नोटा नहीं छोटा, बिलासपुर विधानसभा में था नंबर-3 का विजेता, इस बार भी हवा

नोटा नहीं छोटा, बिलासपुर विधानसभा में था नंबर-3 का विजेता, इस बार भी हवा

Anil Kumar Srivas | Publish: Sep, 16 2018 02:30:50 PM (IST) Bilaspur, Chhattisgarh, India

निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को 2013 के चुनाव में नोटा विकल्प दिया था कि यदि मतदाताओं को एक भी प्रत्याशी पसंद न हो तो वे मन भरोसा कर निर्दलियों या अन्य पार्टी को मत देकर अपने मत खराब न करें।

शैलेन्द्र पाण्डेय/ बिलासपुर. राजनैतिक दल नोटा को हल्के में न लें, पिछले विधानसभा चुनाव 2013 में नोटा बिलासपुर और मुंगेली जिले के 9 विधानसभाओं में 3 रे से 10 वें नंबर तक रहा है। विश्लेषकों की नजर से देखें तो इतने वोटों से कई प्रत्याशियों की जमानत बच सकती है। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को 2013 के चुनाव में नोटा विकल्प दिया था कि यदि मतदाताओं को एक भी प्रत्याशी पसंद न हो तो वे मन भरोसा कर निर्दलियों या अन्य पार्टी को मत देकर अपने मत खराब न करें।

वे बता दें कि उन्हें इनमें से कोई प्रत्याशी पसंद नहीं है और दबा दें नोटा का बटन। मतदाताओं में प्रत्याशियों के खिलाफ इस कदर नाराजगी उभर कर सामने आई कि बिलासपुर और मुंगेली जिले के 9 विधानसभा क्षेत्रों में नोटा 3 रे से लेकर 10 वें नंबर तक रहा और नोटा ने इन विधानसभाओं में कुल 27283 वोट प्राप्त किया।
फैक्ट फाइल : पिछले विस चुनाव में नोटा को मिले थे- 27283 वोट। बिलासपुर विस में रहा- 3रे नंबर पर। मरवाही विस में सर्वाधिक- 7115 वोट पड़े थे। कोटा विस में सबसे कम पड़े थे- 1074 वोट। 608 वोटों से हारे आशीष- 1557 वोट ले गया नोटा। तखतपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से राजू क्षत्री को जहां 44735 वोट मिले तो कांग्रेस से उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे आशीष सिंह को 44127 वोट मिले। हार जीत का अंतर महज 608 वोटों का रहा। जबकि नोटा में 1557 वोट पड़े।

2475 वोटों से हारे चंद्रभान- 5025 वोट ले गया नोटा : मुंगेली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से पुन्नू लाल मोहले को 61026 वोट मिले तो कांग्रेस से प्रत्याशी रहे चंद्रभान को 58281 वोट मिले। हारजीत का अंतर जहां 2745 वोट से हुआ वहीं नोटा में यहां 5025 वोट पड़े।
लोगों की नाराजगी का चलता है पता : नोटा एक विकल्प है ऐसे लोगों के लिए जो प्रत्याशियों में से किसी को पसंद नहीं करते लेकिन वोट डालना अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और नोटा में अपने मत का प्रयोग करते हैं। इसलिए कहा नहीं जा सकता कि नोटा का वोट किस पार्टी का कितना है हां ये बात अलग है कि जनता की नाराजगी सत्तासीन पार्टी के प्रति अधिक रहती है।
हबीब खान, राजनीतिक विश्लेषक

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