हिट लिस्ट में था मेरा बेटा, फिर भी 4 साल से एक ही थाने में रखा, ट्रांसफर करते तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता

हिट लिस्ट में था मेरा बेटा, फिर भी 4 साल से एक ही थाने में रखा, ट्रांसफर करते तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता

Saurabh Tiwari | Updated: 13 Aug 2019, 09:50:03 AM (IST) Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

फरियाद लेकर 4 साल से भटक रही शहीद की मां, नेताओं और अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंगी

बिलासपुर. बेटे ने देश की रक्षा करते माओवादियों से लोहा लिया और शहीद हो गया। शहादत के बाद जो सम्मान और नियमों के तहत शहीद परिवार को सुविधाए मिलनी थी उसे अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया। सरकंडा में रहने वाले शहीद एसआई अविनाश शर्मा की मां पिछले 4 साल से नेताओं और अधिकारियों के पास फरियाद लेकर भटक रही है।अधिकारियों ने शहीद के भाई के नौकरी पर होने का हवाला देकर उसे पेंशन देना तक उचित नहीं समझा। ले देकर अधिकारियों ने शासकीय स्कूल का नामकरण शहीद एसआई के नाम पर करने के बाद खाना पूर्ति कर ली।

सरकंडा निवासी अविनाश शर्मा पिता स्व. अशोक शर्मा पुलिस विभाग में सन 2018 में सब इंस्पैक्टर के पद पर पदस्थ हुए थे। पदस्थापना के साथ ही उनकी पोस्टिंग माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में की गई। उन्होंने देश की सेवा करते हुए 2 हाईकोर माओवादियों को मार गिराया था। तब से अविनाश माओवादियों के हिट लिस्ट में थे। सन2011 से 2015 तक वे कांकेर के बांधे थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ थे। इसी बीच सचिंग के दौरान घोर माओवाद प्रभावित क्षेत्र हवलबरस में मोओवादर मुठभेढ़ में वे शहीद हो गए थे। जवान बेटे की शहादत के बाद से मां उर्वशी शर्मा सदमे में आ गई थी। कुछ महीनों तक उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनका बड़ा बेटा आशीष शर्मा पुलिस विभाग में पदस्थ है साथ ही उन्हे पति की मौत के बाद शासन से पेशन मिलती हैं। लिहाजा उन्हें अविनाश के शहीद होने के बाद पेंशन नहीं मिलेगी।

 

indian martyrs family in bad condition

अनुकंपा नियुक्ति नहीं लेकिन समकक्ष पद पर बड़े बेटे को नौकरी देने की मांग भी ठुकाई
उर्वशी शर्मा ने बताया कि उन्होंने छोटे बेटे अविनाश के शहीद होने के बाद शासन के नियमानुसार परिवार के एक सदस्य को उसी पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने पीएचक्यू के आला अधिकारियों ने सत्ता पर बैठे नेताओं से फरियाद की थी। उर्वशी ने बेटे अविनाश की शहादत पर नियमानुसार बड़े बेटे को एसआई की जगह एएसआई की पद पर पदस्थ करने की मांग की थी, लेकिन उनकी फरियादको नेताओं और अधिकारियों से ठुकरा दिया।

हिट लिस्ट में था मेरा बेटा, फिर भी 4 साल से एक ही थाने में रखा, ट्रांसफर करते तो जिंदा होता मेरा बेटा
उर्वशी ने बताया कि उनके बेटे अविनाश को अधिकारियों ने सन 2011 से 2015 तक एक ही थाने कांकेर के बांधे थाने में पदस्थ रखा था। सन 2013 में उसने 2 हाईकोर माओवादियों को मार गिराया था, इसके बादसे वह माओवादियों के हिटलिस्ट में था, सुरक्षा और नियम के तहत अविनाश को बांधे थाने से हटाकर दूसरे थाने में पदस्थ किया जाना था, लेकिन अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। ट्रांसफर किए होते हो उनका लाडला बेटा जीवित होता।

सम्मान के नाम पर खानापूर्ति
उर्वशी ने बताया कि साल में 3 बार उन्हें जिला पुलिस से सम्मानित करने के लिए बुलाया जाता है, उन्हें शॉल व श्रीफल देने के बाद घर वापस भेजा जाता है। उनकी समस्याएं और फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। लिहाजा वे अब सम्मान के लिए बुलाए जाने पर, जाना बंद कर दिया है।

ले देकर किया स्कूल का नामकरण
उर्वशी ने बताया कि पिछले 4 वर्षों से फरियाद लेकर वे रायपुर स्थित पीएचक्यू और मंत्रालय के चक्कर लगा रही हैं। उन्होंने बेटे की शहादत के बाद नेताओं और अधिकारियों से नूतन चौक स्थित शासकीय कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल का नामकरण बेटे के नाम पर करने का आग्रह किया था। ले-देकर अधिकारियों ने 4साल के बाद स्कूल का नामकरण उनके बेटे के नाम पर किया।

हरे हो जाते हैं जख्म
उर्वशी ने बताया कि देश की सेवा करते हुए अपने प्रांणों की आहूति देने वाले बेटे की शहादत के बाद विभाग के अधिकारियों और नेताओं उनके साथ सौतेला व्यवहार तो दूर समस्याएं सुनने को राजी नहीं हैं। बेटे की मौत का गम तो कभी दूर नहीं होगा, लेकिन फरियाद लेकर भटने पर उनके जख्त हरे जरूर हो जाते हैं।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned