में बताया गया है कि एटीआर छत्तीगसढ़ का प्रमुख टाईगर रिजर्व है। इसमें प्रदेश के आधे से अधिक बाघ निवास करते हैं। वन विभाग के आंकडों के अनुसार ये क्षेत्र 27 बाघों की शरणस्थली हैं।

साढ़े 7 करोड़ की लागत से बनवाए जा रहे थे 621 आवास, 2020 तक विस्थापन की योजना के बाद भी मकान बनवाने पर याचिका में उठाए गए सवाल

डेढ़ वर्ष में ही गांवों से हटाए जाएंगे लोग, फिर पीएम आवास क्यों?
एटीआर के इस कोर क्षेत्र में शासन ने पीएम आवास योजना के तहत 621 मकानों का निर्माण कार्य शुरु कराया गया है। इसके लिए प्रति मकान की कीमत 1.20 लाख रुपए निर्धारित की गई है और ये मकान अगले 30 वर्षों को ध्यान में रख कर बनाए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को जानकारी देते हुए कहा कि जहां निर्माण कार्य कराया जा रहा है, अगले डेढ़ वर्षों में इन्हीं 19 गांवों को विस्थापित किए जाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए पूरा खाका तैयार है और प्रति परिवार 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाना भी तय किया गया है। इसके लिए इन 19 गांवों के रहवासियों ने सहमति भी दे दी है और योजना बिल्कुल अंतिम चरण में है।

6 गांवों के 250 परिवारों का हो चुका विस्थापन
25 गांवों के विस्थापन की इस योजना में 6 गांवों के 249 परिवारों का विस्थापन पहले ही सफलतापूर्वक किया जा चुका है। जबकि अन्य 19 गांवों का विस्थापन अगले तीन चरणों में किया जाना है। इसके तहत 3384 परिवारों का विस्थापन वर्ष 2019-20 तक किए जाने की योजना है। याचिका में विस्थापन को अनिवार्य बताते हुए मांग की गई है कि इन क्षेत्रों से ग्रामीणों को शिफ्ट करने से उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को पाने में सहुलियत होगी। अभी शहरी क्षेत्रों में आवागमन के लिए उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड रहा है, विशेषकर स्कूल-कालेज जाने वाले छात्र और मरीजों को खासी परेशानियों का सामना करना पड रहा है। प्रकरण की आगामी सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

अफसरों की लापरवाही, पानी में चले जाएंगे साढ़े 7 करोड़ रुपए
एटीआर से 19 गावों को हटाने का आदेश काफी पुराना है। इसके लिए सरकार ने योजना भी लागू कर दी है। इसकी जानकारी जिला प्रशासन के अफसरों से लेकर नेताओं को है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने का काम शुरू करा दिया गया। मामला हाईकोर्ट में जाने के बाद अफसरों की बोलती बंद हो गई है। माना जा रहा है कि सब कुछ जानकारी होने के बाद मकानों का निर्माण कमीशनखोरी के लिए कराया गया है। अचाकमार टाइगर रिजर्व जोन से 25 गावों को हटाने के लिए 2009 -10 से तैयारी चल रही है। विस्थापन योजना के तहत 6 गावों को हटाकर दूसरे स्थान पर बसाया गया। इसके बाद 19 गावों को हटाने के लिए शासन द्वारा सर्वे कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई। जिनके मकान हटाए जाएंगे उनको 10 लाख रुपए की मुआवजा राशि या इसके बदले में मकान व खेत बनाकर देने की योजना है। इसके लिए मुंगेली, लोरमी के आसपास कुछ जगहों पर जमीन का भी चयन कर लिया गया है। वन विभाग द्वारा लोगों को हटाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन क्षेत्र के लोगों के बार बार अडंगा लगाने के कारण यह काम आगे नहीं बढ़ पाया था। जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला पंचायत मुंगेली ने एटीआर के प्रतिबंधित 19 गावों में 622 मकान बनाने का प्रस्ताव पास कर दिया। आनन फानन में मकान बनाने का काम शुरू कर दिया गया। इसमें से 200 मकान पूरी तरह से बनकर तैयार हो गए हैं।
लगभग डेढ़ सौ घर अधूरे हैं, जिनके निर्माण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। नियमानुसार यहां एक भी निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है। यहां बसे लोगों को 2019-20 में बाहर बसाना है। इसके बावजूद यहां निर्माण कार्य कराया गया।

सुलगते सवाल
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने के पहले वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई तो वन विभाग के रिजर्व एरिया में निर्माण कैसे शुरू हो गया? आधे से ज्यादा मकान बन गए और हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद वन विभाग के अफसरों ने निर्माण पर रोक लगा दी। मकान बनाने में करोड़ों रुपए खर्च हो गए जिसका भुगतना कौन भोगेगा?

19 गावों का विस्थापन होना है इसे रोका नहीं जा सकता है। निर्माण के दौरान वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई। कोर्ट से नोटिस मिलने के बाद निर्माण कार्य को बंद करा दिया गया था। कुछ मकान बन गए हैं कुछ अधूरे हैं। आगे क्या होगा इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता है।
मनोज पाण्डेय, डीएफओ, एटीआर

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