जानिए एक पुस्तकालय के लिए क्या है आवश्यक, कितना रहना होता है अवेयर

ताकि पुस्तकालयों के उद्देश्यों की मूलभूत उपलब्धि सुनिश्चित की जा सके एवं पुस्तकालय संसाधनों में निहित जानकारी को संप्रेषित किया जा सके।

बिलासपुर। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) की कला विद्यापीठ के अंतर्गत पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में पुस्तकालयों के प्रबंधन पर सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव का अध्ययन किया गया है। शोधार्थी डॉ. मनीष शर्मा ने इस विषय पर शोध किया है। उनके शोध निर्देशक डॉ. ब्रजेश तिवारी, सह-प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग हैं। शोधार्थी डॉ. मनीष शर्मा को वर्ष 2010 में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। वर्तमान में डॉ. शर्मा ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ (छ.ग.) में पुस्तकालयाध्यक्ष हैं।
उक्त शोध का शीर्षक ''पुस्तकालयों के प्रबंधन पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) का प्रभाव: छत्तीसगढ़ में चयनित पुस्तकालयों का तुलनात्मक अध्ययन'' है। शोध से प्राप्त निष्कर्ष के अनुसार पुस्तकालय प्रबंधन के विशेषज्ञों को सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभाव के बारे में पता होना चाहिए, ताकि पुस्तकालयों के उद्देश्यों की मूलभूत उपलब्धि सुनिश्चित की जा सके एवं पुस्तकालय संसाधनों में निहित जानकारी को संप्रेषित किया जा सके।
इस पर वर्तमान में अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया गया है। प्रस्तुत शोध कार्य में सामान्य रूप से पुस्तकालयों के प्रबंधन में सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभाव को समझने, विश्लेषण करने औरक परिमाणित करने का प्रयास किया गया है। इससे पुस्तकालय के कार्यक्षेत्र में उपलब्ध साहित्य का अंतराल कम होने की संभावना है।
अनुसंधान मुख्य रूप से किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए होता है। उक्त शोध के अंतर्गत पुस्तकालय प्रबंधन के विशेषज्ञों को सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावों की जानकारी होना आवश्यक बताया है, ताकि पुस्तकालयों के उद्देश्यों की मूलभूत उपलब्धि सुनिश्चित की जा सके।

JYANT KUMAR SINGH
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