प्रशासन ने नहीं सुलझाया विवाद, सिटी बसों का परिचालन ठप, 70 चालक-परिचालक गिरफ्तार, देखें वीडियो

निगम प्रशासन ने पुलिस प्रशासन व कोनी थाना पुलिस को किसी अनहोनी की आशंका का हवाला देकर बल की मांग की थी।

By: Amil Shrivas

Published: 12 Nov 2017, 01:47 PM IST

बिलासपुर . जिला प्रशासन द्वारा समय रहते सिटी बस के चालक-परिचालकों द्वारा सौंपे गए ६ सूत्रीय मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। इससे चालक-परिचालक संघ ने शनिवार को काम बंद हड़ताल कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने 70 चालक-परिचालकों को गिरफ्तार कर प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया तो शिवसैनिकों ने सुबह 5 बजे डिपो में पहुंचकर हंगामा मचाया और बसों का परिचालन बंद करा दिया। इसके चलते डिपो से 50 में से 8 बसें ही निकल सकीं। चालक परिचालकों को कुछ देर बाद रिहा कर दिया गया। इधर ठेका कंपनी ने संघ के आरोपों को निराधार बताया है। सिटी बस चालक-परिचालक और ठेका कंपनी श्री दुर्गा अम्बा के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। चालक-परिचालकों ने ७ नवंबर को कलेक्टर को ज्ञापन देकर अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर डिपो का घेराव करने की चेतावनी भी दी थी। वहीं निगम प्रशासन ने पुलिस प्रशासन व कोनी थाना पुलिस को किसी अनहोनी की आशंका का हवाला देकर बल की मांग की थी।

शनिवार को सुबह चालकों व परिचालकों ने हड़ताल कर डिपो में हंगामा मचाया और बसों को डिपो से निकलने नहीं दिया। सूचना मिलने पर पहुंची कोनी पुलिस ने 70 चालकों और परिचालकों को गिरफ्तार कर कोनी थाने में बिठा लिया। खबर मिलने पर शिवसेना और भारतीय कामगार सेना के पदाधिकारियों और सदस्यों ने डिपो व कोनी थाने पहुंचकर कार्रवाई का विरोध करते हुए हंगामा मचाया। शनिवार को डिपो से 50 में से महज 8 बसें ही सड़कों पर निकल सकीं। हड़ताली चालक-परिचालकों व शिवसैनिकों ने उन बसों को रास्ते मे रोककर उनके ड्राइवरों को रविवार को बसें न निकालने की चेतावनी दी। पुलिस ने सभी ७० चालकों और परिचालकों के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई की है। प्रदर्शन के दौरान रामायण गंधर्व, दशरथ साहू, प्रभु वस्त्रकार, अनिल यादव, राधे खांडेकर, वैभव तंबोली, महिला सेना से संगीता सोनी, मीना साहू, अनामिका अवस्थी आदि
मौजूद थे।

ये हैं आरोप : रेलवे स्टेशन से तखतपुर तक चार राउंड लगाने कहा जाता है। सिटी बस पंचर हो जाए या फिर कोई तकनीकी खराबी या नुकसान होने पर खुद के खर्चे से बनवाने के लिए कहा जाता है। 8 घंटे के बजाए 12 से 15 घंटे तक ड्यूटी कराने के बाद महज 2 घंटे का ओव्हर टाइम दिया जाता है। यदि कोई चालक-परिचालक इसका विरोध करता है तो गाली गलौज कर उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। एेसे 25-26 लोगों को तत्काल काम पर वापस लिया जाए। ठेका कंपनी द्वारा बिना परमिट वाले मार्ग पर भेजा जाता है जो अवैध है। चालकों और परिचालकों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। समय निर्धारित कराया जाए।
सारे आरोप निराधार : आज तक चालक-परिचालकों का वेतन नहीं काटा गया है। केवल लापरवाही उजागर होने पर एक चालक को वेतन काटने की चेतावनी दी गई लेकिन काटा नहीं गया। दरअसल मामला गलती उजागर होने कुछ चालकों को सेवा से पृथक करने का है। शराब और गांजा पीकर गाड़ी चलाने वाले चालकों को वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, जो गलत है। शनिवार को इन सबके बावजूद 8 गाडि़यां निकाली गई हैं।
लक्ष्मीकांत तिवारी, प्रोजेक्ट मैनेजर, श्री दुर्गा अंबा लिमिटेड

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