ये हैं ठगी की वो 16 वारदातें जिसमे पढ़े लिखे लोग भी नहीं लगा पाए दिमाग और उन्हें लग गई लाखों की चपत

ये हैं ठगी की वो 16 वारदातें जिसमे पढ़े लिखे लोग भी नहीं लगा पाए दिमाग और उन्हें लग गई लाखों की चपत

Murari Soni | Publish: May, 18 2019 12:20:47 PM (IST) Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

ठगी करने वाले जालसाजों के पास कई तरीके, पढ़े लिखे लोग बन रहे निशाना, पिछले 2 महीनों में शहर में हो चुकी है 17 से वारदातें

बिलासपुर पत्रिका. ठगी करने वाले जालसालों ने लोगों को शिकार बनाने के लिए कई तरीके ढूंढ निकाले हैं। इनमें रकम दो गुना कर वापस देने, जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर रकम लेने से लेकर रेलवे में स्टॉल दिलाने तक के तरीके शामिल हैं। हैरत की बात तो यह है ऐसे ठगों के झांसे में पढ़े लिखे लोग भी आसानी से फंस रहे हैं। पिछले 2 महीनों में जिले में 20 ठगी की वारदातें सामने आ चुकी हैं।

केस-1
तारबाहर निवासी होटल संचालक मितेश चौकसे पिता महेश की मुलाकात सन 2017 में छतरपुर मध्यप्रदेश निवासी अतुल यादव पिता जितेन्द्र से हुई थी। उसकी बातों में आकर रकम जमा करने पर दोगुना वापसी के चक्कर में मितेश ने 12 लाख रुपए मई 2017 को पत्नी ट्वींकल के खाते से अतुल के बैंक खाते में 12 लाख रुपए आरटीजीएस किए थे। रकम मिलने के बाद अतुल फरार हो गया। मितेश को कंपनी का नाम और पता भी मालूम नहीं था। पैसे वापस नहीं मिलने पर मितेश ने शिकायत थाने में दर्ज कराई।
केस-2
कोतवाली थानांतर्गत करबला निवास व वन विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी हरेन्द्र नाथ पांडेय की मुलाकात अप्रैल 2017 में सरकंडा स्थित बाजाली ग्रुप बिल्डर्स एण्ड डेवलपर्स के संचालक अभिवन पाठक व मिथलेश से हुई थी। दोनों ने उन्हें बताया था कि ग्राम लिंगियाडीह में उनकी 58 डिसमिल जमीन है, जिसे वह बेचना चाहते हैं। पांडेय ने दोनों भाइयों को 31 मई 2017 को 20 लाख रुपए एकमुश्त देकर इकरारनामा किया था। बाद में उन्हें पता चला कि जमीन अभिनव और मिथलेश के नाम पर नहीं बल्कि दूसरे व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। पांडेय को रकम नहीं लौटायी।
केस-3
शंकर नगर निवासी मो. हाशिम पिता रूस्तम शोहराब की अक्टूबर 2016 में रेलवे कॉलोनी निवासी धनंजय भोई से भेंट हुई थी। धनंजय ने कहा कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म में स्टॉल लीज पर दिला सकते हैं। उसकी बातों में आकर हाशिम ने उसे रेलवे में स्टॉल के लिए 8 लाख रुपए दिए थे। रकम लेने के बाद हाशिम को स्टॉल मिला और न ही रकम मिली।
केस-4
तोरवा थानांतर्गत आरटीएस कॉलोनी निवासी व रेल कर्मी श्यामू पिता बी रामटेके का व्यापार विहार स्थित यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में खाता है। 25 अप्रैल को उनके खाते से ठग ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित ब्रिज विहार स्थित एटीएम बूथ से 80 हजार रुपए पार कर दिए।
केस-5
विकास नगर 27 खोली निवासी शकील मोहम्मद पिता साबिर मोहम्मद की की मुलाकात तालापारा निवासी उदयकृष्ण रात्रे से मई 2015 में हुई। उदयकृष्ण ने शकील से 5 लाख का भुगतान ले लिया और जमीन पर दुकान बनाकर देने का एग्रीमेंट किया था। बाद में शकील को पता चला कि जमीन उदयकृष्ण के नाम पर नहीं है।
केस-6
हिर्री थानांतर्गत ग्राम मोहदा निवासी संतराम साहू पिता ताजन साहू की मुलाकात सन 2015 में बिलासपुर में रहने वाले योगेश सोनवानी से हुई थी। संतराम ने फूड इंस्पेक्टर की नौकरी लगाने के नाम पर योगेश को 7 लाख रुपए दिए। नौकरी नहीं लगने पर संतराम को ठगी का शिकार होने का अहसास हुआ था।
केस- 7
रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉलोनी निवासी व रेल कर्मी प्रशांत कुमार सिंह 30 मार्च 2019 को संघाई रिटेल नेटवर्क स्टोर-24 डॉट कॉम पर मोबाइल खरीदने के लिए आर्डर किया था। वेबसाइट के माध्यम से उसने कंपनी में 5298 रुपए जमा किए थे। धोखे से उन्होंने रकम दो बार कंपनी में जमा कर दी थी। कंपनी से संपर्क करने पर कस्टमर केयर के कर्मचारियों ने एनीडेस्ट एप डॉउनलोड कवाया और एटीएम का 16 डिजिट का नंबर लेने के बाद उसके खाते से 21 हजार रुपए पार कर दिए।
केस-8
सदर बाजार सराफा मार्केट स्थित श्रीराम ज्वेलर्स के संचालक विवेक अग्रवाल से किशोर शू मॉल के संचालक मोतीलाल दयालानी ने 12 लाख के गहने खरीदे थे। मोतीलाल ने भुगतान के लिए विवेक को 12 लाख रुपए का चेक दिया था, जिसे बैंक में जमा करने पर चेक बाउंस हो गया था। विवेक को अभी तक रकम नहीं मिली।
केस-9
मंगला दीनदयाल कॉलोनी निवासी अंबिका प्रसाद पिता लक्ष्छी राम भारद्वाज की मुलाकात बिलासपुर रेलवे स्टेशन में सितंबर 2017 में जांजगीर-चांपा के ग्राम अमरताल निवासी पूनम चंद लहरे से ओरउसकी पत्नी भगवती लहरे से हुई थी। उसके झांसे में आकर अंबिका प्रसाद ने 3 लाख 40 हजार रुपए दिए थे। रकम लेने के बाद दंपती फरार हो गए थे। बाद में अंबिका प्रसाद को पता चला कि पूनम चंद सरकारी कर्मचारी नहीं है।
केस- 10
कवर्धा निवासी व पटवारी सुरेश चन्द्राकर और समानंद चन्द्राकर ने अरविंद मार्ग सरकंडा निवासी हर्षुल जाधव और बलौदा बाजार निवासी अरूण वर्मा के साथ सरकंडा में कैरियर ड्रीम एकेडमी नाम से कंपनी खोली थी। कंपनी में रकम जमा करने पर उन्हें दो गुना फायदा होगा। ठेकेदार व चांदनी चौक कुदुदंड निवासी अभय राव फानसे पिता राजेन्द्र राव ठेकेदार और सिम्स के एक डॉक्टर समेत सैकड़ों लोगों ने पटवारियों के झांसे में आकर लाखों रुपए कंपनी में जमा किए थे। पैसा लेकर फरार हो गए।
केस-11
चिंगराजपारा निवासी दिलीप सिंह पिता मुख्तार सिंह ऑर्टिफिशियल चूड़ी व्यापारी हैं। 20 मार्च को उनके घर भिलाई अंतर्गत चरौदा निवासी करीब आधा दर्जन युवक आए थे। युवको ने उन्हें बताया कि वे हंडे से मिले जेवरों को बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहे हैं। दिलीप ने चांटीडीह स्थित एक सोनार दुकान में युवकों के जेवरों की जांच कराई, जिसमें जेवर सोने के थे। युवकों से दिलीप ने 50 हजार रुपए देकर जेवर खरीदे थे। युवकों ने दिलीप को नकली जेवर थमा दिए थे।
