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विदाई कराने ससुराल पहुंचा पति तो पत्नी बोली- अभी शुभ मुहूर्त नहीं है, साथ जाने से किया मना, मामला पहुंचा कोर्ट

Husband Wife Relation News: हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि लगभग 9-10 वर्षों से अधिक समय तक, अगर पत्नी ने साथ रहने से इनकार कर दिया, तो यह परित्याग के समान होगा। इस आधार पर डिवीजन बेंच ने पति द्वारा तलाक के लिए प्रस्तुत अपील स्वीकार कर विवाह भंग का आदेश दिया।

बिलासपुर

Published: December 31, 2021 09:32:30 am

बिलासपुर. Husband Wife Relation News: हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि लगभग 9-10 वर्षों से अधिक समय तक, अगर पत्नी ने साथ रहने से इनकार कर दिया, तो यह परित्याग के समान होगा। इस आधार पर डिवीजन बेंच ने पति द्वारा तलाक के लिए प्रस्तुत अपील स्वीकार कर विवाह भंग का आदेश दिया। कोर्ट ने पुनर्वाद की अनुमति देते हुए विवाह भंग के लिए पति की अपील स्वीकार कर ली। बता दें कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट ने पति का वाद खारिज करते हुए कहा कि पति परित्याग का आधार साबित करने में विफल रहा है। पति ने इस आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में रिट अपील दायर की।
Child marriage
विदाई कराने ससुराल पहुंचा पति तो पत्नी बोली- अभी शुभ मुहूर्त नहीं है, साथ जाने से किया मना, मामला पहुंचा कोर्ट
यह था मामला
रायगढ़ निवासी संतोष सिंह का विवाह जांजगीर की शिक्षाकर्मी के तौर पर कार्यरत अमिता से 8 जुलाई 2010 को हुआ था। वे दोनों 19 जुलाई 2010 तक साथ रहे। बाद में पत्नी के परिवार के सदस्य महत्वपूर्ण कार्य के आधार पर उसे ले गए। इसके बाद वह वापस नहीं आई। पति ने 4 अगस्त 2010 और उसके बाद दो मौकों पर पत्नी को वापस लाने की कोशिश की।
लेकिन पत्नी शुभ मुहूर्त नहीं है, के आधार पर नहीं लौटी। उसके बाद पति ने पत्नी से कहा कि वह स्वेच्छा से किसी भी समय उसके पास वापस आ जाए। पत्नी के न आने पर पति ने शादी बचाने वाद दायर किया। याचिका के जवाब में पत्नी ने तर्क दिया कि वह पति के साथ आने को तैयार और इच्छुक थी, लेकिन पति उसे शुभ मुहूर्त पर वापस लेने नहीं आया, जो उनके रिवाज के अनुसार आवश्यक था। न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए बिना सरकारी कार्य का हवाला भी दिया।
पत्नी की ओर से प्रथा का दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान बताया गया कि अनुसार द्विरागमन समारोह के दौरान पत्नी को वापस लेने के लिए पति को व्यक्तिगत रूप से आना था। पति जब आया तो शुभ मुहूर्त नहीं था। जब पति ने बाद में अगस्त और अक्टूबर, 2010 के महीने में संपर्क किया, तो उसको विशेष शुभ मुहूर्त में आने की सलाह दी।
पति के विवाह बचाने के प्रयासों पर पत्नी ने नहीं किया सहयोग
मामले की परिस्थितियों में कोर्ट ने पाया कि अपने वैवाहिक जीवन को बहाल करने के लिए पति द्वारा किए गए प्रयासों के बावजूद पत्नी ने सहयोग नहीं किया और शुभ मुहूर्त की आड़ में वह अपने मायके चली गई। इसलिए, अपीलकर्ता पति हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार तलाक की डिक्री प्राप्त करने का हकदार है।

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