3 साल के लिए बनाया था जैविक खेती का लक्ष्य, किसानों तक नहीं पहुंच पाया सिस्टम, निजी कंपनियों ने भी नहीं दिखाया उत्साह

0 जांजगीर जिले में सबसे ज्यादा रकबे में जैविक खेती
0 कोरिया में बिलकुल नहीं हुआ कोई काम

By: Barun Shrivastava

Published: 15 Sep 2021, 11:40 AM IST

बिलासपुर, सरगुजा संभाग.

राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक अन्न में पेस्टीसाइड्स के साइड इफैक्ट्स तेजी से बढ़ रही हैं। कई बीमारियों का यह अनाज कारण बन रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्यों की ओर से जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन इनके जमीन पर नतीजे बहुत धीरे आ रहे हैं। राज्य सरकार ने 3 साल पहले जैविक खेती मिशन योजना शुरू की थी। इसके तहत 22 जिलों के एक-एक ब्लॉक में प्रायोगिक खेती शुरू की गई थी। इसमें कृषि उत्पादों को मंडी में अलग से खरीदने की व्यवस्था का भी वादा किया गया था। साथ ही प्रति एकड़ 10 हजार रुपए का घोषित किया गया था। इसके लिए कई निजी एजेंसियों का सहारा भी लिया गया। अनुदान तो किसानों को मिल गया, लेकिन मंडी में अलग से खरीदी नहीं हो सकी।

जैविक खेती में जांजगीर सबसे आगे

बिलासपुर के कोटा ब्लॉक में 500 एकड़ में जैविक खेती की जा रही है। बिल्हा, तखतपुर, मस्तूरी विकास खंड़ों में प्रायोगिक तौर पर चालू खरीफ फसल में 15-15 हेक्टेयर में धान की बोआई की गई है। गोबर खरीदी योजना से प्राप्त गोबर से इन किसानों को लैब से टेस्टेड गोबर खाद भी दिया जा रहा है। लेकिन जिले के जैविक किसानों की उत्पाद प्रमाणन के लिए जैविक उत्पाद प्रमाणन बोर्ड रायपुर पर निर्भरता है। वहीं जांजगीर में भी 500 जैविक किसान हैं, जो 20 हजार हेक्टेयर में जैविक खेती कर रहे हैं। सरकार प्रोत्साहन योजना के तहत क्लस्टर बनाकर खाद, बीज, दवा का नि:शुल्क वितरण कर रही है। डीडीए एमआर तिग्गा ने बताया जैविक उत्पाद को आरएओ प्रामाणित करते हैं। इसके अलावा थर्ड पार्टी प्रमाणन सुविधा भी है। कोरबा में 948 जैविक किसान 1000 हेक्टयर में जैविक खेती करते हैं। जिले के विकासखंड पोड़ी-उपरोड़ा को जैविक खेती के लिए चुना गया है। केन्द्र की ओर से परंपरागत कृषि विकास योजना और राज्य सरकार की ओर से जैविक खेती मिशन योजना इन किसानों को प्रोत्साहित करते हैं। जिलेे में राज्य, केंद्र की पार्टीसिपेट्री गरांटी स्कीम के तहत निजी एजेंसियों को प्रमाणन का अधिकार है। बिलासपुर संभाग के रायगढ़ जिले में 13 हजार हेक्टेयर में जैविक खेती होती है। पहले यह सिर्फ लैलुंगा ब्लाक तक ही सीमित थी, अब पूरे जिले में खेती होने लगी है। रायगढ़ में कृषि विभाग से अनुबंधित बैंगलौर की संस्था इनका प्रमाणन देखती है। बिलासपुर संभाग में जांजगीर जैविक खेती में सबसे आगे है।

सरगुजा संभाग में कोरिया में सबसे कम जैविक खेती

जशपुर में जैविक खेती मिशन और परंपरागत कृषि विकास योजना को मिलाकर जिले के 505 किसान 1550 एकड़ क्षेत्र में जैविक खेती कर रहे हैं। दिल्ली की सील बायोटेक कंपनी इनका प्रमाण करती है। प्रमाणित उत्पाद पर 9 हजार रुपए प्रति एकड़ का अनुदान भी किसानों को मिलता है। सरगुजा संभाग के बलरामपु, सूरजपुर में भी जैविक खेती हो रही है, लेकिन नए किसान जोडऩे की गति बहुत धीमी है। वहीं अंबिकापुर में 1580 किसान, 2950 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं। इनका प्रमाणन पीजीएस इंडिया और बायोकास्ट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड मिलकर करते हैं। किसानों को यहां 10 हजार रुपए प्रति एकड़ सब्सिडी दी जा रही है। वहीं सभाग के कोरिया में वैष्णो देवी समूह तारबहार की महिलाएं ढाई एकड़ में जैविक खेती कर रही हैं, लेकिन इसे पूर्ण जैविक खेती नहीं कहा जा सकता।

ऐसे मिलती है सब्सिडी

खेती की तैयारी व बौनी- 1500 रुपए
बीज- 700 रुपए
खरपतवार प्रबंधन- 1000 रुपए
जैविक कीट प्रबंधन- 2300 रुपए
बीजोपचार- 1000 रुपए
बेचते समय- 3500 रुपए

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Barun Shrivastava Editorial Incharge
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