केस-12
सिविल लाइन थानांतर्गत भारतीय नगर निवासी शेखर पांडे पिता गनपत पांडेय के मोबाइल पर 28 फरवरी को अनजान नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले ने अपना नाम आशीष और एसबीआई का मैनेजर बताते हुए शेखर को डेबिट कार्ड बंद होने की जानकारी दी। फिर खाते से 27 हजार रुपए पार कर दिया।
केस-13
भारतीय नगर निवासी व मौलवरी मो. किफायतुल्लाह पिता अताउल्लाह अंसारी के मोबाइल पर 2 मार्च को दोपहर ढाई बजे अनजान नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को आईडीबीआई बैंक का मैनेजर बताते हुए डेबिट कार्ड और खाता बंद होने की जानकारी दी। खाता और डेबिट कार्ड चालू रखने के लिए ठगी ने उनसे एटीएम कार्ड का नंबर पूछा। झांसे में आकर किफायतुल्लाह ने एटीएम कार्ड का नंबर बता किया। ठग ने उसके खाते से 76 हजार रुपए पार कर दिए।
केस-14
सरकंडा थानांतर्गत ग्राम पसासी के सचिव राजीव शुक्ला को सन 2018 में पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत खर्च होने वाली राशि निकालने के लिए गांव की सरपंच गायत्री देवी ने 3 चेक में हस्ताक्षर कर दिए थे। सचिव ने तीनों चेकों में लिखी गई राशि के सामने एक-एक अंक बढ़ा कर सरकारी खजाने से कुल 20 लाख रुपए निकाल लिए थे। ऑडिट रिपोर्ट में इसका खुलासा होने पर बिल्हा जनपद पंचायत सीईओ की शिकायत पर आरोपी सचिव के खिलाफ पुलिस ने अपराध
दर्ज किया।
केस- 15
सरकंडा बंधवापार निवासी व एलआईसी एजेंट लखन सिंह राजपूत ने 11 मार्च को रात 9 बजे नूतन चौक स्थित पीएनबी एटीएम से रकम निकाली थी। दूसरी बार रकम न निकलने पर उन्होंने पीएनबी के टोल फ्री नबर पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। 12 मार्च को कॉल करने वाले ने खुद को पीएनबी का अधिकारी बताते हुए एटीएम में फंसी रकम को वापस दिलाने की बात कही। लखन ने एनीडेस्क एपर डॉउनलोड कराया और मोबाइल पर आए 9 अंकों का नंबर पूछा लिया। कॉल करने वाले ने उनके खाते से 33 हजार रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया।
केस-16
शंकर नगर निवासी व रेल कर्मी साधनचन्द्र धारा ने11 फरवरी 2019 को रायपुर से हैदराबादइ व गोवा जाने के लिए इंडिगो एयर लाइंस की दो फ्लाइट में इंटरनेट पर माई ट्रिप कंपनी के वेबसाइट के जरिए आनलाइन टिकट बुकिंग की थी। फ्लाइट रद्द होने पर रकम वापस मांगी। रकम वापस नहीं मिलने पर उन्होंने 3 मार्च 2019 को कंपनी के टोलफ्री नंबर पर संपर्क किया। कंपनी के अधिकारियों के बताए अनुसार उन्होंने 5 अलग-अलग नंबरों पर दिए गए मैसेज को भेजने कहा था। मैसेज भेजने के बाद उनके खाते से 1 लाख 9 हजार रुपए दूसरों के बैंक खातों में ट्रांसफर हो गए थे।

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