...एकंरिग करना आसान नहीं, लेकिन यह मेरा जुनून  : मनुराज समुंद्रे, एंकर

एंकर को हर विषय का ज्ञान होना चाहिए।

By: Amil Shrivas

Published: 30 Dec 2018, 02:12 PM IST

एंकरिंग की शुरुआत कैसे की?
मुझमें जो हुनर है वो मुझे अपने परिवार से मिला है। मेरे पापा राजकुमार समुंद्रे एक एंकर व सिंगर रहे है वहीं मम्मी भी गाने की शौकीन रही है। दादा भी साहित्यकार रहे। बचपन से ही सभी को देखकर मुझमें भी गाना, डांस का शौक रहा। इसलिए मैंने एंकरिंग की शुरुआत की। यह बहुत कठिन कार्य था लेकिन एंकरिंग करना मुझे पसंद है इसलिए एंकर के तौर पर खुद को तैयार किया।
एंकर के तौर पर खुद को स्थापित कैसे किया?
एंकर का मतलब सिर्फ माइक में बोलना नहीं होता। बहुत मेहनत करनी होती है। बोलने के लिए कोई भी बोल सकता है, लेकिन उसे एंकर कहना गलत है। एंकर को हर विषय का ज्ञान होना चाहिए। वह जिस शो या कार्यक्रम को होस्ट कर रहा है, उसकी जानकारी होनी चाहिए। मुझे भी बहुत मेहनत करनी पड़ी।

एंकरिंग में कौन सी कठिनाई आती है?
एंकरिंग के क्षेत्र में कॅरियर का स्कोप कम माना जाता है लेकिन ऐसा नहीं है। बहुत अच्छा कार्य है और इसमें स्कोप भी है। दिक्कत यह है कि लोग पुरुष के बजाए महिला एंकर को ज्यादा पसंद करते है।
एंकरिंग में आपका अचीवमेंट क्या है?
एंकरिंग का कार्य तो बचपन से कर रहा हूं लेकिन इसे प्रोफेशन के तौर पर बहुत बाद में शुरू किया। अभी तक मैंने 1200 से अधिक शो व कार्यक्रम की एंकरिंग की है। खास बात यह है कि दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित कई प्रदेश में भी एंकरिंग की है।

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