Corona Update: होम क्वारंटीन मरीजों के ठीक होने के बाद सामने आई ये बड़ी समस्या

- नौकरी पेशा वाले काट रहे सीएमएचओ ऑफिस के चक्कर

By: Ashish Gupta

Updated: 26 Oct 2020, 07:31 PM IST

बिलासपुर. कोरोना का संक्रमण बढ़ा और जिले में सुविधा कम हुई तो शासन के निर्देश में स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित लोगों को घर में ही इलाज करने की सुविधा दे दी। शुरुआत में जिले के 20 लोगों को ही ये सुविधा मिल रही थी लेकिन मरीज और बढऩे लगे, अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या घटने लगी तो स्वास्थ्य विभाग ने इसकी तय संख्या की पाबंदी हटा कर अनलिमिटेड मरीजों को घर में ही रह कर इलाज करने के दिशा-निर्देश दे दिए।

इसमें ए सिंटोमेंटिक यानी जिनमें लक्षण नहीं है। उन लोगों को सुविधा मिल रही है। ऐसे में जब वो ठीक हो जाते हैं और अपने दफ्तर या यात्रा के लिए कहीं जाते हैं तो उनसे ठीक होने का प्रमाण पत्र यानी सर्टिफिकेट मांगा जाता है, जो स्वास्थ्य विभाग नहीं दे रहा है। ऐसे में नौकरी पेशा वाले कोरोना से ठीक हो चुके लोग कोरोना जांच सेटर, सिम्स और सीएमएचओ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन उन्हें न तो प्रमाण पत्र मिल रहा और न ही उचित सलाह मिल रही। ऐसे में लोग एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर चक्कर काटने को मजबूर हैं।

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वहीं अब तक 6325 लोग होम क्वांरटीन में रह कर ठीक हो चुके हैं। लेकिन इमें से 5234 लोगों को अब तक कोरोना से ठीक होने का सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया है। इनमें कई लोगों को तो ये भी पता नहीं है कि ठीक होने के बाद विभाग से सर्टिफिकेट भी मिलता है जिसके कारण जरुरत के समय प्रमाण पत्र मांगे जाते हैं तब वो इसे हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के चक्कर लगाते हैं।

कोविड अस्पताल में ठीक होने वाले सभी को मिलता है सर्टिफिकेट
कोरोना से संक्रमित ऐसे मरीज जिनमें लक्षण दिखता है। उन्हें स्वास्थ्य विभाग पुराना बस स्टैंड स्थित जिला कोविड अस्पातल में इलाज के लिए भेजा है। यहां ठीक होने के बाद जब इन्हें डिस्चार्ज किया जाता है तो इन्हें स्वस्थ होने का सर्टिफिकेट दिया जाता है। जबकि कम लक्षण वालों को कोविड सेंटर और बिना लक्षण वालों का घर में ही उपचार कराने के निर्देश दिए जाते है। नियमानुसार होम आईसोलेशन पीरियड खत्म होने के बाद इन्हें भी सर्टिफिकेट देना चाहिए पर स्वास्थ्य विभाग नहीं दे रहे हैं।

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विषेश लोगों को ही मिल रहा सर्टिफिकेट
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी लोगों को सर्टिफिकेट की क्या जरुरत कुछ विशेष लोगों को जिन्हें जरुरत पड़ती है। उन्हें प्रशिक्षण केंद्र के पास एक काउंटर से सर्टिफिकेट बना कर दे दिया जाता है। जबकि स्वास्थ्य विभाग जब कोई संक्रमित होम आइसोलेशन में रहता है तो उन्हें लगातार फोन कर परेशान करते हुए एक फार्म वॉटसप में सेंड करती है। और किसी भी डॉक्टर की सलाह लेने के साथ उसे भर कर भेजने के लिए दबाव बनाती है। यदि चाहे तो जिस तहर फॉर्म भेजा जाता है। उसी तरह सर्टिफिकेट भी दे सकती है।

रेलवे स्टेशन में मांगा सर्टिफिकेट
तोरवा निवासी 35 वर्षीय एक व्यक्ति को किसी काम से दिल्ली जाना था। ऐसे में उसने जम्मूतवी ट्रेन की ऑनलाइन टिकट कटा ली लेकिन जब वो रेलवे स्टेशन पहुंचे तो उनसे कुछ जानकारी ली गई जिसमें कोरोना संबंधित भी कई बात पूछी गई। ऐसे में उन्हें खुद को संक्रमित होने के बाद ठीक होना बताया। लेकिन रेलवे स्टेशन में लगे कर्मचारियों ने उनसे सर्टिफिकेट मांगी तो वो नहीं दे पाए। जिसके बाद यात्रा स्थगित कर वो अपना सर्टिफिकेट बनवाने स्वास्थ्य विभाग पहुंचे यहां कर्मचारियों से पूछा लेकिन किसी ने कुछ भी नहीं बताया जिसके बाद वो सरकंडा के कुर्मी छात्रावास जहां जांच होती है वहां पहुंचे यहां डॉक्टर नहीं हैं कहते हुए उन्हें लौटा दिया गया।

ड्यूटी ज्वाइन करने पर मेनेजर ने मांगा सर्टिफिकेट
कोरोना के कारण बहुत से सरकारी नौकरी के साथ निजी कर्मचारी भी इसके चपेट में आए। ऐसे में एक 42 वर्षीय बैक कर्मचारी से भी ड्यूटी ज्वाइन करने से पहले सर्टिफिकेट मांगा गया।

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Ashish Gupta Desk
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