कोरोना काल में एडमिशन को लेकर छात्रों में नहीं दिख रहा उत्साह, विश्वविद्यालय में 95 प्रतिशत सीट खाली

कोरोना के अलावा विश्वविद्यालय व महाविद्यालय प्रबंधन मैरिट सूची में आने वाले छात्रों के कई जगह एक साथ फॉर्म जमा करने को इसका कारण मान रहे हैं तो वहीं कुछ महाविद्यालय दूसरी सूची जारी कर चुके हैं तो कुछ जारी करने की तैयारी में हैं

By: Karunakant Chaubey

Published: 02 Sep 2020, 03:06 PM IST

बिलासपुर. अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर व संबद्धता प्राप्त महाविद्यालयों में एडमिशन की लास्ट डेट निकल चुकी है वहीं मुहर्रम व लगातार पड़ी छुट्टियों को देखते हुए एडमिशन की अंतिम तारिख 5 सितम्बर तक बढ़ी है। बावजूद इसके शासकीय व निजी महाविद्यालयों में एडमिशन महज गिनती के हुए हैं। कोरोना के अलावा विश्वविद्यालय व महाविद्यालय प्रबंधन मैरिट सूची में आने वाले छात्रों के कई जगह एक साथ फॉर्म जमा करने को इसका कारण मान रहे हैं तो वहीं कुछ महाविद्यालय दूसरी सूची जारी कर चुके हैं तो कुछ जारी करने की तैयारी में हैं।

जून में रिजल्ट आने के बाद जुलाई या अगस्त तक महाविद्यालयों में एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती थी। संकाय में सीटें रिक्त होने की स्थिति में सितम्बर के पहले सप्ताह में सभी सीटें फूल होकर एडमिशन प्रक्रिया समाप्त हो जाती थी, लेकिन सितम्बर माह बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों के सभी संकायों की सीट लगभग खाली है।

विश्वविद्यालय से मिले आंकड़ों की मानें तो अब तक महज 5 से 7 प्रतिशत ही एडमिशन अब तक हुए हैं। 5 सितम्बर एडमिशन की लास्ट तारीख होने के कारण विश्वविद्यालय में एडमिशन संबंधी पूरे आंकड़े नहीं पहुंच सके हैं। विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार कॉमर्स विभाग में 60 सीटों पर 14 एडमिशन ही हुए र्हं। फ्रुट प्रोसेसिंग में 30 में से 3 सीटों पर ही एडमिशन हुआ है। कम्प्यूटर साइंस एंड़ एप्लीकेशन की 40 सीटों में से महज 3 सीट ही भरी है।

वहीं अन्य सब्जेक्ट का भी यही हाल है। वहीं शहर के अन्य महाविद्यालयों में एडमिशन को लेकर ऐसा ही हाल है। महाविद्यालय प्रबंधनों की मानें बारहवीं पास छात्र के पास संकाय के साथ ही इंजीनियरिंग व कई विकल्प होते हैं। मेरिट सूची में आने वाले छात्र कई कॉलेजों में फॉर्म भी जमा करते हैं। यह भी एक कारण है। तीसरा कारण कोरोना संक्रमण है जिसकी वजह से अभिभावक अपने बच्चो क ो कॉलेज नहीं भेज रहे हैं। एडमिशन की सुस्त चाल को देखते हुए विश्वविद्यायालय व महाविद्यालय प्रबंधन भी सकते में हैं।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned