मरवाही की जीत को मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक, संगठन और उम्मीदवार दोनों को दिया श्रेय

- के. के. धु्रव के विधायक चुने जाने के बाद 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस के 70 विधायक हो गए हैं। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 68 सीटों पर जीत हासिल की थी। उसके बाद हुए सभी उपचुनावों में जीत हासिल कर कांग्रेस ने 70 का आंकड़ा पूरा कर लिया।

By: Bhupesh Tripathi

Published: 12 Nov 2020, 04:31 PM IST

बिलासपुर. मरवाही उपचुनाव में जीत के बाद बुधवार को नवनिर्वाचित विधायक डॉक्टर केके धु्रव राजधानी पहुंचे। डॉक्टर धु्रव ने यहां रेस्ट हाउस पहुंचकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मरवाही उप-चुनाव में मिली शानदार सफलता के लिए डॉक्टर केके धु्रव राजस्व मंत्री और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के प्रभारी जयसिंह अग्रवाल, विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर चरणदास महंत, मंत्रियों, विधायकों, निगम-मण्डलों के अध्यक्षों और स्थानीय नागरिकों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल डॉक्टर केके धु्रव को साथ लेकर कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन पहुंचे। यहां प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम सहित पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठन की ताकत के साथ डॉक्टर केके धु्रव की सहजता, सरलता और सेवाभाव की बदौलत ये ऐतिहासिक जीत मिली है। उधर, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर इस जीत का स्वागत किया। मरवाही उपचुनाव में कांग्रेस के डॉ. केके धु्रव ने भाजपा के डॉ. गंभीर सिंह को 38 हजार से अधिक वोटों से हरा दिया। इसके साथ ही कांग्रेस ने अपनी पारंपरिक सीट पर वापसी कर ली है।

90 सीटों वाली विधानसभा में अब 70 विधायक
के. के. धु्रव के विधायक चुने जाने के बाद 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस के 70 विधायक हो गए हैं। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 68 सीटों पर जीत हासिल की थी। उसके बाद हुए सभी उपचुनावों में जीत हासिल कर कांग्रेस ने 70 का आंकड़ा पूरा कर लिया। विधानसभा में अब विपक्ष के तौर पर भाजपा के 14, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के 4 और बसपा के 2 विधायक रह गए हैं।

कांग्रेस ने जोगी का छीना गढ
संयुक्त मध्य प्रदेश के समय से ही मरवाही कांग्रेस का गढ़ रहा है। 1977 और 1980 के चुनाव में डॉ. भंवर सिंह पोर्ते ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता। 1985 में कांग्रेस के ही दीनदयाल पोर्ते ने जीत हासिल की। नाराज भंवर सिंह पोर्ते ने 1990 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और पहली बार यहां भाजपा जीती। 1993 में कांग्रेस के पहलवान सिंह यहां से विधायक निर्वाचित हुए। 1998 में भाजपा के रामदयाल उइके ने जीत हासिल की।

2001 में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के लिए इस्तीफा दे दिया, तब से यह अजीत जोगी की सीट बनकर रह गई। 2013 में अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी यहां से विधायक चुने गए। 2018 में जकांछ से चुनाव लडऩे के बावजूद अजीत जोगी ने बड़े अंतर से चुनाव जीता। कांग्रेस उस बार यहां तीसरे स्थान पर रही थी।

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