बिलासपुर. महाप्रभु जगन्नाथ के रथ यात्रा की वापसी रविवार को हुई। पिछले दस दिनों से मौसी मां के घर विश्राम करने आए प्रभु को विदा किया गया। भावुक होकर मौसी गुंडिचा ने अपने लाडले को आशीर्वाद व दुलार करते हुए विदा किया। महाप्रभु के जयकारे लगाते हुए भक्तों ने भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा को रथ में विधिपूर्वक बैठाकर रिमझिम फुहार के साथ शहर का भ्रमण कराते हुए श्री मंदिर तक लेकर आए। चारों ओर जय जगन्नाथ..., स्वामी जय जगन्नाथ...व हरि बोल...की गूंज सुनाई देती रही। भक्त महाप्रभु के रथ के भक्तिभाव से बारिश में भी खींचते नजर आए। बारिश के साथ ही भक्ति की धारा भी बहती नजर आई।

श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति की ओर से आयोजित रथयात्रा उत्सव का समापन रविवार को महाप्रभु के मौसी मां गुंडिचा के घर से श्री मंदिर वापसी के साथ हुआ। महाप्रभु की बाहुड़ा यात्रा दोपहर में रिमझिम बारिश के बीच शुरू हुई। बारिश के बाद भी लोगों में रथ को खींचने उत्साह देखा गया। हरि बोल-हरि बोल कहते हुए भक्त महाप्रभु के रथ की रस्सी को खींचते हुए खुश नजर आए। बाहुड़ा यात्रा से पूर्व मौसी मां के मंदिर में भक्त महाप्रभु से मिलने पहुंचे।

जहां पर महाप्रभु की विधि-विधान से पूजा की गई। इसके बाद महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा तीनों को बारी-बारी से रथ में भक्तों ने झूलाते हुए बैठाया। मंदिर समिति के उपाध्यक्ष केके बेहरा ने बताया कि मौसी के घर माहौल भावुक हो गया था क्योंकि महाप्रभु कई दिनों से यहां पर थे और घर में रौनक थी। मौसी ने भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा तीनों को आशीर्वाद, दुलार करते हुए विदा किया। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष पीके सामंतराय, उपाध्यक्ष केके बेहरा, सचिव गजेन्द्र प्रसाद दास, सह सचिव एमके दास, एमके मोहंती, डी नायक, के पात्र, आरसी प्रधान, बीबी मोहंती, सीआर बाग, एसए मोहंती, एनसी जैना, सूर्यामनी बेहरा, एस बेहरा, रतीकांत पात्रा, आरके मोहंती, एके सरंगी, एसी बेहरा, एसके गोंडा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

मंत्री ने राजा बनकर पूरी की छेरा पेहरा की विधि
बाहुड़ा यात्रा में राजा बनकर मंत्री अमर अग्रवाल ने छेरा पेहरा की रस्म अदा की। एक राजा की तरह विधि-विधान से महाप्रभु की पूजा पंडित गोविंद प्रसाद पाढ़ी के मार्गदर्शन में किया। इसके बाद सुनहरे रंग के झाडू से रथ के चारों ओर सफाई करते हुए रस्म पूरी की। इसके बाद रथ की रस्सी को खींचकर रथयात्रा शुरू किया।

महालक्ष्मी को प्रभु ने खिलाया रसगुल्ला : नाराज महालक्ष्मी को मनाने के लिए महाप्रभु जगन्नाथ ने रसगुल्ला खिलाया। रसगुल्ला खाकर महालक्ष्मी आनंदित हुई साथ ही महालक्ष्मी को प्रभु ने शृंगार सामग्री व आभूषण प्रदान किया।
रास्ते भर गूंजता रहा जय जगन्नाथ : महाप्रभु जगन्नाथ की भव्य बाहुड़ा यात्रा बाजे-गाजे के साथ शहर भर भ्रमण किया। इस दौरान चारों ओर महाप्रभु के जयकारे गूंजते रहे। जहां रास्ते भर भक्तों ने महाप्रभु का गुणगान किया।

खिलाया 56 भोग
मौसी गुंडिचा ने प्रभु जगन्नाथ को विदा करने से पूर्व 56 तरह के भेाग अर्पित किया। जिसमें काकरा पि_ा, पोड़ो पि_ा, खीर, सब्जी, चावल, दाल, भाजी, चुरमा, मिठा चावल, मिठाई सहित कई तरह के व्यंजन खिलाए।

शहर का भ्रमण किया महाप्रभु ने
महाप्रभु जगन्नाथ की बाहुडा यात्रा मौसी मां के घर से शुरू हुई, जो मां काली मंदिर, जीएम ऑफिस, पोस्ट ऑफिस चौक, जगमल चौक, गांधी चौक, शिवटॉकिज चौक, तारबाहर चौक, बड़ा गिरिजाघर चौक, रेलवे स्टेशन, तितली चौक होते हुए श्री मंदिर यानी की जगन्नाथ मंदिर पहुंची। रथ में सवार होकर महाप्रभु जगन्नाथ ने भक्तों को दर्शन दिया।

दो घंटे तक बाहर रथ में रहे प्रभु
रात साढ़े सात बजे महाप्रभु जगन्नाथ श्री मंदिर पहुंचे। जहां पर नाराज महालक्ष्मी ने भाई बलभ्रद व बहन सुभद्रा को अंदर आने दे दिया। लेकिन जब महाप्रभु को अंदर ले जाने लगे तो दरवाजा बंद कर लिया। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि यह एक रस्म होती है, जिसमें नाराज महालक्ष्मी प्रभु को अंदर आने नहीं देती है क्योंकि वे मौसी के घर अकेले ही चले गए थे। लगभग दो घंटे तक महाप्रभु को रथ में ही बैठे रहना पड़ा।
मनाने के बाद ही मंदिर ने प्रभु को अंदर आने दिया।

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